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हार पर बढ़ी रार

15 साल तक सत्ता में रही भाजपा की एकता देखने लायक थी। लेकिन सत्ता जाते ही पार्टी इस तरह विघटित हो गई है कि हर बात पर रार होने लगती है। झाबुआ उपचुनाव की हार के बाद पार्टी में एक बार फिर रार चरम पर है। मध्यप्रदेश में झाबुआ उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद अब संगठन में मतभेद उभरने लगे हैं। हार के लिए सीधी विधानसभा के विधायक केदारनाथ शुक्ला ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह को जिम्मेदार ठहराया है। यही नहीं उन्होंने राकेश सिंह से इस्तीफे की मांग कर डाली, जिसे लेकर संगठन ने विधायक को नोटिस थमा कर जवाब मांगा है। शुक्ला ने चुनाव परिणाम आने के बाद बयान दिया कि राकेश सिंह सही तरीके से प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं। वे प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहने के लायक नहीं हैं, उनके कारण ही मध्यप्रदेश में भाजपा चौपट हो रही है। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मांग करते हुए कहा कि राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया जाना चाहिए। मेरे पास बहुत सारे ऐसे कारण हैं जो राकेश सिंह को हटाने के लिए काफी है। उचित समय आने पर फोरम के सामने बात रखूंगा।
वहीं झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के बाद भाजपा में फिर बड़े नेताओं की मुखालफत होने लगी है। मुखर होकर संगठन की संवादहीनता और प्रचार में कमी की बात कही जा रही है। सीधी से भाजपा के वरिष्ठ विधायक केदारनाथ शुक्ला ने पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर आरोप लगाए। अब पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने शुक्ला का पक्ष लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान के साथ संगठन पर निशाना साधा है। केंद्रीय नेतृत्व ने इन बयानों को गंभीरता से लिया है।
वहीं पूर्व सांसद शर्मा ने शुक्ला का समर्थन करते हुए कहा कि कोई भी आवाज आती है तो समझना चाहिए कि एक हाथ की ताली की आवाज नहीं आती। दोनों हाथों की ताली की आवाज जरूर आती है। केदारनाथ शुक्ला जिम्मेदार विधायक हैं। उन्होंने ऐसा क्यों बोला या उन्हें बोलना पड़ा। इसकी वजह जानने की जरूरत है। दरअसल पार्टी में संवादहीनता की स्थिति बन गई है। इसीलिए ये बातें बाहर आ रही हैं। झाबुआ उपचुनाव में हार के कारणों की खोज करके बताना चाहिए। साथ ही इस हार के जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जिम्मेदार तो संगठन और नेतृत्व है। जिसे जिम्मेदारी दी जाती है वही जिम्मेदार होता है।
शर्मा ने यह भी कहा कि 27 हजार से अधिक वोटों की हार छोटी हार नहीं होती। यह चिंता का विषय है। संगठन को गढऩे में कई कार्यकर्ताओं ने जवानी खपाई है। ऐसी पराजय हो तो दुख होता है। संवादहीनता होती है तो कुछ लोग अनुशासन को तोड़कर बाहर निकलते हैं। मेरे जैसे अनेक लोग हैं, जो संवादहीनता की डलिया में पड़े हैं। कोई बात नहीं करना चाहता। प्रदेश नेतृत्व से आग्रह है वे संवादहीनता की स्थिति खत्म करें। शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को लेकर भी कहा कि वे मामा कहलाते हैं।
गौरतलब है कि भाजपा ने झाबुआ विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी के सभी बड़े दिग्गज नेता जीत का दावा कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर पार्टी अध्यक्ष राकेश सिंह भी झाबुआ में जीत का दावा कर रहे थे। यही नहीं नतीजों से पहले तक भाजपा नेताओं का दावा था कि झाबुआ उपचुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी, लेकिन अब नतीजे आने के बाद पार्टी नेता कमलनाथ सरकार पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते दिखाई दिए।
गौरतलब है कि भाजपा ने झाबुआ विधानसभा सीट से उप चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी के सभी बड़े दिग्गज नेता जीत का दावा कर रहे थे। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर पार्टी अध्यक्ष राकेश सिंह भी झाबुआ में जीत का दावा कर रहे थे। यही नहीं नतीजों से पहले तक भाजपा नेताओं का दावा था कि झाबुआ उपचुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी, लेकिन अब नतीजे आने के बाद पार्टी नेता कमलनाथ सरकार पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला ने अपने बयान को लेकर कहा कि उन्होंने जो बात कही है, वह सच है। उन्होंने जो भी कदम उठाया है, वह सोच-समझ कर ही उठाया है।
कांग्रेस नहीं भाजपा में चलती है अनुशासनहीनता
भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के द्वारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के ऊपर सवाल उठाए जाने पर मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश के एक पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने भी केदारनाथ शुक्ला के लिए कमेंट किया है, कि ये कांग्रेस नहीं है जहां अनुशासनहीनता चलेगी, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता नहीं चलती है। गौरतलब है कि शुक्ला के बयान आने के बाद उन पर की गई कार्रवाई को लेकर पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा था कि भाजपा में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यकर्ता को अनुशासन में रहना होगा। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में इस तरह की अनुशासनहीनता चलती है, भाजपा में नहीं। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि झाबुआ चुनाव परिणाम आते ही भाजपा में सिर फुटव्वल जारी है। उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय, विधायक केदार शुक्ला, रघुनंदन शर्मा और वरिष्ठ नेता मेहराज जैन ने संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
– राजेश बोरकर