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नाराज क्यों महाराज?

विधानसभा चुनाव में अल्पमत होने के बाद भी कांग्रेस ने सरकार तो बना ली, लेकिन वह हमेशा अपनों के निशाने पर रही। सरकार पर सबसे अधिक निशाना ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साधा है। यही नहीं उन्होंने झाबुआ उपचुनाव में एक दिन भी प्रचार नहीं किया। आखिर क्या वजह है कि महाराज अपने ही राज से नाराज चल रहे हैं? मध्यप्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गरम है। पिछले कई दिनों से सिंधिया के अपनी ही पार्टी से नाराज होने की खबरें सामने आ रही हैं। झाबुआ विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरे और स्टार प्रचारक होने के बाद भी सिंधिया का चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचना सियासी गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि कांग्रेस झाबुआ में जीत गई है। लेकिन महाराज की नाराजगी चर्चा में है।
अपनी जिस गुटबाजी के चलते मध्य प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता से बाहर दिखाई दी वह इन दिनों खुलकर फिर सामने आ गई। पिछले कुछ महीने से सिंधिया जिस तरह अपनी ही सरकार पर आक्रामक हमले कर रहे हैं, उससे पार्टी की एकता पर सवाल उठ रहे हैं। झाबुआ उपचुनाव में प्रचार से दूर रहे सिंधिया इसी दौरान प्रदेश में खासे सक्रिय रहे। इतना ही नहीं सिंधिया विपक्ष से कही ज्यादा अपने ही सरकार पर हमलावर दिखाई दिए। भिंड में पिछले दिनों एक कार्यक्रम में सिंधिया ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए किसान कर्जमाफी पर सवाल उठा दिया था। इससे पहले बाढ़ और अतिवृष्टि से बर्बाद हुई किसानों की फसल के मुआवजे को भी लेकर सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को घेरा था। इसके साथ ही बात चाहे प्रदेश में हो रहे तबादलों की हो या ग्वालियर में मेट्रो चलाने की, सिंधिया इन दिनों अपनी ही सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए पत्र का सहारा ले रहे हैंं।
सिंधिया के झाबुआ उपचुनाव से दूरी पर बनाने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि इस समय कांग्रेस मां और बेटे के बीच बंट गई है और ‘कौनसी कांग्रेस में कौन हैÓ यह यक्ष प्रश्न है, फिलहाल बेटे की कांग्रेस में जो है वह प्रताडि़त हैं और वह नया आशियाना ढूंढ रहे हैं। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस आज हजार टुकड़ों में बंट गई है और इनमें से एक टुकड़ा लेकर सिंधिया घूम रहे हैं और उनको कोई नहीं पूछ रहा है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस कई टुकड़ों में बंट गई है।
वहीं जानकार सिंधिया के सवाल उठाने को उनकी राजनीति करने की शैली बताते है। वह कहते हैं कि सिंधिया हमेशा से ही अपने विचारों को ऐसे रखते आए और अपनी राजनीति के शुरुआती दिनों में दिग्विजय सरकार के समय भी वह किसानों के मुद्दे पर खुलकर बोलते थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनके नजरिए से सिंधिया न तो कांग्रेस पर आक्रामक हैं और न ही सरकार पर। वह सिंधिया के किसान कर्जमाफी पर सवाल उठाने और अन्य मुद्दों को बताते हुए कहते हैं कि राजनेता को अपनी जनता की आवाज उठाने के लिए क्षेत्र की समस्या को उठाना पड़ता है और सिंधिया भी यही कर रहे हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया जहां सरकार पर हमला बोल रहे हैं वहीं, लोगों को अब निजी खर्च पर तत्काल राहत भी दे रहे हैं। मिलावट के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब निगम के बंटवारे को लेकर कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है। अपने ग्वालियर दौरे के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया से जब पत्रकारों ने सवाल किया कि भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर में दो महापौर नियुक्त किए जाने की मांग हो रही है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- ग्वालियर को दो महापौर की जरूरत नहीं है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार पर हमला कर रहे हैं। सिंधिया के हमलों से सरकार भी असमजंस में पड़ जाती है। सिंधिया ने ग्वालियर में मिलावटखोरी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मंच से कहा कि मैं प्रदेश में कई कहानियां सुन रहा हूं। मिलावट को रोकने के लिए छापे पड़ रहे हैं। लेकिन छापे के बाद मिलावटखोरों को छोड़ दिया जाता है।
इन मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरा
कर्जमाफी- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कर्जमाफी को लेकर अपनी ही सरकार पर हमला बोला। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था- हमने 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन किसानों का 50 हजार रुपए तक का ही कर्ज माफ हुआ है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान के बाद सीएम कमलनाथ ने कहा था कि हमने पहले चरण में 50 हजार रुपए का कर्ज माफ किया है लेकिन अगले चरण में दो लाख तक का कर्ज माफ करेंगे।
अवैध रेत उत्खनन- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अवैध रेत उत्खनन को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला था। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था- ये दुर्भाग्य है कि हमारी सरकार में अवैध रेत खनन नहीं रुका है। जबकि हमने वादा किया था कि अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
सर्वे पर उठाए थे सवाल- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था, इस दौरान उन्होंने कहा था कि प्रदेश के अधिकारियों द्वारा किए गए सर्वे से मैं संतुष्ट नहीं हूं। भारी बारिश के कारण किसानों की 100 फीसदी फसलें खराब हो गई हैं फसलों का सर्वे करने की जरूरत नहीं है, सीधे मुआवजा दिया जाना चाहिए।
ट्रांसफर-पोस्टिंग पर भी सवाल- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश में ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर क्या हो रहा है यह सबको पता है।
मिलावटखोरी पर हमला- हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिलावट को लेकर मंत्री को फटकार लगाई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- मुझे कई कहानियां सुनने को मिली हैं। छापेमारी के बाद पकड़े गए लोगों को छोड़ दिया जाता है।
– अरविंद नारद