02-Jul-2020 12:00 AM
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अक्सर किसी अकेली लड़की या महिला को देखकर लोग उसके बारे में अलग-अलग धारणाएं व्यक्त करते हैं। जबकि एकांकी में रहने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से काफी मजबूत रहता है। इसलिए कभी भी ऐसी महिलाओं के प्रति गलत धारणा नहीं रखनी चाहिए। क्योंकि यह भी जीवन जीने की एक कला है।
समय बदल रहा है! बदल रहा है जीने का तरीका और सोच। इस बदलते समय और सोच ने कई लड़कियों को जीने का नया ढंग सिखाया है, नए पहलुओं से अवगत कराया है और नया लक्ष्य भी दिया है। यही वजह है कि लड़कियों ने इस बात को समझना शुरू कर दिया है कि जीवन का एकमात्र लक्ष्य सिर्फ शादी नहीं है बल्कि जीवन इससे कहीं ज्यादा है। अकेले रहने के अपने मजे हैं और लाभ भी। शादी से पहले अपने कैरियर पर ध्यान देना होता है, अपनी पहचान बनानी होती है, दोस्तों के साथ खूब सारी मस्ती करनी होती है, घूमना होता है और भी बहुत कुछ। अकेली लड़की के जीवन में कई मजे हैं, कई फायदे हैं, जिन्हें सिर्फ वही समझ सकती है जो अकेली हो।
अकेली लड़कियों की जिम्मेदारी सिर्फ अपने तक ही होती है। चाहे देर रात की पार्टी में जाना हो या फिर दफ्तर में देर तक रुककर काम करना हो, उन्हें इस बात की चिंता नहीं होती कि घर पर काम कैसे होगा, खाना कौन बनाएगा या फिर बच्चों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अकेले होने का एक फायदा यह भी है कि अगर आपको देर रात तक जागना है या फिर सुबह देर तक सोना है या फिर घर के काम को किनारे कर पूरा दिन आराम करना है तो ऐसे में किसी का डर नहीं होता कि कौन क्या कहेगा? हो सकता है कि अकेली लड़की को कभी-कभीर ऐसा लगता हो कि वह खाली समय में बोर हो रही है लेकिन वह समय भी तो अपना और अपने लिए ही होता है।
अकेली लड़कियां अपने पैसे को अपने ऊपर खर्च करने के अलावा किसी भी तरह और कहीं भी खर्च कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें न तो किसी को जवाब देना होता है, न ही पूछना। नृत्य सीखना हो या फिर खूब सारी खरीदारी करना हो या फिर पास या दूर के दोस्तों को महंगा या फिर सस्ता उपहार देना हो या फिर किसी जरूरतमंद की मदद ही क्यों न करना हो, जवाबदेही सिर्फ अपनी है। कहने का मतलब है कि पैसे आपके हैं इसलिए आप जो चाहे इन पैसों का कर सकती हो।
लड़कियों की खुद की पहचान कहां होती है! लड़कियों को उनके परिवार के जरिए ही जाना जाता है। जन्म से उनकी पहचान किसी की बेटी तो शादी के बाद पति की पहचान ही उसकी पहचान बन जाती है। कोई उन्हें फलां की बेटी तो कोई बहू, तो कोई बहन या पत्नी कहकर बुलाता है। लेकिन अकेली कामकाजी होने का फायदा यह है कि समाज उन्हें उनके नाम से ही जानता है। ऐसे में उन्हें खुद को नए सिरे से जानने का मौका मिलता है कि उनकी जिंदगी किस तरह चल रही है? उन्हें किस बात से खुशी मिलती है और किस बात से नहीं? उन्हें अपने लक्ष्य, सपने और जीवन के मुद्दों को समझने का मौका मिलता है। जीवन को सफलतापूर्वक जीने के लिए ये सारे बेहद जरूरी सवाल हैं, जिनका जवाब जानना भी बहुत आवश्यक है।
अकेले रहने के कारण वह खुद को बेहतर ढंग से समझ पाती है और इस बात को भी कि उसे किस तरह का जीवनसाथी चाहिए, चाहिए भी या नहीं। खुद पर भरोसा करने और असुरक्षा को दूर करने के लिए भी उनका अकेली रहना फायदेमंद है। जब आप अकेले रहते हैं तो खुद ही सारा काम करने का मौका मिलता है, चाहे कार की सर्विसिंग करानी हो या फिर घर की मरम्मत। कहने का मतलब यह है कि अपनी काबिलियत को अकेले रहने पर ही बेहतरी से समझा जा सकता है।
कई लड़कियां ऐसा कहती हैं कि सिंगल रहने के दौरान जो उनके दोस्त हैं, शादी के बाद भी वे गहरे दोस्त ही रहें। कारण कि अकेली लड़कियों से दोस्ती करना एक-दूसरे पर निर्भर रहने और मजबूत रिश्ते बनाने की कड़ी है। अमूमन देखा जाता है कि महिलाएं एक-दूसरे से प्रतियोगिता करती हैं लेकिन जब कोई लड़की या महिला अकेली रहती है तो दूसरी महिला से उसके रिश्ते बहन या जान से भी प्यारे दोस्त जैसे बन जाते हैं।
जल्दी शादी हो जाने का अर्थ है कि जीवन में नया परिवार ही प्राथमिकता में रहता है। इस तरह से आपको अपने माता-पिता, भाई-बहनों को सही तरह से समझने और उनकी मदद करने का मौका भी नहीं मिल पाता। लेकिन एक अकेली महिला के तौर पर आपको अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ समय बिताने का पूरा मौका मिलता है। उन्हें अपनी नजर से समझने का नजरिया भी मिलता है, जो बचपन में संभव नहीं था।
कैसी नौकरी करनी है, नौकरी एक बार बदलना है या फिर दस बार, उन्हें अपने कैरियर को लेकर हर तरह की आजादी मिली हुई होती है। अकेले होने पर अपने कैरियर का चुनाव अपनी मर्जी से किया जा सकता है, जो कि शादी के बाद कम ही संभव है। पढ़ाई के लिए दूसरे देश जाना हो या कैरियर के लिए, इसके लिए उन्हें किसी और के निर्णय की परवाह नहीं करनी होती है। नौकरी छोड़कर पढ़ाई करनी है या फिर घर से ही काम करना है, उन्हें इसमें किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।
घूमने की आजादी
अकेली लड़की जहां चाहे वहां घूमने जा सकती है। वीकेंड हो या वीकडेज, उनकी अपनी मर्जी चलती है, जहां मन हो वे वहां जाएं। घूमने जाने के लिए उन्हें किसी से पूछना नहीं केवल बताना होता है। यही वह समय है, जब नई जगहों पर घूमकर जिंदगी के नए अनुभव बनाए जाते हैं।
- ज्योत्सना अनूप यादव