03-Mar-2020 12:00 AM
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मप्र सरकार ने आखिरकार लैंड पूलिंग एक्ट प्रदेश में लागू कर ही दिया। जिसमें नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) अधिनियम 2019 की लगभग 12 धाराओं में संशोधन किया है। इसमें धारा 2 से लेकर धारा 87 में किए गए संशोधन के चलते इंदौर विकास प्राधिकरण की 10 योजनाएं समाप्त हो गई हैं। इन योजनाओं में शामिल लगभग 5 हजार एकड़ निजी जमीनें भी मुक्त हो गईं, लेकिन एक्ट में प्राधिकरण को 6 माह का समय दिया गया है। इस एक्ट के चलते प्राधिकरण की योजना 134-ए, 134-बी, 165, 170, 171, 172, 174, 175, 176 और 177 समाप्त हो गई हैं। नए लैंड पूलिंग एक्ट में योजनाएं लाने पर 50 प्रतिशत जमीन किसानों या उनके मालिकों को लौटाना होगी और 20 प्रतिशत जमीन पर प्राधिकरण भूखंड विकसित कर बेचेगा।
नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद से प्राधिकरण इन तमाम योजनाओं में एक एकड़ भी जमीन हासिल नहीं कर पा रहा था। अलबत्ता कुछ योजनाओं में उसने जमीन मालिकों के साथ अनुबंध अवश्य किए, जिसमें नकद मुआवजे के बदले अधिकतम 33 प्रतिशत तक विकसित भूखंड दिए जाना हैं। पिछले दिनों कमलनाथ सरकार ने अहमदाबाद की तर्ज पर लैंड पूलिंग एक्ट घोषित करवाया, क्योंकि सालों तक जमीनें न तो प्राधिकरण-हाउसिंग बोर्ड जैसी संस्थाओं के काम आ रही थीं और न ही किसान या जमीन मालिक उनका कोई उपयोग कर पा रहे थे। हजारों एकड़ जमीनें इंदौर सहित प्रदेशभर में सालों से अनुपयोगी ही पड़ी हैं। प्राधिकरण के पास करोड़-अरबों रुपए की राशि भी नहीं है कि वह जमीन मालिकों को दो से चार गुना तक नए एक्ट के मुताबिक मुआवजा बांट सकें। वहीं अधिकांश जमीन मालिकों ने भी अनुबंध करने के बजाय प्राधिकरण से नकद मुआवजे की मांग शुरू कर दी।
लैंड पूलिंग के दायरे में आने वाली प्राधिकरण की 10 योजनाएं समाप्त हो गई हैं, पर 6 माह तक इनमें शामिल निजी जमीनों पर कोई अभिन्यास मंजूर नहीं होंगे। अगली बोर्ड बैठक में नोटिफिकेशन के आधार पर जिन योजनाओं में 10 प्रतिशत भी विकास कार्य नहीं हो पाए हैं, उन्हें लैंड पूलिंग एक्ट के तहत मुक्त किया जाएगा। प्राधिकरण इन योजनाओं को नए सिरे से भी घोषित करने पर विचार करेगा। इनमें कई योजनाएं शहरहित के लिए भी जरूरी हैं, क्योंकि मास्टर प्लान से लेकर मेजर सड़कों का निर्माण इनको अमल में लाने पर ही हो सकेगा। प्राधिकरण के मुताबिक लैंड पूलिंग एक्ट के कारण उसकी 10 योजनाएं समाप्त हो गई हैं, जिनमें योजना 134-ए, 134-बी, राऊ की योजना 165, 170 और बॉम्बे हॉस्पिटल के सामने ग्राम खजराना स्थित बहुचर्चित योजना 171, जिसमें एक दर्जन से ज्यादा गृह निर्माण संस्थाएं हैं, जिन पर भू-माफियाओं ने कब्जे जमा रखे हैं, उनके अलावा योजना 172, 174, 175, 176 व 177 प्रभावित हो रही हैं। ्र
प्राधिकरण रिकॉर्ड के मुताबिक इन 10 योजनाओं में निजी और सरकारी जमीनें शामिल हैं। सबसे ज्यादा निजी जमीनें बायपास की योजना 175 में शामिल हैं, जिसमें करीब 1200 एकड़ से ज्यादा निजी जमीनें हैं। इसके पश्चात योजना 177, जो कि भौंरासला और अन्य जमीनों पर घोषित की गई हैं, में एमआर-12 का निर्माण किया जाना है। इस योजना में 270 हेक्टेयर, यानी 800 एकड़ से ज्यादा जमीन शामिल हैं। इसी तरह योजना 176, जो सुपर कॉरिडोर पालाखेड़ी में मौजूद है, उसमें भी 500 एकड़ से ज्यादा निजी जमीनें शामिल हैं। ट्रांसपोर्ट हब की योजना 174, जो कि लसूडिय़ा मोरी व अन्य जमीनों पर घोषित की गई, उसमें 300 एकड़ से ज्यादा निजी जमीनें शामिल हैं। इसी तरह योजना 172 में लगभग 100 एकड़ तो अन्य योजनाओं में भी निजी जमीनें शामिल हैं। इन सभी 10 प्रभावित हो रही योजनाओं में लगभग 5 हजार एकड़ निजी जमीनें शामिल हैं, जो अब मुक्त हो गई हैं। इसके अलावा 400-500 एकड़ सरकारी जमीनें भी इन योजनाओं में शामिल हैं। एक्ट लागू होने के बाद 6 महीने तक निजी जमीन मालिक अभिन्यास मंजूर नहीं करा पाएंगे।
जादूगरों ने अटकाया था लैंड पूलिंग एक्ट
ंलैंड पूलिंग एक्ट का गजट नोटिफिकेशन इसलिए विलंब से जारी हुआ, क्योंकि कुछ इंदौरी जमीनी जादूगरों ने इसे भोपाल में विभागीय मंत्री के माध्यम से अटकवा दिया था। दरअसल ये जादूगर चाहते थे कि योजना 175 में अदालती आदेश के चलते उनकी जमीनें छूट जाएं, ताकि वे अभिन्यास मंजूर करवा सकें। अगर एक्ट लागू हो गया तो 6 माह तक अभिन्यास मंजूर हो सकेंगे और उसी बीच प्राधिकरण नए सिरे से योजना लागू कर देगा। कुछ जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर रखी हैं, जिसमें कोर्ट ने प्राधिकरण को दिशा-निर्देश भी दिए हैं और उस पर अमल न होने पर अवमानना याचिकाएं भी दायर कर रखी हैं। जल्द ही इन पर फैसला आने वाला है, लेकिन अब इन जादूगरों के मंसूबे पूरे नहीं हो सकेंगे।
योजना 171 की जमीनें सबसे बेशकीमती
लैंड पूलिंग एक्ट के दायरे में खजराना की चर्चित योजना 171 'जो कि पूर्व में 132 के नाम से मशहूर रहीÓ भी आ गई है। एक्ट लागू होने के चलते यह योजना भी छूट गई है, लेकिन प्राधिकरण का कहना है कि गृह निर्माण संस्थाओं की सभी जमीनों की जांच राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर करवाई जाएगी, ताकि यह पता लग सके कि यह जमीन किन-किनको बिकी है। वैसे भी 6 महीने तक तो अभिन्यास भी मंजूर नहीं होंगे। योजना 171 की जमीन अत्यंत बेशकीमती है और मौके पर अधिकांश जमीनें खाली भी पड़ी हैं। एक दर्जन से ज्यादा गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनें इस योजना में शामिल हैं।
- विशाल गर्ग