02-Jul-2020 12:00 AM
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रा जस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच मनमुटाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। ताजा मामला राज्यसभा चुनावों को लेकर विधायकों की हुई बाडेबंदी से जुड़ा है। सचिन ने बिना नाम लिए फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जिसने जो कहा और कहलवाया गया, सब निराधार साबित हुआ। उसका कोई औचित्य ही नहीं था।
सचिन की मानें तो राज्यसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और समर्थक विधायकों की बाडेबंदी का कोई औचित्य ही नहीं था। यह बात उनके दावे के अनुसार कांग्रेस के पक्ष में पड़े 100 फीसदी वोट के जरिए साबित हो गई। पायलट ने कहा कि उनका दावा सही साबित हुआ कि कांग्रेस पार्टी के विधायकों के 100 फीसदी वोट राज्यसभा प्रत्याशियों को मिलेंगे और वही हुआ। मुख्यमंत्री गहलोत के भाजपा पर कांग्रेस विधायकों की तोडफोड़ की साजिश रचने के आरोप पर सचिन पायलट ने कहा कि जिसने जो कहा और कहलवाया गया, वह सब निराधार ही साबित हुआ।
वैसे राज्यसभा चुनावों के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्तियों और प्रदेश संगठन में होने वाले बदलाव पर सबकी नजर है। ऐसे में 21 विधायकों से पार्टी को सरकार में लाने की अपनी कोशिशों को एक बार फिर से गिनाते हुए पायलट ने साफ कर दिया कि विपक्ष में रहते हुए घेराव और धरने करके व भूख हड़ताल के जरिए पार्टी को सरकार में लाने वाले कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान की रक्षा करना उनका पहला कर्तव्य है। ऐसे में चाहे नियुक्ति पार्टी के माध्यम से हो या सरकार में भागीदारी के माध्यम से, सम्मान उन्हें मिलेगा।
सचिन पायलट के तीखे तेवरों और आए दिन दिए जाने वाले बयानों से साफ है कि वे ना तो सरकार के कामकाज से ज्यादा खुश हैं और ही सरकार बनने के बाद सूबे में मिली भूमिका उन्हें अधिक रास आ रही है। शायद यही कारण है कि पार्टी के केंद्रीय नेताओं की तमाम कोशिशों के बाद भी राजस्थान कांग्रेस में बनी गुटबाजी भी मौके-बेमौके पर सामने आ ही जाती है। ऐसे में यही देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों के बाद कांग्रेस के इन नेताओं का रुख कैसा रहता है।
राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हैं। एक वर्ग उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को ही प्रदेश अध्यक्ष पद फिर से मिलने की अटकलें लगा रहा है। ऐसे में सचिन पायलट का इस मामले में बयान आया है। पायलट ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के सवाल पर कहा कि राजनीति में कब क्या हो जाए किसी को मालूम नहीं है। किसको क्या काम देना है यह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का नेतृत्व अच्छी तरह जानता है। किसका कहां उपयोग करना है, उसका उपयोग करते रहते हैं। चाहे संगठन का हो या सरकार में काम देना, इसका निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी लेती आई है और लेती रहेगी। उपमुख्यमंत्री पायलट ने कहा कि मुझे जो जिम्मेदारी दी है उसे पूरी निष्ठा से निभा रहा हूं। हमारे कार्यकर्ताओं की टीम ने 6 साल में जो काम किया, 21 विधायक थे उससे लेकर आज हम सरकार में बैठे हैं। ये उन्हीं कार्यकर्ताओं की मेहनत है। अब हम लोगों की उम्मीदों के मुताबिक शासन दें, जिसकी उम्मीद जनता हमसे करती है।
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रहे पॉवर गेम के बीच एक और उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कसरत तेज हो गई है। गहलोत खुद एक और उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। भाजपा में पहली बार सतीश पूनिया के रूप में जाट को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कांग्रेस में जाट समाज में दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के जाट नेताओं ने दिल्ली तक अपनी बात पहुंचाई है। गहलोत इसी का लाभ उठाते हुए राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और कृषि मंत्री लालचंद कटारिया में से किसी एक को उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। कटारिया मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे हैं। वहीं, चौधरी वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं। दोनों ही गहलोत के निकट माने जाते हैं। चौधरी और कटारिया ने पिछले दिनों दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर जाट समाज को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग रखी है। उधर, दूसरी तरफ गहलोत विरोधी खेमा पूरी तरह से आश्वस्त है कि सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दोनों पदों पर रहेंगे। एक और उपमुख्यमंत्री बनाकर एक तरफ जहां गहलोत पायलट को बैलेंस करना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ जाट समाज को खुश करने की भी रणनीति पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में जाट समाज भाजपा की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है, इसे रोकने के लिए उपमुख्यमंत्री बनाया जाना आवश्यक है। प्रदेश की राजनीति में जाट मतदाता हमेशा से ही निर्णायक भूमिका में रहे हैं। शेखावाटी के साथ ही जोधपुर और बीकानेर संभाग के चुनाव परिणाम काफी हद तक जाट मतदाताओं पर निर्भर करते हैं। भाजपा में जाट को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल के एनडीए में शामिल होने से कांग्रेस पर जाट नेता को सत्ता व संगठन में वजन देने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है
राजनीतिक नियुक्तियों और फेरबदल को लेकर उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा है कि सोनिया गांधी ने कॉर्डिनेशन कमेटी बनाई है, उस कॉर्डिनेशन कमेटी के माध्यम से तमाम नियुक्तियां भी होंगी। जिनको जो जिम्मेदारी देनी है, यह इस कमेटी का काम होगा। प्रदेश में जो राजनीतिक गतिविधियां हैं उसका पूरा संचालन करने के लिए, यह कमेटी बनाई गई है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे नियुक्तियां हों या फेरबदल या बदलाव करने की स्थिति हो सब निर्णय कॉर्डिनेशन कमेटी के जरिए ही लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक बुलाकर इन सब पर फैसला किया जाएगा। पायलट ने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने धरने दिए, प्रदर्शन किए, भूख हड़ताल की, लाठी खाई अर्थात् जिन लोगों ने रगड़ाई खाई है, उन लोगों के मान-सम्मान की रक्षा करना मेरा प्रथम कर्तव्य है। चाहे कुछ हो जाए उन लोगों की प्रतिष्ठा पर कभी आंच नहीं आने दूंगा। खून-पसीना बहाकर हम लोग इस पार्टी को सत्ता में लेकर आए हैं, उसका पूरा सम्मान होगा, चाहे नियुक्ति के माध्यम से हो या सरकार में भागीदारी के जरिए हो यह सुनिश्चत करना मेरा पहला दायित्व है।
- जयपुर से आर.के. बिन्नानी