03-Feb-2015 05:03 AM
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कोयला घोटाले में मनमोहन सिंह से पूछताछ के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने विनिवेश की दिशा में आगे बढ़ते हुए कोल इंडिया की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी (स्ह्लड्डद्मद्ग) बेचने का फैसला किया है। इस बिक्री के द्वारा सरकार को लगभग 24 हजार करोड़ रुपए की आमदनी हो जाएगी। इसे स्टॉक एक्सचेंज में नीलामी के द्वारा बेचा जाएगा। जाहिर है बाजार ऊंचा चल रहा है इसलिए सरकार को दाम भी अच्छे मिलेंगे। इसमें से रिटेल निवेशकों के लिए 20 प्रतिशत शेयर रिजर्व रखे गए हैं और उन्हेें बिड प्राइज पर 5 प्रतिशत का डिस्काउंट भी दिया जा रहा है। इस तरह देखा जाए तो सरकार जिसके पास कोल इंडिया में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है, 38.58 करोड़ शेयर बेच रही है। सरकार की योजना है कि इस वित्तीय वर्ष से पहले वह शेयर बेचकर बाजार से 58 हजार 425 करोड़ रुपए जुटा ले, क्योंकि सरकार ने वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.1 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। जनवरी तक सरकार केवल 1700 करोड़ रुपए जुटा पाई थी, जो सेल के शेयर बेचकर जुटाए गए थे। कोल इंडिया, ओएनजीसी और सेल तीनों के शेयर बेचकर सरकार अपना लक्ष्य पूरा करना चाहती है। उधर तेल के दाम खाड़ी देशों में नीचे जाने से भी सरकार को लाभ होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर माहौल अच्छा चल रहा है। स्पेक्ट्रम के आक्शन के लिए भी सरकार ने 3 हजार 705 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्ट्ज कीमत तय की है, इससे 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी सरकार को नीलामी के माध्यम से होगी। यह अब तक की स्पेक्ट्रम की सबसे बड़ी नीलामी है। 2010 में जिस कीमत पर स्पेक्ट्रम बेचे गए थे, उसके मुकाबले यह 11 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार की आमदनी बढऩे के बाद अब यह अनुमान लगया जा रहा है कि विकास कार्यों को गति मिलेगी।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट की एक पैनल ने सुझाव दिया है कि कालेधन पर रोक लगाने के लिए घर में 15 लाख से अधिक की नगद राशि रखना प्रतिबंधित कर दिया जाए। स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने यह सुझाव दिया है कि सरकार को गुप्त तथा कालेधन का पता लगाने का प्रयास तेज करना चाहिए। इसके लिए नियमों में भी तब्दीली की जानी चाहिए, ताकि टैक्स न चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क की जा सके। एक सुझाव यह भी आया है कि विदेशों में गलत स्रोतों से पैसा जमा कराने वालों की उसी पैसे के बराबर कीमत वाली संपत्ति राजसात कर लेनी चाहिए। वर्ष 2009 से सुप्रीम कोर्ट विदेशों में जमा कालेधन का पता लगाने के सरकारी प्रयासों की मॉनिटरिंग कर रहा है, लेकिन सरकार को कोई खास सफलता नहीं मिली। गत वर्ष नवंबर माह में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया था कि 250 भारतीयों ने एचएसबीसी की जिनेवा स्थित शाखा में खाता होने की बात स्वीकारी थी। फ्रांस ने भी भारत को 600 भारतीयों की सूची सौंपी है, जिनका पैसा विदेशों में जमा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कहा है कि वह मार्च 2015 तक सभी खाताधारकों की जांच कर उनके धन का स्रोत पता लगाए और यदि किसी ने गलत तरीके से कालाधन जमा कर रखा है, तो उसे जांच के बाद दंडित किया जाए।
चुनाव के समय नरेंद्र मोदी ने जनता को कहा था कि कालाधन वापस लाने से हर भारतीय के अकाउंट में पैसा आ जाएगा। अब सरकार पर कालाधन धारकों का पर्दाफाश करने का दवाब है। उधर अन्ना हजारे ने भी चेतावनी दी है कि वे आंदोलन करेंगे। इस तरह देखा जाए तो आने वाला समय सरकार के लिए कठिनाई भरा हो सकता है।
मनमोहन सिंह से पूछताछ
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सीबीआई ने कोयला घोटाले में पूछताछ की है। यह पूछताछ वर्ष 2005 में शीर्ष उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटन के सिलसिले में की गई है। 10 वर्षों तक यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह के पास उस वक्त कोल मंत्रालय भी था। हालांकि मनमोहन सिंह के कार्यालय और सीबीआई ने ऐसी किसी पूछताछ का ब्योरा नहीं दिया है। लेकिन बताया गया है कि सीबीआई की एक टीम ने मनमोहन सिंह से उनके घर में पूछताछ की। ज्ञात रहे कि वर्ष 2005 में बिड़ला ने प्रधानमंत्री कार्यालय को 2 पत्र लिखे थे, जिसमें उड़ीसा स्थित एक कोयला खदान हिंडाल्को को आवंटित करने की याचना की गई थी। बाद में यह खदान हिंडाल्को को ही मिली, लेकिन इसमें कथित रूप से पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। सीबीआई की जांच जारी है। कोल आवंटन घोटाले का पता उस वक्त लगा था, जब कैग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने को हुए भारी नुकसान का ब्योरा दिया था।