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सवालों में घिरी सर्जरी

प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक वीथिका में हनी ट्रैप पर मचे बवाल के बीच सरकार ने प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अफसरों का तबादला कर मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है। जिस तरह 7 दिन के अंदर हनी ट्रैप की जांच के लिए गठित एसआईटी के दो प्रमुख बदले गए, उससे सरकार पर सवाल तो उठे ही, साथ ही साथ दो वरिष्ठ अधिकारियों की आपसी जंग के कारण पुलिस अफसरों को इधर से उधर करना भी सवालों के घेरे में है। हालांकि सरकार ने तबादलों की वजह एक स्थान पर तीन साल से पदस्थ होना बताया है। पुलिस महकमे में दो वरिष्ठ अधिकारियों की लड़ाई का खामियाजा कई पुलिस अधिकारियों को भुगतना पड़ रहा है। गौरतलब है कि एक तरफ प्रदेश में हनी ट्रैप का मामला उजागर होने के बाद कई रसूखदारों का काला अतीत सामने आया। वहीं दूसरी तरफ पुलिस महानिदेशक वीके सिंह और स्पेशल डीजी एसटीएफ और एटीएस के बीच लड़ाई शुरू हो गई। दोनों अफसरों के बीच छिड़ी जंग के बाद कमलनाथ सरकार ने बड़ा फेरबदल करते हुए उन अधिकारियों को हटा दिया है जो तीन साल से ज्यादा समय से अहम पदों पर जमे हुए थे। इसमे परिवहन आयुक्त डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव, एडीजी योजना पवन जैन और एडीजी एटीएस संजीव शमी को बदल दिया गया है। हालांकि शमी को बदलना पुरूषोत्तम शर्मा के विवाद से जोड़ा जा रहा है। पुरूषोत्तम शर्मा को स्पेशल डीजी एसटीएफ और एटीएस के पद से हटाकर संचालक लोक अभियोजन बनाया गया है।
सूत्र बताते हैं कि पुलिस महानिदेशक वीके सिंह सीधे-सादे व्यक्ति हैं। उन्हें छल कपट नहीं आता है। इस कारण विभाग के कई वरिष्ठ अफसर अपनी मनमानी पर उतर आते हैं। डीजीपी के सीधेपन के कारण कई ऐसे निर्णय कर दिए गए, जिसमें सरकार को विश्वास में नहीं लिया गया। ऐसा ही मामला है हनी ट्रैप मामले में एसआईटी का गठन। जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में एसआईटी का गठन नहीं होना चाहिए था।
वैसे पुलिस महकमे में तबादले की तैयारी कई महीने पहले से थी। तबादला सूची भी बना दी गई थी, लेकिन प्रदेश की राजनीति के चाणक्य और वर्तमान सरकार में तथाकथित तौर पर सरकार की बैकबोन बने एक माननीय ने अपने पास उसे दबाकर रखा था। दरअसल, वे अपने कुछ प्रिय अफसरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना चाह रहे थे। इसलिए उन्होंने सूची दबाकर रखी थी। लेकिन हनी ट्रैप मामले के खुलासे के बाद पुलिस अफसरों में हो रहे विवाद से जब मुख्यमंत्री कमलनाथ नाराज हुए तो अफसरों को बदलने की बात उठी। मौके का फायदा उठाते हुए माननीय ने सूची में फेरबदल कर उसे जारी करने को दे दिया।
जब तबादले की सूची जारी हुई तो उसमें हनी ट्रैप की जांच के लिए गठित एसआईटी के दूसरे प्रमुख यानि संजीव शमी को हटाना चर्चा का विषय बन गया। एसआईटी चीफ की कमान स्पेशल डीजी राजेंद्र कुमार को सौंपी गई। हालांकि संजीव शमी को एसआईटी से हटाए जाने की वजह बिना सरकार को जानकारी दिए पुलिस की कार्रवाई में दखल देना बताया जा रहा है। शमी पुलिस के बावजूद खुद ही एसआईटी के चीफ बन गए थे। हालांकि इस पूरे मामले में प्रदेश सरकार के गृहमंत्री बाला बच्चन ने इस सर्जरी को बेहद सामान्य बताते हुए कहा कि प्रकरण की गंभीरता देखते हुए मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी चीफ एक सीनियर ऑफिसर को बनाया गया है। बता दें कि कहा ये जा रहा है कि 1985 बैच के आईपीएस अफसर राजेंद्र कुमार को इसलिए नियुक्त किया गया, क्योंकि एसआईटी चीफ संजीव शमी 1993 बैच के आईपीएस अफसर थे इसलिए उन्हें एसआईटी से हटाया गया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि सरकार और पुलिस विभाग को एसआईटी गठन के एक सप्ताह बाद यह याद आया कि जूनियर ऑफिसर की जगह सीनियर ऑफिसर को जांच की कमान सौंपनी है।
सूत्र बताते हैं कि पहले तबादले की जो सूची बनी थी, उसमें एसडब्ल्यू नकवी और मधु बाबू का नाम नहीं था। लेकिन बाद में तैयार की गई सूची में सरकार के तथाकथित बैकबोन बने माननीय ने एसडब्ल्यू नकवी का नाम इंटेलीजेंस के प्रमुख के तौर पर जोड़ दिया। कमलनाथ सरकार के नौ माह के कार्यकाल में डॉ. एसडब्ल्यू नकवी तीसरे इंटलीजेंस प्रमुख हैं। प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद राजीव टंडन को हटाकर संजय राणा और फिर राणा को हटाकर कैलाश मकवाना को इंटलीजेंस चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नए आदेश में एडीजी प्रशासन डॉ. एसडब्ल्यू नकवी को इंटलीजेंस चीफ बनाया गया है। इसी तरह कुछ और तबादले विवादों में हैं। सवाल उठता है कि आखिर सरकार में ऐसे फैसले कौन कर रहा है?
केएन तिवारी को बदलना सवालों में
वरिष्ठ आईपीएस अफसरों के तबादलों में कई ऐसे तबादले हुए हैं जिस पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। उसमें से एक है केएन तिवारी का तबादला। सात माह पूर्व डीजी ईओडब्ल्यू बनाए गए केएन तिवारी को अचानक हटाना किसी को गले नहीं उतर रहा है। तिवारी की सेवानिवृत्ति के भी अब मात्र छह महीने बचे हैं। बताया जाता है कि कुछ लोगों ने तिवारी को बदनाम करने की नीयत से मुख्यमंत्री और सरकार के बैकबोन बने माननीय को भड़काकर यह तबादला करवाया है। सरकार उन्हें हटाना नहीं चाहती थी। उधर, मौके की नजाकत को देखते हुए सरकार के तथाकथित बैकबोन बने माननीय ने तिवारी की जगह नकवी को फिट कर दिया।
– कुमार राजेंद्र