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बंटवारे पर बवाल

भोपाल शहर को दो हिस्सों में बांटने का मामला विवादों में है। भाजपा सहित कई पार्टियां इसकी खिलाफत कर रही हैं। वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए भोपाल नगर निगम को दो हिस्सों में बांटा जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र का समुचित विकास हो पाएगा। राज्य सरकार ने भोपाल की जनसंख्या में हुई बढ़ोतरी और आमजन को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नगर निगम को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी कर ली है। इसके लिए नगरीय निकाय विभाग ने ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया है और लोगों से दावे व आपत्तियों के लिए भी कहा गया है। किसी भी तरह का दावा या आपत्ति 16 अक्टूबर तक दर्ज कराए जा सकेंगे। इसके बाद राज्य की राजधानी में कोलार और भोपाल दो नगर निगम हो जाएंगे। भोपाल को दो नगर निगम बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए संशोधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धाराओं से प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भोपाल नगर निगम की बाहरी सीमाओं में परिवर्तन किए बगैर, वर्तमान नगर निगम को दो अलग-अलग भागों में बांटने के लिए सूची भी जारी कर दी है।
अप्रत्यक्ष प्रणाली से मार्च-अप्रैल में होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले शहर को दो हिस्सों में बांटना भाजपा को भेदभावपूर्ण लग रहा है। भाजपा ने जल्दबाजी में लिए गए इस निर्णय को राजनीतिक ठहराया है। वहीं, इसके खिलाफ जनआंदोलन छेडऩे की चेतावनी दी है। कांग्रेस के कुछ नेता सरकार के इस निर्णय के खिलाफ नजर आ रहे हैं। कुछ एक्सपट्र्स का कहना है कि इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले सरकार को जनता की राय लेना चाहिए था।
भोपाल नगर निगम के लिए 85 वार्ड में से 54 वार्डों को रखा गया है। इसमें महात्मा गांधी वार्ड, एयरपोर्ट, भौंरी, हेमू कालानी वार्ड, साधु वासवानी वार्ड, महावीरिगिरी वार्ड, कोहेफिजा, रॉयल मार्केट, बाग मुंशी हुसैन खां, ईदगाह हिल्स, बाबू जग जीवन राम वार्ड, नारियल खेड़ा, गीताजंली वार्ड, शाहजहांनाबाद, जेपी नगर, मोतीलाल नेहरू वार्ड, इब्राहिमगंज, राम मंदिर वार्ड, लालबहादुर शास्त्री वार्ड, महावीर स्वामी वार्ड, जैन मंदिर वार्ड, मोती मजिस्द, इस्लामपुरा, रानी कमलापति वार्ड, स्वामी विवेकानंद वार्ड, डॉ. अंबेडकर वार्ड, गोस्वामी तुलसीदास वार्ड, रानी अवंतीबाई वार्ड, मौलाना अबुल कलाम आजाद वार्ड, कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड, छत्रपति शिवाजी वार्ड, जवाहरलाल नेहरू वार्ड, पंडित मदन मोहन मालवीय वार्ड, रवींद्र नाथ टैगोर वार्ड, जहांगीराबाद, चांदबड़, कपड़ा मिल, सेमरा, नवीन नगर, ऐशबाग, बाग फरहत अफजा, महारानी लक्ष्मी बाई वार्ड, महाराणा प्रताप वार्ड, सुभाष चंद्र बोस बोर्ड, इंदिरा गांधी वार्ड, पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड, डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड, अरेरा कॉलोनी, आशा निकेतन, गुलमोहर, शाहपुरा, गुरुनानक देव वार्ड, पंजाबी बाग, दशहरा मैदान अशोका गार्डन को शामिल किया जाएगा।
वहीं कोलार नगर निगम में नगर निगम के 85 में से 31 वार्डों को रखा गया है। इसमें मिसरोद, जाटखेड़ी, बरकतउल्लाह, बाग मुगालिया, बरखेड़ा पठानी, साकेत नगर, शक्ति नगर, कस्तूरबा, बरखेड़ा, बीएचईएल, गोविंदपुरा, खजूरीकलां, हथाई खेड़ा, गौतम बुद्घ वार्ड, सोनागिरी, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, नरेला संकरी, इंद्रपुरी, अयोध्या नगर, आरजीपीवी, भोपाल मेमोरियल अस्पताल, भानपुर, बड़वई, छोला, रूसल्ली, करोंद, नवीबाग, सर्वधर्म कोलार, कान्हाकुंज, दानिश कुंज, सनखेड़ी, रतनपुर सड़क, कटारा हिल्स को शामिल किया जाएगा।
राजधानी को दो हिस्सों में बांटने का विरोध भाजपा कर रही है। वहीं इस बंटवारे के खिलाफ आपत्तियां भी आने लगी हैं। बंटवारे के खिलाफ आपत्ति की मुख्य वजह यह है कि यदि नगर निगम भोपाल की वर्तमान सीमा का विभाजन किया गया तो नगर निगम के संसाधनों जैसे भवन, वाहन, अधिकारी, कर्मचारी, लायबिलिटीस, ऐसेट्स के विभाजन के लिए भी नीति निर्धारित करना आवश्यक होगा। नगर निगम भोपाल के खाते में वर्तमान में उपलब्ध राशि का भी बंटवारा किया जाएगा। फिलहाल नगर निगम घाटे में है। जानकारों का कहना है कि दो नगर निगम बनने से कई तरह के नुकसान होंगे। शहर में पानी सप्लाई नर्मदा, कोलार और बड़े तालाब से होती है। पानी का बंटवारा करने में सबसे बड़ी समस्या आएगी। वर्तमान में सड़कें अलग-अलग एजेंसियों के पास है, दो नगर निगम होने से सड़कों के मेंटेनेंस प्रभावित होंगे। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को लेकर भी समस्या होगी। नगर निगम में नए शहर से सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स आता है, जबकि पुराने शहर से संपत्तिकर और जल उपभोक्ता प्रभार कम आता है। ऐसे में पुराने शहर में आय की कमी से विकास कार्यों पर असर पड़ेगा। स्मार्ट सिटी के काम नगर निगम सीमा में किए जा रहे हैं। दो नगर निगम होने से स्मार्ट सिटी के पैन सिटी मॉडल के तहत काम कहां होंगे, यह तय नहीं है। इससे विवाद होंगे।
– अरविंद नारद