03-Apr-2020 12:00 AM
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कोरोना से बचाव के लिए लोग घरों में कैद हैं। राजधानी भोपाल सहित पूरा प्रदेश लॉकडाउन है। कुछेक लोग अब भी बाहर निकलने को परेशान हैं लेकिन पुलिस का ऐसा पहरा है कि कोई दूर-दूर तक नहीं भटक रहा। इसका असर यह हुआ कि लॉकडाउन में मप्र अपराध मुक्त हो गया है। सिर्फ अपराध पर ही रोक नहीं लगी बल्कि सड़क हादसे भी रुक गए हैं। स्थिति यह है कि अपराध के मामले में अव्वल रहने वाले इंदौर और भोपाल में 80 फीसदी अपराध कम हो गया है। इससे पुलिस को भी राहत मिली है।
गौरतलब है कि एनसीआरबी की जब भी रिपोर्ट आती थी, मप्र बलात्कार, हत्या और चोरी-डकैती में सबसे आगे रहता था। लेकिन 24 मार्च से लॉकडाउन होने के कारण अपराधों के ग्राफ में एकाएक कमी आ गई है। इसकी एक वजह यह है कि अपराधियों में भी कोरोना वायरस का भय समा गया है और दूसरी वजह यह है कि पुलिस 24 घंटे चौकन्नी है। पहले 24 घंटे अपराधों की पड़ताल और उन्हें सुलझाने में व्यस्त रहने वाली पुलिस अब कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान में जुटी हुई है।
केवल अपराधों में ही नहीं बल्कि सड़क हादसों में कमी आई है। जहां भोपाल और इंदौर में रोजाना दर्जनों सड़क हादसे होते थे वहीं अब कभी-कभार एकाध मामले ही आ पाते हैं। दरअसल, लॉकडाउन के बाद लोग घरों में हैं। इसका नतीजा यह है कि एक भी सड़क हादसे में किसी की मौत की सूचना नहीं है। शहर में वाहन चोरी की घटनाएं भी थम गई हैं। 24 मार्च से पहले शहर में बाइक चोरी करने वाले गैंग इस तरह सक्रिय थे कि रोजाना आधा दर्जन से अधिक बाइक चोरी करते थे। कोरोना के बाद सख्ती बढ़ी तो बाइक चोरी की घटनाएं भी कम हो गईं। पहले शहर में रोज किसी न किसी के साथ लूट, चोरी, मारपीट की एफआईआर दर्ज होती थी लेकिन अब अपराध की जगह पुलिस प्रीवेंटिव एक्ट की कार्रवाई कर रही है। पुराने शहर में पुलिस महामारी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई कर रही है।
सनसनीखेज घटनाओं से ज्यादा पुलिस आपसी विवाद सुलझाने में परेशान रहती थी। रोजाना 100 से ज्यादा मामले आपसी मारपीट, पड़ोसी से विवाद, पति-पत्नी में विवाद, शराब पीकर विवाद की सूचनाएं मिलती थीं। डायल 100 की पुलिस के अलावा थानों पर भी ऐसे मामलों की बहुतायत होती थी। लेकिन कोरोना के कारण यह सब थम गया है। दरअसल, हर तरफ कोरोना (कोविड-19) का खौफ है, इससे बचने के लिए हर कोई घरों में रहकर इससे मुक्ति पाना चाहता है। बावजूद कुछ लोग ऐसे हैं जो संकट और जान जोखिम के इस समय में लड़ाई-झगड़े, चोरी, छेड़छाड़ और अवैध शराब के परिवहन में लगे हैं। लॉकडाउन और कोरोना के डर से जिले में अपराधों में कमी तो आई है, किंतु कुछ बदमाश अब भी सड़क पर घूम रहे हैं। खासकर शराब तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं।
राजधानी सहित अन्य शहरों में पुलिस इस कदर सतर्क है कि हर आने-जाने वाले की जांच हो रही है। ऐसे में अपराधियों के मंसूबे परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पुलिस की सतर्कता को देखकर शहर के लोग भी उनका मनोबल बढ़ाने आगे आ रहे हैं। कई जगह तो लोग चौराहों पर तैनात पुलिस के जवानों को चाय-नाश्ता भी पहुंचा रहे हैं।
कोरोना की चुनौती से निपटने के लिए 14 अप्रैल तक लॉकडाउन का ऐलान हुआ तो अब इसका असर सामान्य जनजीवन पर नहीं बल्कि वनों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। कहीं भी पेड़ काटे जा रहे हैं। इमारती लकड़ी की तस्करी की आशंका बढ़ गई है। दरअसल वन विभाग में बीट गार्ड की संख्या पहले भी कम रही है। ऐसे में पेड़ों को कटने से बचाने के लिए सूचना तंत्र विकसित की गई थी। गांव से जंगल के रास्ते या आसपास आवागमन करने वाले ग्रामीणों से वन विभाग के बीटगार्ड का संपर्क होता था। जंगल में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां होने पर सूचना विभाग को पहुंच जाती थी और जंगल कटने से पहले से संदिग्धों को या तो भगा दिया जाता था या फिर अपराध करते ही पकड़ लिया जाता था। अब लॉकडाउन में ग्रामीणों का निकलना बंद हुआ तो विभाग को जानकारी मिलना बंद हो गई। नुकसान यह हुआ कि जंगल में पेड़ कटने लगे।
इनकी सेवा को सलाम
कोरोना वायरस से एक तरफ पूरी दुनिया डरी सहमी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस, प्रशासन, चिकित्सक, निकायों के अधिकारी-कर्मचारी, सफाई कर्मी बधाई के हकदार हैं क्योंकि इस विषम स्थिति में भी यह पूरी ईमानदारी के साथ अपना फर्ज अदा कर रहे हैं। खासकर पुलिस जिस तरह सुबह से लेकर रात-रातभर सड़क पर खड़े होकर लॉकडाउन का पालन करवा रही है इसके लिए उन्हें सलाम। इस समय कई शहरों का पारा 35 के पास पहुंच गया है। ऐसे में पुलिस के जवान सूनी सड़कों के चौराहों पर ड्यूटी दे रहे हैं। आलम यह है कि इनमें से अधिकांश ऐसे हैं जो अपने घर भी नहीं जा रहे हैं। राजधानी भोपाल के कई थानों का स्टाफ मुश्किल से 4 से 5 घंटे सो पा रहा है। कुछ थानों में तो स्टाफ ने रसोई बनानी शुरू कर दी है ताकि वे स्वयं के साथ ही जरूरतमंदों को भी खाना खिला सकें। पुलिस के अधिकारी और जवान जरूरतमंदों तक खाना पहुंचाने में भी जुटे हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं में लगे डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी अपना पूरा समय मरीजों की सेवा में बिता रहा है। इनकी सतर्कता और मेहनत का ही परिणाम है कि अन्य राज्यों की अपेक्षा मप्र में कोरोना वायरस से संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है।
- कुमार राजेन्द्र