16-Sep-2024 12:00 AM
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आप गड्ढों के शहर भोपाल में हैं...संभलिए
सोशल मीडिया पर भोपाल की सड़कों को लेकर तरह-तरह के मीम्स वायरल हो रहे हैं... इनमें से एक है...
पग-पग पर गड्ढ़े, गड्ढ़ों में भरा पानी
स्मार्ट सिटी भोपाल की यही कहानी...
उपरोक्त पंक्तियां देश के हृदय प्रदेश की बदहाल सड़क पर सटीक बैठ रही हैं। आलम यह है कि यहां की सड़क में गड्ढ़े नहीं हैं, बल्कि गड्ढ़ों में थोड़ी-थोड़ी सड़क नजर आ रही है। दरअसल, देश के सबसे खूबसूरत शहर भोपाल को हमारे माननीयों ने पेरिस बनाने का सपना दिखाकर विकास की आधी-अधूरी योजनाओं-परियोजनाओं का मकड़जाल इस कदर बुन डाला है कि अब शहर बूचड़खाने से भी बदतर नजर आने लगा है। अब तो लोग कहने लगे हैं कि जरा संभलकर चलिए जनाब, हर राह में सिर्फ गड्ढ़े ही गड्ढ़े नजर आ रहे हैं। हालांकि जिन क्षेत्रों में माननीय और अधिकारी रहते हैं यानी 4 इमली, 74 बंगला, लिंक रोड नं.-2, ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां की सड़कें चकाचक हैं, बाकी शहर की सड़कों का हाल बदहाल है। शहर की सड़कों का हाल कैसा है, इसको लेकर सोशल मीडिया पर इस तरह बयां किया जा रहा है... कहीं टूटी, कहीं फूटी, कहीं गड्ढ़े हैं दिखते, नागिन सी रोडों पर हैं हिचके बड़े मिलते... कौन कहता है हमसे, रहा भोपाल है पीछे, सड़के ऐसी बनाई हैं समुंद्र ऊपर सड़क नीचे... होंगी सड़कें तुम्हारी उड़न छू मतवाली, मगर यहां दौड़ती हैं दरियाओं में गाड़ी... कहीं पेंदा, कहीं गिट्टी, कहीं डामर को हैं भरते, भारी कर जेब अपनी, वादा चुनावी हैं करते। आलम यह है कि नगर निगम, पीडब्ल्यूडी लगातार दावे कर रहे हैं कि सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है, लेकिन स्थिति यह है कि एक-एक फीट गड्ढ़ों वाली सड़कों पर चलना तो दूर उन्हें देखकर ही डर लगता है। सड़कों पर चलने वाला हर व्यक्ति पीड़ित है। सड़कों पर गड्ढ़े नहीं, बल्कि गड्ढ़ों में सड़कें समां गई हैं। लोक निर्माण विभाग की बनाई गई शहर की प्रमुख सड़कों में से 70 फीसदी तो गारंटी पीरियड में ही खराब हो गई। यही हाल नगर निगम की सड़कों के हैं। भोपाल में नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की 2593 किमी से ज्यादा लंबी सड़कें हैं। 240 से ज्यादा सड़कें टूटी-फूटी हालत में हैं। कोई 10 प्रतिशत तो कोई 80 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त। 45 किमी सड़कें तो ऐसी हैं, जिनमें गड्ढ़े ही गड्ढ़े नजर आ रहे हैं। 35 किमी से ज्यादा लंबी एप्रोच रोड भी उखड़ चुकी है। नर्मदापुरम रोड पर रहने वाले 2.5 लाख से ज्यादा लोगों के लिए शहर की तरफ आने के लिए यह एकमात्र रोड है। इन लोगों के लिए ये गड्ढ़े रोज की मुसीबत हो गए हैं। मिसरोद से रानी कमलापति स्टेशन तक 5000 से ज्यादा गड्ढ़े हैं। इस सड़क की मरम्मत गर्मी में की गई थी। जिसमें गिट्टी की एक लेयर डाली गई। अफसरों व ठेकेदारों ने महज दो दिनों में काम निपटा दिया। अब सड़क पर बारीक गिट्टियां निकल गई हैं, जिसकी वजह से दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ है। निर्माण एजेंसियों के अफसरों और ठेकेदारों ने वल्लभ भवन के आसपास की सड़कों तक को नहीं छोड़ा। पीएफ कार्यालय चौराहे से वल्लभ भवन तक की मुख्य सड़क उखड़ गई। रॉयल मार्केट से मॉडल स्कूल की सड़क पर गड्ढ़े ही गड्ढ़े हैं। इसके अलावा मंदिर से होटल पैलेस मार्ग, भोपाल टॉकीज से रेलवे क्रॉसिंग मार्ग, अग्रसेन चौराहा से शाहजहांनाबाद मार्ग, स्टेट बैंक चौराहा से करबला, मनीषा मार्केट से हबीबगंज थाना सुभाष स्कूल, कलियासोत मुख्य नहर से आकृति ईको सिटी, जेके अस्पताल तिराहे से दानिश नगर चौराहा और आरआरएल से साकेत नगर तक सड़कों की हालत बदहाल है। यह हाल तब है जब हर साल करोड़ों रुपए राजधानी की सड़कों की मरम्मत पर खर्च किए जाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जिन सड़कों से शहर की बड़ी आबादी गुजरती है, उन पर न तो माननीय और न ही अधिकारी ध्यान देते हैं।
- राजेन्द्र आगाल