01-Aug-2022 12:00 AM
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आईपीएस, डिप्टी रेंजर, फॉरेस्ट गार्ड, आरक्षक को कुचलकर मार देने और अनेक अधिकारियों को जान से मारने का प्रयास करने के बाद भी मप्र के ग्वालियर-मुरैना क्षेत्र में सरकार खनन माफिया के सामने नतमस्तक बनी हुई है। बात हो रही है ग्वालियर-मुरैना के बॉर्डर पर बसे रंचौली, पढ़ावली, गडाजर, मडराई, माटोली, पौर, बरईपुरा जैसे उन तमाम गांव की। इन्हें सफेद पत्थर के अवैध खनन के लिए पहचाना जाता है और कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए कुख्यात माना जाता है। स्थिति ये है कि आईपीएस नरेंद्र कुमार की हत्या के 10 साल बाद भी शासन-प्रशासन इस क्षेत्र में अवैध खनन व माफिया को रोकने में नाकाम साबित हुआ है।
माफिया के हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वो इन क्षेत्रों से रोजाना लगभग 20 लाख रुपए तक का अवैध सफेद पत्थर खदानों से निकालकर बेच रहे हैं। बिना लीज के दबंग और लीज वाले भी खनिज नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नियमानुसार 20 फीट से अधिक गहराई में खनन करने के लिए केंद्र से अनुमति लेनी होती है। मगर, इन क्षेत्रों में किसी ने ये अनुमति नहीं ली है और खनन पहाड़ को 110 फीट की गहराई तक काट दिया गया है। वन विभाग, मुरैना में एसडीओ पद पर पहुंची श्रद्धा पंढारे ने जैसे ही रेत व पत्थर माफिया पर सख्ती की तो उन पर 12 बार जानलेवा हमले हुए। तेवर सख्त रहे तो माफिया ने उनका ट्रांसफर करा दिया। 45 दिन में श्रद्धा ने रेत-पत्थर माफिया की बाइक, ट्रैक्टर-ट्रॉली से लेकर ट्रक तक जब्त किए।
यह बात हैरान करने वाली है कि 15 साल से चंबल नदी से रेत निकालने पर रोक है फिर भी नदी के घाटों पर दिन-रात अवैध खनन किया जा रहा है। रेत माफिया से अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण चंबल से हर माह 35 करोड़ रुपए से अधिक की रेत का अवैध कारोबार हो रहा है। मुरैना के ही करीब 14 हजार परिवार सीधे इस अवैध कारोबार से जुड़े हैं। इनके ऊपर राजनीतिक वरदहस्त है। नदी से निकली रेत पुलिस की हर जांच चौकी और बैरियर से पास होकर बाजार तक पहुंच रही है। ये रेत भानपुर, सरायछोला, देवरी चौकी के बाद आरटीओ बैरियर, सेल्स टैक्स बैरियर, कृषि उपज मंडी नाका और छौंदा टोल प्लाजा को लांघकर ग्वालियर तक आती है लेकिन कहीं भी इन वाहनों को पकड़ा नहीं जाता। जबकि बानमोर पर वन विभाग ने चौकी भी बना रखी है।
अवैध उत्खनन के लिए ग्वालियर चंबल संभाग पूरी तरह से बदनाम हो चुका है। अवैध उत्खनन करने वालों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि वह अपने धंधे में अड़ंगा लगाने वालों को मौत के घाट तक उतार देते हैं। इतना ही नहीं सफेद पत्थर और रेत के अवैध खनन के लिए बदनाम ग्वालियर-चंबल इलाका अब मौत की खदानों के नाम पर भी बदनाम होने लगा है, क्योंकि ग्वालियर जिले की 168 पत्थर खदानों में से 50 से अधिक बंद खदानें अब मौत के गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के दिनों के अलावा भी इन गड्ढों में पानी भर जाने के कारण यह हादसे का स्थान बन चुके हैं। शहर के आसपास इस तरह की कई खदानों के गड्ढे नजर आ रहे हैं। पानी से भरे इन गड्ढों में या तो लोग नहाने के दौरान अपनी जान गंवा देते हैं या फिर लोग इन में कूदकर आत्महत्या कर लेते हैं। महानगर के आसपास मौजूद 200 से 250 फीट तक गहरे इन गड्ढों में हर साल आठ से दस लोग अपनी जान गंवा देते है। ग्वालियर का जिला प्रशासन ये सब जानने के बाद भी अनजान बना हुआ है। जबकि मप्र की हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच का भी साफ आदेश है कि पत्थर की खदानें लोगों की जान ले रही है। इसलिए खनिज विभाग लीज की अनुमति के वक्त खनन कारोबारी से गड्ढों को भरने का बॉन्ड भरवाएं लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
वर्ष 2009 से अचानक बढ़ी माफिया की मनमानी को रोकने में खनिज विभाग की पॉलिसी भी अक्षम साबित हुई है। क्योंकि पॉलिसी के मुताबिक लीज के समय खनिज नियमों में साफ है कि जहां प्रशासन खदान की लीज देगा, उसके बाद, खनन कारोबारी पत्थर निकालने के बाद वहां उस लेवल तक भराव करेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ग्वालियर के शताब्दीपुरम, महु जमहार के साथ-साथ जिले के बिलौआ में काली गिट्टी की खदानें संचालित की जा रही हैं। वैसे राजनीतिक संरक्षण में चल रहे वैध-अवैध उत्खनन के लिए बीते चार सालों से बिलौआ क्षेत्र चारागाह बना हुआ है। इससे पहले शहर के आवासीय क्षेत्र से लगे शताब्दीपुरम से सटी पीर बाबा की पहाड़ी काली गिट्टी के लिए मशहूर थी।
10 साल से नहीं थम रहे माफिया के हमले
2009 बैच के आईपीएस नरेंद्र कुमार बानमौर में बतौर एसडीओपी पदस्थ थे। होली के दिन 8 मार्च 2012 को अवैध खनन कर पत्थर लेकर जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश के दौरान उन पर ट्रैक्टर पलट दिया जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस आरक्षक धर्मेंद्र चौहान को माफिया ने 2015 में कुचलकर मार डाला। 6 मार्च 2016 को रेत की गाड़ी का पीछा करते हुए फॉरेस्ट गार्ड नरेंद्र शर्मा की हत्या कर दी। 7 सितंबर 2018 को मुरैना बैरियर पर डिप्टी रेंजर सूबेदार सिंह कुशवाह की हत्या कर दी गई। पुरानी छावनी थाने के तत्कालीन प्रभारी सुधीर सिंह कुशवाह 4 फरवरी 2021 को हमले में बाल-बाल बचे। इलाके के सभी 7 गांव के लोग अवैध खनन में शामिल हैं। जैसे ही यहां कोई अजनबी वाहन दिखता है, उसकी मुखबिरी शुरू हो जाती है। एक पुलिसकर्मी के अनुसार, यही वजह है कि यहां माफिया मजबूत है और कार्रवाई भी नहीं हो पाती।
- बृजेश साहू