अब यूथ पर फोकस
01-Aug-2022 12:00 AM 2959

 

प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर भाजपा और कांगे्रस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश के सबसे बड़े मतदाता वर्ग यानी युवाओं को साधने के लिए भाजपा मिशन मोड में आ गई है। भाजपा की देखादेखी कांग्रेस भी युवाओं को साधने में जुट गई है। अब देखना यह है कि युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पार्टियां कौन-कौन सा प्रहसन करती हैं। प्रदेश का युवा वर्ग जिस ओर झुकेगा, अगले चुनाव में उस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा।

मिशन-2023 के लिए लगभग सभी वर्गों को साधने के बाद भाजपा का फोकस अब यूथ पर है। इसलिए प्रदेश सरकार ने युवाओं को साधने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार की नीति के अनुसार मप्र में अब युवाओं के सुझाव लेकर सरकारी योजनाओं को संचालित किया जाएगा। वहीं चंद्रशेखर आजाद की 116 वीं जन्म जयंती पर युवा महापंचायत का आयोजन कर सरकार ने संकेत दे दिया कि उसका पूरा फोकस युवाओं पर है। पंचायत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं को साधने के लिए घोषणा की कि मप्र में राज्य युवा परिषद का गठन किया जाएगा। इसमें एनएसएस, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र, जन अभियान परिषद, स्काउट गाइड के युवाओं को जोड़ा जाएगा। आपके सुझाव और भागीदारी से मप्र की नई युवा नीति तैयार की जाएगी। उसकी टाइमलाइन भी मैं तय कर रहा हूं। 12 जनवरी को युवा दिवस स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। सभी सरकारी विभागों और सरकारी कॉलेजों में हम युवा सेल का भी गठन करेंगे। जो यूथ पॉलिसी के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे ये कहते हुए बड़ा दुख होता है कि आजादी में हमारे जिन वीर सपूतों ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उनके बजाय स्वतंत्रता के बाद हमें पढ़ाया गया कि आजादी केवल एक परिवार ने दिलाई। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई, भीमा नायक, टंट्या मामा जैसे वीर योद्धाओं के बारे में नहीं बताया गया। अब हमारी युवा पीढ़ी को आजादी के नायकों के जीवनगाथा से परिचित कराने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश का युवा पुरस्कार भी अलग-अलग क्षेत्रों में खेल के क्षेत्र में तो कई पुरस्कार हैं ही लेकिन विशिष्ट उपलब्धि के लिए प्रदेश में युवा पुरस्कार की स्थापना करेंगे, जो क्रिएटिव युवाओं को या संस्था को दिया जाएगा। उसका भी प्रारूप हम लोग तैयार करेंगे। यह युवा पंचायत अब हर साल में 2-3 दिन की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा- मैंने यह तय किया है कि भोपाल में एक उचित स्थान तय करके चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगाई जाएगी। पवित्र माटी को अभी हम शौर्य स्मारक में आजाद प्रेरणा स्थल पर स्थापित करेंगे, लेकिन जब प्रतिमा बनेगी तो उसका आधार बनाने इस माटी का उपयोग किया जाएगा। मप्र जहां था वहां से काफी आगे बढ़ा है लेकिन और आगे बढ़ना है। ये महापंचायत केवल कर्मकाण्ड नहीं है, मैं इसे एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहता हूं जिससे जुड़कर युवा मप्र के नवनिर्माण में सहयोग करें।

युवाओं को साधने के लिए सरकार विकास योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी फोकस कर रही है। मप्र में 17 साल के शासनकाल में विकास के कीर्तिमान स्थापित करने के बाद शिवराज सिंह चौहान की विकास की ललक कम नहीं हुई है। उनकी कोशिश है कि प्रदेश में राजधानी से लेकर दूर-दराज के गांवों तक एक समान विकास हो। इसलिए उन्होंने चौथी पारी में मुख्यमंत्री बनने के साथ ही अपना सबसे अधिक फोकस विकास कार्यों पर किया। इसी का परिणाम है कि कोरोना महामारी के संकट के बाद भी प्रदेश अर्थव्यवस्था की पटरी से नीचे नहीं उतरा। अब कोरोना का संक्रमण लगभग समाप्त हो गया है। ऐसे में शासन और प्रशासन के पास विकास के लिए पर्याप्त समय है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समाप्त होते ही पूरा फोकस विकास पर केंद्रित कर दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी चौथी पारी में सजग और सतर्क नजर आ रहे हैं। इसलिए उन्होंने मिशन 2023 को देखते हुए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्होंने अपने मंत्रियों को जनता की कसौटी पर कसने की तैयारी कर दी है। उन्होंने मंत्रियों से साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि अब बैठने से काम नहीं चलेगा। सरकार अब हर माह मंत्रियों के कार्यों का आंकलन करेगी। मुख्यमंत्री मप्र में सुशासन के सहारे 2023 का विधानसभा चुनाव जीतना चाहते हैं। इसके लिए प्रशासन के साथ ही शासन को भी चुस्त और दुरूस्त होना पड़ेगा। इसके लिए उन्होंने मंत्रियों को अधिक से अधिक समय जनता के बीच रहने और अपने विभागों के माध्यम से विकास कार्य कराने का निर्देश दिया है। मंत्री उनके निर्देश का पूरी तन्मयता से पालन करें इसके लिए उन्होंने रेटिंग प्रणाली की व्यवस्था की है।

कोरोना वायरस की महामारी के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह अडिग होकर फैसले लिए उसका असर यह हुआ है कि प्रदेश में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ है और मप्र की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। दरअसल, महामारी के बीच भी मुख्यमंत्री ने  उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जिस तरह का वातावरण उपलब्ध कराया है उससे हमें एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश में उद्योगों के लिए इज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ रहा है। कोरोना वायरस की घातक दो लहर के बावजूद प्रदेश के उद्योग जगत ने आत्मनिर्भर मप्र अभियान को बल दिया। रॉ मटेरियल की आसमान छूती कीमतें, वर्किंग कैपिटल की कमी, स्कील्ड मैन पॉवर का अभाव और मांग की कमी ने उद्योग जगत को जरूर कुछ परेशान किया, लेकिन क्लस्टर्स के बूस्टर डोज ने 2022 के लिए आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। शासकीय के साथ निजी औद्योगिक क्षेत्र की आधारशिला ने भी सुनहरे भविष्य की तरफ इशारा किया है। आजादी से अब तक मप्र ने बदहाल अर्थव्यवस्था से लेकर विकास की नई ऊंचाईयां तक देखी हैं। लंबे समय से प्रदेश का औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन कोरोनाकाल के पहले झटके ने इसे हिला दिया। बावजूद इसके शुरूआती तौर पर भले ही उद्योगों को लॉकडाउन के समय तगड़ा झटका लगा हो, लेकिन मप्र का उद्योग जगत इससे हारा नहीं। न थका और न रुका, बल्कि कोरोनाकाल के बीच भी मप्र में औद्योगिक विकास ने नई राह निकाल ली। बंपर निवेश हुआ, नौकरियां गईं, लेकिन नया रोजगार भी खूब बढ़ा। केवल कोरोनाकाल में ही 15 हजार लोगों को नया रोजगार मिला। उस पर अब 3 हजार उद्योग और खोले जाना है। यह भी रोजगार की नई राह रहेगी।

प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर फोकस किया जा रहा है। सरकार नए औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीन एनर्जी, आर्गेनिक खाद से लेकर लॉजिस्टिक इंडस्ट्री बनाने की तैयारी कर रही है। भोपाल-राजगढ़ में 250 करोड़ से ग्रीन एनर्जी पार्क बनना है। इसमें 15 टन प्रतिदिन क्षमता का बायोगैस प्लांट, ऑर्गेनिक खाद, 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का कार्बन-डाई-ऑक्साइड कैप्चर प्लांट और 10 मेगावाट क्षमता का केप्टिव सोलर पावर प्लांट बनेंगे। हाइड्रोजन व अमोनिया गैस भी बनेगी। भोपाल-इंदौर-जबलपुर-ग्वालियर-कटनी सहित 7 प्रमुख क्षेत्रों में एयरपोर्ट व सड़क कनेक्टिविटी वाले बड़े लॉजिस्टिक पार्क लाने की तैयारी की जा रही है। भोपाल-इंदौर कॉरिडोर में आष्टा के समीप बड़े क्षेत्र पर एआइ व आईटी हब के लिए प्लान है। 5 नए औद्योगिक क्षेत्रों को 714.56 करोड़ से बनना है। बैरसिया-भोपाल में 25.88 करोड़, आष्टा-सीहोर में 99.43 करोड़, धार में 79.43 करोड़, रतलाम में 462 करोड़ और नरसिंहपुर में 47.82 करोड़ की परियोजना है। इनमें 32 हजार करोड़ का निवेश संभावित है। 38 हजार रोजगार मिलेंगे। देवास में इंडस्ट्रियल एरिया बनेगा। यहां इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल पार्क, कमर्शियल, रेसीडेंशियल, लॉजिस्टिक इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट की प्लानिंग है। देवास, सोनकच्छ, आष्टा व सीहोर तक इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाने की योजना है। पुणे के पिनेकेल उद्योग समूह ने 2000 करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव दे रखे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर जाएंगे युवा

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने यह तय किया है जो बुजुर्ग हैं उनके लिए तो मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना है, वो तीर्थ करने जाएं। लेकिन जो नौजवान हैं उनमें देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए हमने तय किया है कि वो सीमा पर जाएंगे, ताकि उन्हें पता चल सके कि किन परिस्थितियों में रहकर हमारे जवान देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। लेह लद्दाख में -14 डिग्री तापमान में कैसे हमारे जवान खड़े रहकर भारत माता की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। इसलिए मां तुझे प्रणाम योजना को हमने शुरू किया है। यूथ पंचायत के माध्यम से जिला स्तर पर जो सभी विजेता हैं, उन विजेताओं को मां तुझे प्रणाम योजना के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मरने की नहीं देश के लिए कुछ करने की जरूरत है और हमारे प्रदेश के युवा कुछ भी कर गुजरने का जज्बा रखते हैं।

रोजगार पर फोकस

मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना भी शामिल है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण कमजोर पड़ते ही मुख्यमंत्री ने युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए प्रदेशभर में रोजगार मेलों का आयोजन शुरू करवा दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार देने में मप्र देशभर में अव्वल है। रोजगार यानी सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत युवाओं को टेक्निकल रूप से ट्रेंड किया और फिर उन्हें प्राइवेट सेक्टर में जॉब मिली। इसी तरह स्वरोजगार, यानी सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत लोन उपलब्ध कराया। प्रदेश में मेलों का आयोजन कर युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। प्रदेश में कई छोटी कंपनियां भी निवेश करने जा रही हैं। इनसे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा। इनमें रॉयल यूनिफोर्स 41 करोड़, जेके लाइफ केयर 24 करोड़, कुमार प्रिंटर्स 15 करोड़, मेकसन हेल्थ केयर 20 करोड़, राज रीसाइलिंग 18 करोड़, सिद्धायु लाइफ साइंसेस 28 करोड़, जिल ऑर्गेनिस 21 करोड़, एसटीआई फैब्रिक्राट 25 करोड़ का निवेश करने जा रही हैं। यह कंपनियां भी 12 से लेकर 200 लोगों तक को रोजगार मुहैया कराएंगी।

- सुनील सिंह

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