बदलेगा चाल, चेहरा, चरित्र!
06-Dec-2021 12:00 AM 3265

चाल, चेहरा और चरित्र वाली भाजपा में बड़े बदलाव के आसार नजर आ रहे हैं। शायद इसकी वजह है मिशन-2023 और 2024। मिशन को पूरा करने के लिए भाजपा ने मप्र सहित देशभर में 51 फीसदी वोट का टारगेट रखा है। इस टारगेट को पाने के लिए मप्र में सत्ता और संगठन को कसौटी पर परखा जा रहा है। इसके लिए विगत दिनों विधायकों से दो दिनों तक वन-टू-वन की गई, उसके बाद कार्यसमिति में टारगेट तय किया गया, फिर मंत्रियों, पदाधिकारियों से उनके कार्यकाल का हिसाब लिया गया। इन सबके आधार पर सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव का खाका तैयार होगा।

भाजपा अपनी हर गलती से सबक लेती है और फिर नई तैयारी से जुट जाती है। यानी पार्टी हार के बाद जीत के लिए पूरे तन-मन से लग जाती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मप्र में 2018 का विधानसभा चुनाव रहा है। इस चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए भाजपा ने अभी से मिशन 2023 की तैयारी शुरू कर दी है। सत्ता और संगठन लगातार मिशन 2023 को लेकर मंथन कर रहे हैं। आलाकमान ने प्रदेश संगठन को 51 फीसदी वोट पाकर 200 से अधिक सीटें जीतने का टारगेट दिया है। ऐसे में पार्टी ने रणनीति बनाई है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता और संगठन से उन चेहरों को बाहर किया जाए जिनकी परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं है। इसके लिए नवंबर महीने में कई स्तरों पर परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार की गई। अब यह रिपोर्ट आलाकमान के पास पहुंच गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर सत्ता और संगठन का चाल, चेहरा और चरित्र बदला जाएगा।

गौरतलब है कि मप्र भाजपा और संघ की प्रयोगशाला के रूप में जाना जाता है। अपनी नई नीति और रणनीति का यहीं परीक्षण होता है। फिर उसे दूसरे राज्यों में लागू किया जाता है। अपनी इसी रणनीति के तहत भाजपा ने मिशन 2022, 2023 और 2024 के लिए 51 फीसदी वोट का टारगेट निर्धारित किया है। इस टारगेट को किस तरह हासिल किया जाएगा, इसके लिए मप्र में फॉर्मूले का परीक्षण किया जा रहा है। इस फॉर्मूले के तहत प्रदेश में ओबीसी के बाद अब जनजातीय समुदाय पर फोकस किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेशभर में अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उससे भाजपा में संतोष की लहर देखी जा रही है। इसी संतोष को देखते हुए नवंबर माह में मप्र भाजपा के नेताओं को कई स्तरों पर परखा गया। परीक्षण के बाद केंद्र और राज्य के नेता रिपोर्ट तैयार कर आलाकमान को देंगे, जिसके आधार पर सरकार में आगामी समय में बदलाव किए जाएंगे।

51 फीसदी का टारगेट

मिशन 2023 की तैयारी में जुटी भाजपा के नेताओं और विधायकों ने कार्यसमिति की बैठक में संकल्प लिया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 51 फीसदी वोटशेयर के लिए आज से ही जुट जाएंगे। गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से अधिक वोट हासिल करने के बाद भी भाजपा सत्ता से बाहर हो गई थी, क्योंकि सीटों की संख्या कम थी। इसलिए पार्टी 2 साल पहले चुनावी मोड में आ गई है। इसके लिए जहां 24-25 नवंबर को भाजपा कार्यालय में सत्ता और संगठन में अपने 127 विधायकों से मैदानी फीडबैक लिया, वहीं 26 नवंबर को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रहलाद पटेल सहित प्रदेश भाजपा के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों, मंत्रियों, विधायकों की उपस्थिति में हुई कार्यसमिति की बैठक में जमकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार की तारीफ की गई। मिंटो हॉल में आयोजित बैठक विधानसभा चुनाव की रणनीति पर आधारित थी, लेकिन इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी योजनाओं की खूब तारीफ हुई। स्वागत भाषण में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने राजगढ़ में आयोजित पिछली कार्यसमिति की बैठक में लिए गए निर्णय का अनुमोदन करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस दौरान संविधान दिवस के मौके पर सभी पदाधिकारियों ने संविधान की शपथ ली और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को याद किया।

2023 में 200 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने के लिए भाजपा ने 51 फीसदी वोट पाने की कार्ययोजना बनाई है। इसके लिए पार्टी अभी से अभियान शुरू करने जा रही है। प्रदेश भाजपा के प्रभारी पी मुरलीधर राव का कहना है कि वर्ष 2022 के अंत तक प्रदेश में भाजपा का वोट प्रतिशत 51 फीसदी करना है। यह पार्टी का नया लक्ष्य है। इसके लिए बूथ को पैमाना बनाया जाएगा। पार्टी का सीधा फॉर्मूला है कि हर बूथ पर मौजूदा वोट प्रतिशत में 10 फीसदी की वृद्धि करना है। इसके लिए सत्ता और संगठन मिलकर प्रयास करेंगे। जिस प्रकार किसी समय कांग्रेस का जनाधार था, उसी प्रकार अब पंचायत से संसद तक भाजपा ही रहेगी।

गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से अधिक सीटें जीती थीं, लेकिन भाजपा का वोट प्रतिशत उससे अधिक था। इसलिए पार्टी ने 2018 में मिले 41 फीसदी वोटों को 2023 में 51 फीसदी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश भाजपा के प्रभारी पी मुरलीधर राव का कहना है कि इसके लिए पार्टी हर स्तर पर काम करेगी। उनका कहना है कि प्रदेश में सरकार और संगठन में समन्वय बहुत अच्छा है। बतौर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बतौर प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने प्रभावी भूमिका निभाई है। हाल ही में उपचुनाव में पृथ्वीपुर और जोबट में भाजपा की जीत से यह बात स्थापित हो गई है कि पार्टी वहां भी मजबूत हो रही है, जहां वह पहले कमजोर थी। यह रेखांकित करने वाली जीत है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा ही राजनीति के दो धु्रव हैं। पिछले करीब दो दशक से भाजपा सत्ता में है। अब हम नए लक्ष्य और योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। संकल्प यह है कि अगले दो दशक भी प्रदेश में भाजपा का ही शासन रहेगा।

शिवराज को मिला फ्री हैंड

प्रदेश के उपचुनावों में 3-1 की जीत के बाद आलाकमान ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को फ्री हैंड दे दिया है। अब शिवराज के नेतृत्व में सत्ता और संगठन मिशन 2023 की तैयारी में जुटेंगे। साथ ही प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद भी शुरू होगी। दरअसल, आलाकमान की मंशा है कि शिवराज अपनी सुविधा और राजनीतिक जरूरतों के हिसाब से जमावट करे। इसलिए आलाकमान ने उन्हें पूरी तरह फ्री हैंड कर दिया है। जिस तरह दूध का जला मट्ठा फूंक-फूंककर पीता है, उसी तर्ज पर 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों मात खाई भाजपा अभी से मिशन 2023 की तैयारी में जुट गई है। आलाकमान ने अबकी बार 200 के पार का लक्ष्य निर्धारित कर चुनावी रणनीति बनाने के लिए शिवराज सिंह चौहान को जिम्मेदारी सौंपी है। अब मुख्यमंत्री उसके हिसाब से जमावट करेंगे। मप्र में भले ही अभी विधानसभा चुनाव में 2 साल का समय बाकी हो, लेकिन भाजपा ने मिशन 2023 के लिए जमीनीं तैयारियां शुरू कर दी है। पार्टी का पूरा फोकस आदिवासी और ओबीसी वर्ग पर है। ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए सरकार और संगठन ने कानूनी मोर्चा संभाल लिया है, वहीं कई विभागों की भर्ती परीक्षाओं में 27 फीसदी आरक्षण लागू कर दिया है। वहीं अब पार्टी प्रदेश की 2 करोड़ आबादी को साधने में जुटी हुई है। राज्य में 43 समूहों वाली आदिवासी आबादी 230 में से 84 विधानसभा सीटों पर असर डालती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस समुदाय ने भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। पार्टी अब वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 41 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन बहुमत के आंकड़े 7 सीटे (116 में से 109) कम मिली थीं। जबकि कांग्रेस को 40 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन सीटें 114 मिली थीं और कांग्रेस ने बीएसपी के समर्थन से सरकार बना ली थी। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू कर ऐतिहासिक काम किया है। आदिवासी वोट बैंक को साधे रखने की रणनीति के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ अमित शाह की तारीफ की। शर्मा ने कहा- प्रधानमंत्री ने पूरे देश में जनजातीय दिवस मनाने का ऐलान कर इस वर्ग की वर्षों से की जा रही उपेक्षा को दूर किया। प्रदेश में गौरव दिवस की शुरूआत केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने की। जिनको आज सरदार पटेल की भूमिका में देखते हैं।

वीडी शर्मा ने कहा कि जब प्रदेश में कोरोना दस्तक दे रहा था, तब कांगेस की सरकार ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन जैसे ही भाजपा की सरकार बनी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरी ताकत से काम किया। उन्होंने संकट की घड़ी में 24 घंटे पलक पावड़े बिछाकर काम किया। 15 महीने की कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री कोई था, निर्णय कोई और लेता था। फिर जब भाजपा की सरकार बनी तो शिवराज सिंह चौहान पर प्रहार करने की कोशिश की गई। उपचुनाव चुनौतीपूर्ण थे। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने इमोशनली नहीं बल्कि राजनीतिक तौर पर सरकार को बचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने कठिन परिस्थितियों में चुनौती को स्वीकार किया और सरकार ने बहुमत साबित किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गुंडों को बढ़ावा दे रही है।

कांग्रेस के भ्रम को तोड़ा शिवराज ने

कोरोना के बाद पहली बार प्रत्यक्ष रूप से हुई भाजपा कार्यसमिति की बैठक में वीडी शर्मा ने कहा है कि मप्र के कार्यकर्ताओं ने देशभर में आइडियल कार्यकर्ता बनने का काम किया है। कोरोना में जब कांग्रेस और अन्य दलों के लोग घरों में बैठे थे तब हमारे मुख्यमंत्री और कार्यकर्ता फील्ड में डटे थे। कांग्रेस ने वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाने तक का काम किया। आदिवासी क्षेत्रों में कहते थे कि वैक्सीन लगवाओगे तो जाने क्या हो जाएगा लेकिन यही वैक्सीन आज लोगों की जीवन रक्षक बनकर सामने आई है। कोरोनाकाल में हर कार्यकर्ता ने काम किया है। मजदूरों की सेवा की, उनका ख्याल रखा गया था। ऐसे संकट के समय में भी हमारी सरकार ने 18 लाख लोगों को रोजगार देने का काम किया है। शर्मा ने कहा कि उपचुनाव में जीत हमारे कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है।

हर अभियान में आगे रहे कार्यकर्ता

शर्मा ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब ऑक्सीजन, रेमडेसिवर, डॉक्टर्स सहित अन्य चीजों की समस्याएं आ रही थीं, तब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देशभर में डॉक्टर्स और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की चेन खड़ी करने की बात कही। उनके आव्हान पर कदम बढ़ाते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं ने कीर्तिमान रच दिया और हर गांव में प्रशिक्षित स्वास्थ्य स्वयंसेवक तथा हर ब्लॉक में डॉक्टर्स की श्रृंखला तैयार कर दी। संकट के दौरान हर गरीब को पेट भर भोजन उपलब्ध कराने के लिए जब हमारे प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की, तो प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के साथ सहयोग करते हुए अन्न उत्सवों का आयोजन किया और एक दिन में 25 लाख लोगों को अन्न वितरण का रिकॉर्ड बना दिया। आपसी समन्वय के साथ किस तरह गरीब कल्याण और सेवा के काम किए जाते हैं, यह हमारी प्रदेश सरकार और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीखा जा सकता है।

शर्मा ने कहा कि हमारी केंद्र और राज्य सरकारें अंत्योदय के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही हैं। एक तरफ हमारी केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला जैसी योजनाओं से जीवन स्तर उठा रही हैं, तो दूसरी तरफ प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार लोगों की सोच बदल रही है। प्रदेश में हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही लाड़ली लक्ष्मी, बेटी बचाओ जैसी योजनाएं शुरू की थीं। आज प्रदेश में 35 लाख बेटियां लाडली लक्ष्मी बन गई हैं। जिन बेटियों को कभी अभिशाप समझा जाता था, वो अब वरदान बन गई है। प्रदेश में पहले जहां 1000 पुरुषों पर 912 महिलाएं होती थीं, वहीं अब 1000 पुरुषों पर 956 महिलाएं हैं। यह हमारी सरकारों की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है, जिसके लिए मैं प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का अभिनंदन करता हूं।

छलका विधायकों का दर्द

करीब 2 साल बाद मिंटो हाल में संपन्न हुई प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में जहां एक तरफ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ में कसीदे गढ़े, वहीं दूसरी तरफ विधायकों का एक बार फिर दर्द छलका। विधायकों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से कहा कि हमें अगली बार 200 पार का टारगेट दिया गया है, लेकिन मंत्री और अफसर हमारी सुनते नहीं हैं, तो हम कैसे काम करेंगे। सूत्र बताते हैं कि विधायकों के इस दर्द को राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव का भी समर्थन मिला।

गौरतलब है कि कार्यसमिति की बैठक से पहले दो दिनों तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा की गई। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश भाजपा के 127 विधायकों में से करीब 82 विधायकों ने संगठन के सामने मंत्रियों और अफसरों की अनदेखी की शिकायत की।  पार्टी सूत्रों के अनुसार वन-टू-वन चर्चा में ग्वालियर-चंबल, रीवा, नर्मदापुरम, इंदौर, जबलपुर, शहडोल के अधिकांश विधायकों ने कहा कि अफसर हमें बिलकुल भी तवज्जो नहीं देते हैं। जिलों में जहां कलेक्टर और एसपी हमें नजरअंदाज करते हैं, वहीं विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और अन्य अधिकारी सुनते तक नहीं हैं। ऐसे में काम करना मुश्किल हो रहा है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि कुछ मंत्रियों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनके विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य अधिकारी ही उनकी नहीं सुनते। कांग्रेस से आकर भाजपा में मंत्री बने एक नेता ने तो कहा कि वे जो भी प्रस्ताव विभाग के पास भेजते हैं उस पर अफसर काम ही नहीं करते। वे कहते हैं कि हमने तो इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी शिकायत की है। दो दिन की वन-टू-वन और कार्यसमिति के दौरान मिले फीडबैक के आधार पर राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव एक-दो दिन में रिपोर्ट तैयार करेंगे और उसे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेंगे। बताया जाता है कि दोनों नेता सरकार और संगठन दोनों के कार्य से नाखुश हैं। वे सरकार और संगठन की रिपोर्ट भी राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपेंगे।

'नकाराÓ मंत्री होंगे बाहर

उपचुनाव निपटने के साथ भाजपा विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारी में जुट गई है। सत्ता और संगठन के चुनावी मोड में आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक वीथिका में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि दिसंबर में मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। विस्तार को प्रदेश कार्यसमिति में हरी झंडी दिखाई जाएगी। भाजपा सूत्रों को कहना है कि परफॉर्मेंस के आधार पर 8 से 10 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। वहीं मंत्रियों का विभाग भी बदला जाएगा। भाजपा सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के मद्देनजर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करवाई है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश सरकार के करीब एक दर्जन से अधिक मंत्रियों की परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं पाई गई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में फेरबदल बड़े स्तर पर होगा और नकारा मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

प्रदेश में आम विधानसभा चुनाव होने में अभी भले ही दो साल का समय है, इसके बाद भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी से चुनावी मोड में आते दिखने लगे हैं। यही वजह है कि उनके इस मोड में बाधा बनने वाले मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी हो रही है। दरअसल सरकार नहीं चाहती है कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति वर्ष 2018 के चुनाव परिणामों की तरह रहे। इसके लिए सरकार अब अपना पूरा ध्यान विकास और जनकल्याणकारी कामों को जल्द से जल्द पूरा करने पर लगा रही है। इसके माध्यम से सरकार की मंशा उसके खिलाफ कोरोनाकाल में बनी एंटी इनकंबेंसी को दूर करना है। यही वजह है कि प्रदेश में भी राज्य सरकार केंद्र की तरह तमाम समीकरणों को साधने के लिए राज्य मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करने की तैयारी कर रही है। इस पुनर्गठन के पहले मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की गई है। जिसमें कई मंत्रियों की परफॉर्मेंस पुअर पाई गई है।

मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड बनने की खबर सामने आते ही प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक वीथिका में इन दिनों अजब सी हलचल मची हुई है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के मौजूदा 30 मंत्रियों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तैयार करवाई गई है। रिपोर्ट कार्ड तैयार होने की खबर मिलते ही उन मंत्रियों के होश उड़ गए हैं, जो अभी तक अपना टास्क पूरा करने में पिछड़े हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में करीब आधे से ज्यादा मंत्री ऐसे हैं, जो अपने विभागीय काम के मामले में फिसड्डी साबित हुए हैं। उनमें से करीब एक दर्जन से अधिक तो ऐसे हैं जिनकी स्थिति दयनीय है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री बारीकी से एक-एक पॉइंट पर नजर रखे हुए हैं। विभागीय समीक्षा के दौरान मंत्रियों के सामने उनका रिपोर्ट कार्ड रखा जाएगा। उसके बाद यह रिपोर्ट कार्ड पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजा जाएगा। आगे चलकर जब मंत्रिमंडल विस्तार होगा, तो इस रिपोर्ट कार्ड को आधार बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चौथी पारी में मुख्यमंत्री के सामने कैबिनेट विस्तार को लेकर नामों को लेकर उलझन जारी है। प्रदेश सरकार में फिलहाल मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट में कुल 31 सदस्य हैं। जबकि अधिकतम सदस्यों की संख्या 35 हो सकती है। फिलहाल कुल चार पद खाली हैं, जिसके लिए टकटकी लगाने वालों में शिवराज के पूर्व मंत्रियों के अलावा वरिष्ठ नेता भी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने परफॉर्मेंस के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार की योजना बनाई है। यानी जिन मंत्रियों की परफॉर्मेंस खराब होगी उनका मंत्रिमंडल से बाहर जाना तय है। इसके अलावा पार्टी नेताओं से भी मंत्रियों के कामकाज के बारे में फीडबैक लिया जा रहा है।

दरअसल कुछ मंत्री ऐसे हैं, जिनकी अब तक न तो विभाग पर ही पकड़ बन पाई और न ही उनके कामकाज से संगठन से लेकर कार्यकर्ता तक खुश है। माना जा रहा है कि इसके साथ ही कुछ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया जाएगा। इसके पहले इस बात का भी पता लगाया जाएगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मंत्री और प्रमुख सचिव में विवाद के कारण सरकार की नीतियों का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। इसी कारण मुख्यमंत्री के साथ संगठन स्तर पर भी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी।

 

कमिश्नर प्रणाली के जरिए पुलिस की नई शुरुआत

दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों की तरह जल्द ही भोपाल और इंदौर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हो जाने जा रही है। उप्र के चार शहरों लखनऊ, नोएडा, कानपुर और वाराणसी में भी इसके लागू होने के बाद से आ रही सफलता की सूचनाओं ने मप्र सरकार को उत्साहित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह इसकी प्रशंसा कर चुके हैं। यही कारण है कि मप्र सरकार ने बिना देर लगाए प्रदेश की राजधानी भोपाल एवं आर्थिक राजधानी के रूप में विख्यात इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का निश्चय कर लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत दिनों पूर्व इसकी औपचारिक घोषणा कर संदेश दिया कि कानून व्यवस्था के मुद्दे को उनकी सरकार प्राथमिकता से लेती रहेगी। उन्होंने कहा कि यद्यपि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर है। शांति और सद्भाव है लेकिन हाल के दिनों कुछ नए तरह के अपराध सामने आए हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। ऐसी चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने एवं जनता को बेहतर सेवा देने के लिए दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने जा रहे हैं। राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री की घोषणा का यह कहकर स्वागत किया कि इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार होगा और बिना विलंब के जनता की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। माना जा रहा है कि भोपाल एवं इंदौर में यदि पुलिस कमिश्नर प्रणाली सफल होती है तो ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों में भी इसे लागू करने पर विचार किया जा सकता है। यह एक तथ्य है कि राज्य के अन्य शहरों की तुलना में भोपाल एवं इंदौर का विकास तेजी के साथ हो रहा है। हर साल बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों एवं छोटे शहरों से लोग इन शहरों में आ रहे हैं।

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने मंत्रियों से लिया एक साल का हिसाब

मप्र में भाजपा अपने मंत्रियों पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है। खाद्य और आपूर्ति मंत्री बिसाहूलाल सिंह के विवादित बयान को लेकर मचे बवाल के बीच पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, लेकिन बिसाहूलाल सहित विजय शाह, मीना सिंह, रामकिशोर कांवरे और प्रेम सिंह ठाकुर बैठक में नहीं पहुंचे। इसको लेकर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से सवाल पूछा गया तो वे किनारा कर गए। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने शिवराज कैबिनेट के सभी मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा मौजूद रहे। इस दौरान मंत्रियों के परफॉर्मेंस के बारे में बात हुई। बैठक शुरू हुई तब 15 मंत्री ही मौजूद रहे। इसको लेकर संतोष ने नाराजगी भी व्यक्त की थी। लेकिन आधे घंटे बाद लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव, संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर व पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया पहुंचे थे। जबकि उद्योग मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव भाजपा कार्यालय पहुंचे, लेकिन बैठक में शामिल नहीं हुए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने मंत्रियों से कहा- कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों ना हो, संगठन के लिए एक आम कार्यकर्ता ही है। संगठन और सरकार के साथ बेहतर तालमेल के साथ काम करें। संतोष ने मंत्रियों से पूछा- संगठन से आप लोगों की क्या अपेक्षाएं हैं? इस पर कोई मंत्री खुलकर नहीं बोला, लेकिन संतोष ने साफ तौर पर कह दिया कि संगठन को मंत्रियों से जो अपेक्षाएं हैं, उन्हें हर हाल में एक साल में पूरा करना है। उन्होंने हर मंत्री से उनके विभाग की उपलब्धियों की जानकारी भी ली।

कलेक्टर-एसपी के काम पर निर्भर है जनता को सुशासन देना

प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टर-कमिश्नर, आईजी-पुलिस अधीक्षक कॉन्फ्रेंस में अफसरों से कहा कि मप्र में ऐसे सभी एनजीओ को चिन्हित करें, जिन्हें फॉरेन फंडिंग (विदेशों से मिलने वाली आर्थिक मदद) हो रही है। यह भी पता लगाएं कि इस फंड का कहां और क्या उपयोग हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैमनस्य फैलाने, समाज को तोड़ने का काम करने वाले और धर्मांतरण करने वाले एनजीओ के लिए मप्र में जगह नहीं है। उन्हें हम यहां रहने नहीं देंगे। समाज को तोड़ने में कई एनजीओ का भी हाथ है। ऐसे संगठनों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इनसे जुड़े लोगों की सूची बनाएं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कमिश्नर-कलेक्टर, आईजी-एसपी वीडियो कॉन्फे्रंसिंग ने अब सुशासन के लिए एक निश्चित व्यवस्था का स्वरूप धारण कर लिया है। यह सुशासन का प्रभावी माध्यम बनी है। कॉन्फ्रेंस का निश्चित एजेंडा है, उस पर बिंदुवार चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीजीपी कॉन्फ्रेंस में कई विषयों पर विचार-विमर्श किया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री के निर्देश भी प्राप्त हुए हैं। इन निर्देशों के संबंध में भी वीडियो कॉन्फ्रेंस में चर्चा की जाएगी। बैठक के दौरान बताया गया कि नक्सलियों ने कान्हा पार्क के आसपास नया ठिकाना बना लिया है। इंटेलीजेंस इनपुट के आधार पर बताया गया कि जनवरी 2021 में परसवाड़ा, दोरा और छरेगांव में नए दलम (नक्सली) के एक नए ग्रुप की मौजूदगी देखी जा रही है। इस तरह 30 नक्सलियों का नया ग्रुप कान्हा नेशनल पार्क के आसपास के इलाके में बनाया गया है।

15:25:50 फॉर्मूले पर सभी 150 आईपीएस पास

आम जनता के लिए भले ही प्रदेश की व्यवस्था में भ्रष्टाचार, अनाचार आदि समाहित हैं, लेकिन सरकार की नजर में उसके अधिकारी पाक साफ हैं। विगत दिनों मप्र कैडर के 150 से अधिक आईपीएस अफसरों के कामकाज का आंकलन करने वाली छानबीन समिति की बैठक में 15:25:50 फॉर्मूले से आईपीएस अधिकारियों का परीक्षण किया गया। मंत्रालयीन सूत्रों के अनुसार जिन अफसरों ने सर्विस के 15 साल पूरे कर लिए हैं, समिति उनका ट्रैक रिकॉर्ड चेक किया। इसके साथ ही जिन अफसरों ने 25 साल की सर्विस पूरी कर ली है और उनकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो गई है, इनका भी रिकॉर्ड चेक किया गया। उसके बाद निर्णय लिया गया कि प्रदेश में एक भी आईपीएस अधिकारी नकारा नहीं है। गौरतलब है कि आईपीएस अफसरों की जांच-पड़ताल के लिए केंद्र सरकार ने इसके लिए (15:25:50) फॉर्मूला लागू किया है। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छानबीन समिति बनाई गई है। समिति में डीजीपी विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव महिला बाल विकास अशोक शाह और छत्तीसगढ़ के डीजी प्रबंधन आरके विज सदस्य हैं। इन सदस्यों ने प्रदेश के 150 आईपीएस अधिकारियों का सर्विस रिकार्ड चेक किया। जिसमें पाया गया कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ गंभीर मामले नहीं हैं। अब यह समिति सिफारिश केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेजेगी।

- राजेंद्र आगाल

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