lalfitashahi

ठंडा पड़ता हनी ट्रैप

पिछले दिनों नेताओं-अफसरों को हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेल कर करोड़ों वसूलने के मामले में पांच महिलाएं (श्वेता पति विजय जैन, श्वेता पति स्वप्निल जैन, बरखा सोनी, आरती दयाल, छात्रा मोनिका यादव) और एक ड्राइवर ओमप्रकाश को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस और एटीएस के मुताबिक, इन महिलाओं ने करीब 20 लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए और इन्हें वायरल करने की धमकी देकर उनसे करीब 15 करोड़ रुपए की वसूली की है। लेकिन इंदौर सिविल इंजीनियर हरभजन सिंह को छोड़कर किसी ने भी शिकायत दर्ज नहीं की है। इससे यह मामला ठंडा पड़ता जा रहा है।
गौरतलब है कि हनी ट्रैप मामले ने प्रदेश में तेजी से तूल पकड़ा था, लेकिन अब यह ठंडे बस्ते में जा चुका है। दरअसल, इस मामले में इंजीनियर हरभजन सिंह अकेले ऐसे पीडि़त हैं जिन्होंने धन-उगाही की शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद 5 महिलाओं समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि इन सभी ने मिलकर किसी से 50 लाख तो किसी से तीन करोड़ रुपए तक की वसूली की है। इनसे जब्त मोबाइल और 8 सिम की जांच में करीब 90 वीडियो भी मिले हैं। इनमें से 30 वीडियो आईएएस, आईपीएस अफसरों और नेताओं के हैं। सूत्रों ने बताया है कि स्पेशल डीजी राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच टीम ने कुछ ऐसे लोगों का पता लगाया है जो आरोपी महिलाओं के संपर्क में थे और उनकी जांच की जा रही है। ज्यादातर लोग व्यापारी हैं। सूत्रों के मुताबिक टीम ने इस गिरोह ने जिन लोगों ने पैसे वसूले थे उनके बयान दर्ज कराने के लिए समन भेजे गए हैं। हालांकि, ऐसे लोग जो सरकारी अधिकारी हैं या नेता, अभी वे इस घेरे से बाहर हैं।
हनी ट्रैप में फंसकर महिलाओं के हाथों ब्लैकमेल होने वाले नेताओं और अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी है। ज्यादातर अफसरों को छुट्टी के दिन चुपचाप आने को कहा गया है। महिलाओं द्वारा बनाए गए आपत्तिजनक वीडियो को सामने रखकर एसआईटी अफसरों से पूछेगी कि वीडियो में आप हैं या नहीं। अफसरों से महिलाओं के एनजीओ को दिए गए काम के दस्तावेज दिखाकर भी सवाल किए जाएंगे। इंदौर पुलिस ने नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी, आरती दयाल और मोनिका यादव को गिरफ्तार किया था। ब्लैकमेल करने की धमकी देकर आरती दयाल ने इंजीनियर से तीन करोड़ रुपए मांगे थे। उनके पास से कई पूर्व मंत्रियों, कुछ कारोबारियों और मध्यप्रदेश के एक दर्जन आईएएस अफसरों के ऑडियो-वीडियो मिले थे। अब एसआईटी जांच की रफ्तार तेज करने के मूड में है। सूत्रों के मुताबिक अफसरों को बुलाकर उनके सामने लैपटॉप में वीडियो खोले जाएंगे। उन्हें दिखाकर पूछा जाएगा कि आप हैं या नहीं। आप संबंधित महिलाओं को पहचानते हैं या नहीं। जिन-जिन एनजीओ को अफसरों ने काम दिए हैं उनके आदेश की कॉपी भी गिरफ्तार महिलाओं के लैपटॉप और मोबाइल में मिली हैं।
खबर है की हनी ट्रैप मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य वीडियो क्लिप्स का एसआईटी द्वारा प्रति परीक्षण (सवाल-जवाब) कराया जाएगा। इसके लिए वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों को उसे दिखाकर पुष्टि की जाएगी कि फिल्म में वे हैं या नहीं और जिसके साथ वे दिखाई दे रहे हैं, उसे वे पहचानते हैं या नहीं? एसआईटी मामले की तेजी से जांच कर रही है। एसआईटी प्रमुख व विशेष पुलिस महानिदेशक राजेंद्र कुमार बेहद गोपनीय तरीके से जांच कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी द्वारा हनी ट्रैप मामले में वीडियो क्लिप्स को जांच के लिए हैदराबाद सीएफएसएल भेजने की तैयारी की जा रही है। हार्डडिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन आदि डिजिटल सामग्री को एसआईटी प्रमुख राजेंद्र कुमार ने अपने कब्जे में रखी है। ऑफिस से बाहर जाते समय वे पूरी सामग्री अपने साथ लेकर चलते हैं। एसआईटी के दूसरे सदस्यों को विवेचना में जितनी जरूरत होती है, उतनी चीजें ही देते हैं। सूत्र बताते हैं कि सीएफएसएल से जांच होने के बाद एसआईटी प्रकरण से संबंधित लोगों के बयानों का सिलसिला शुरू करेगी। वीडियो क्लिप्स में जो लोग दिखाई दे रहे होंगे, उन्हें एसआईटी नोटिस देकर बुलाएगी। उनसे वीडियो से जुड़े सवाल को उनके सामने रखा जाएगा। अगले महीने तक यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है। एसआईटी द्वारा विवेचना से जुड़े तथ्यों को फिलहाल मीडिया से साझा करने से बचा जा रहा है।
बलि का बकरा बने हरभजन सिंह
मुख्यमंत्री को भेजे गए डोजियर में करीब 10 आईएएस ऑफिसरों के लिंक की बात बताई गई है। अभी यह रिपोर्ट देखने का अधिकार सिर्फ सीएम, डीजीपी और एसआईटी को मिला है। फिलहाल इस केस में कार्रवाई वहीं पर अटकी है जहां इंदौर पुलिस ने छोड़ी थी। हरभजन सिंह की पलसिया पुलिस स्टेशन में शिकायत पर 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, सिंह की शिकायत पर कई राजनीतिक और नौकरशाही गलियारों में कई तरह की बातें की जा रही हैं। कई सवाल हैं कि क्या वह पुलिस के पास अपनी मर्जी से गए या किसी और ने उनसे ऐसा करवाया। कई लोगों का मानना है कि सिंह को बलि का बकरा बनाया गया। इस केस में सबसे बड़ी चुनौती 4000 से भी ज्यादा वीडियो, सेक्स चैट और तस्वीरों को सेफ रखने की है जो राज्य के कई प्रभावशाली लोगों के हैं। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि गिरोह से इस तरह की सामग्री हासिल करना अपने आप में एक बड़ा काम है। एक अधिकारी ने बताया है, एक हार्डडिस्क दीवार के अंदर सील करके रखी गई थी। पता नहीं ऐसी और कितनी हैं।
– विकास दुबे