03-Nov-2020 12:00 AM
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पहले हाथरस गैंगरेप और अब बलिया गोलीकांड, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लगातार अपनों की वजह से भी फजीहत हो रही है। वरना, गैरों में कहां दम नजर आ रहा था। राजनीतिक विरोधियों में फ्रंट पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा होती जरूर हैं, लेकिन उनसे बड़े राजनीतिक विरोधी अखिलेश यादव और मायावती की सक्रियता तो रस्मअदायगी भर सीमित देखी गई है। हाल फिलहाल तो यही हाल है। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में कानून व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ा चैलेंज बना हुआ है। एनकाउंटर और किसी अपराध के आरोपी को ले जा रही गाड़ियों के चलते-चलते पलट जाने या हादसे का शिकार होने को छोड़ दें तो उप्र में छोटे-छोटे मामले भी चुनौती बनते जा रहे हैं।
जैसे हाथरस के मामले में थाने के लेवल पर ही कानून के हिसाब से एक्शन हो जाता तो इतना तूल नहीं पकड़ता और पीड़ित पक्ष के लिए भी राहत की बात होती। ठीक वैसे ही बलिया गोलीकांड भी टाला जा सकता था। जहां मौके पर पहले से प्रशासनिक अधिकारी और सीनियर पुलिस अफसर फोर्स के साथ मौजूद हो, वहां एक शख्स ताबड़तोड़ फायरिंग भी करे और भाग भी जाए संभव नहीं लगता। कम से कम उप्र की जिस पुलिस की पीठ पर योगी आदित्यनाथ का मजबूत हाथ होने के बाद तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता, लेकिन ये सब हो रहा है और यही हकीकत है। मतलब, कहीं न कहीं लोचा है और ऐसे कई मामले हैं जिनमें राजनीतिक हस्तक्षेप महसूस किया गया है। हाथरस के मसले पर एक इंटरव्यू में हुए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कहते हैं, 'हाथरस के मामले में गलतफहमी थाना के स्तर पर थी, न कि सरकार के स्तर पर।Ó हाथरस गैंगरेप और बलिया गोलीकांड दोनों ही मामलों में अफसरों ने जो किया वो तो किया ही, बलिया के केस में भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने अपनी ही सरकार की किरकिरी करा डाली है। अगर सुरेंद्र सिंह ने थोड़ी बहुत बयानबाजी की होती तो भी चल जाता, क्योंकि ऐसा वो अक्सर करते रहते हैं। हत्या के मुख्य आरोपी के बचाव में तो भाजपा विधायक ने सारी हदें ही पार कर डाली हैं।
किसी भी राज्य में कानून व्यवस्था कैसे लागू हो सकती है जब सत्ताधारी दल का विधायक ही हत्या के आरोपी के पक्ष बयानबाजी कर रहा हो और उसके खिलाफ एक्शन न हो इसलिए सड़क पर उतरने की धमकी दे रहा हो! बलिया गोलीकांड पर सबसे पहले सुरेंद्र सिंह का बयान आया कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी। ऐसा बोलकर भाजपा विधायक ने शुरू में ही संकेत दे दिए थे कि कानून हाथ में लेने को लेकर उनका क्या नजरिया है। जब कोई जनप्रतिनिधि किसी एक पक्ष के बारे में ऐसी बात करे तो इलाके की जनता को इंसाफ की क्या उम्मीद करनी चाहिए। खासकर तब जब लोग विधायक के स्वजातीय न हों।
न्यूटन के नियम के जरिए हत्या को सही ठहराने के बाद सुरेंद्र सिंह की नई दलील आई- जिस पर हत्या का आरोप लगा है उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई है। वैसे भाजपा के बलिया जिलाध्यक्ष और योगी सरकार के एक मंत्री इस बात से इंकार करते रहे कि हत्या के आरोपी से भाजपा का कोई संबंध नहीं है, लेकिन सुरेंद्र सिंह ने डंके की चोट पर कहा कि धीरेंद्र प्रताप सिंह ने 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के आम चुनाव में भाजपा के लिए काम किया था। धीरेंद्र प्रताप सिंह के मौके से फरार हो जाने के बाद 17 अक्टूबर को भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह रेवती थाने पहुंचकर जिसकी हत्या हुई है उसके परिवार के लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे और सरेआम धमकी दी कि ऐसा न होने पर वो धरने पर बैठ जाएंगे।
भाजपा विधायक के बेटे विद्याभूषण सिंह ने भी सीधे-सीधे मुख्यमंत्री को चेतावनी दे डाली। विद्याभूषण ने फेसबुक पोस्ट में लिखा- 'योगी जी, अब बर्दाश्त के बाहर हो रहा है। आपकी शह पर प्रशासन अत्याचार का अंत कर रहा है। मजबूर होकर सड़क पर उतरेंगे। भाजपा विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह के परिवार से मिलने गए तो फूट-फूटकर रोए भी और उसका वीडियो भी वायरल हुआ है। किसी परिवार से किसी की भी सहानुभूति हो सकती है। ये आपसी रिश्ते का मामला है। धीरेंद्र प्रताप सिंह का भाजपा विधायक का करीबी होना भी कोई गलत बात नहीं है, वैसे भी वो कोई पेशेवर अपराधी नहीं है, लेकिन ये तो सच है कि उसके ऊपर हत्या जैसे संगीन जुर्म का आरोप है। आरोपी तो आरोपी होता है, चाहे वो किसी का कितना ही सगा क्यों न हो। वो कानून की नजर में एक आरोपी है और अदालत में उसे अपने बचाव का पूरा अधिकार भी है और मौका भी दिया जाता है, ये भारतीय न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी बात है। हाथरस और बलिया के अपराध की प्रकृति अलग-अलग जरूर है, लेकिन उस पर प्रशासन के एक्शन लेने का तौर तरीका एक जैसा ही है। हाथरस में भी जातीय तनाव पैदा हुआ। बाद में तो इसे बड़ी साजिश भी बताई गई। अभी बलिया के मामले में ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
नेताओं और अफसरों के संपर्क में था आरोपी
बलिया गोलीकांड में फरार मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह को लखनऊ में एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। धीरेंद्र सिंह की तलाश में पुलिस की 10 टीमें जगह-जगह दबिश डाल रही थीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ एनएसए और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। धीरेंद्र के दो भाइयों सहित कुछ लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। बताते हैं कि धीरेंद्र फरार होने के बाद से ही सरेंडर की कोशिश में था और इसके लिए कुछ करीबी नेताओं और उसने पुलिसवालों से संपर्क भी किया था। वकीलों के जरिए सरेंडर का पूरा प्लान भी तैयार था, लेकिन ऐन मौके पर एसटीएफ ने दबोच लिया। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया, धीरेंद्र सिंह और उसके साथियों को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। एक अज्ञात स्थान पर उनसे पूछताछ की जा रही है। धीरेंद्र सिंह के गुर्गों के कब्जे से हथियार बरामद किए गए हैं। घटना के वक्त किस हथियार का इस्तेमाल किया गया एसआईटी इसकी जानकारी जुटा रही है।
- लखनऊ से मधु आलोक निगम