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रातापानी बनेगा टाइगर रिजर्व

भोपाल के नजदीक स्थित रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने का रास्ता साफ हो गया है। रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने के मामले में पांच सदस्यीय कमेटी ने जो रिपोर्ट वाइल्ड लाइफ मुख्यालय को सौंपी थी उसे शासन को भेज दिया गया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कोर और बफर एरिया को चिन्हित कर अपनी सहमति प्रदान कर दी है। अब सरकार को रातापानी टाइगर रिजर्व के लिए नोटिफिकेशन जारी करना है। इधर, भोपाल फॉरेस्ट सर्कल के अधिकारियों ने अब तक शासन द्वारा मांगी गई सभी जानकारी भेज दी है। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ निर्णय लेंगे कि रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाया जाए या नहीं। यदि रिजर्व बनाने का फैसला होता है, तो राज्य सरकार नोटिफिकेशन जारी कर केंद्र सरकार को सूचना भेज सकती है।
रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2007 से चल रहा है। राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सैद्धांतिक मंजूरी भी दे चुका है। भोपाल फॉरेस्ट सर्कल के चीफ कंजरवेटर रहे एसपी तिवारी ने बताया कि 24 सितंबर को रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट मे कोर एरिया और बफर एरिया को वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि कमेटी ने रातापानी सेंचुरी को टाइगर रिजर्व बनाने के संबंध में अपनी सहमति दे दी है। इसमें किसी भी तरह की कोई बाधा नहीं है।
गौरतलब है कि भोपाल फॉरेस्ट सर्कल के चीफ कंजरवेटर एसपी तिवारी की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित की गई थी। इसमें सदस्य सचिव औबेदुल्लागंज वन मंडल के डीएफओ अनिल कुमार सिंह थे। सदस्य के रूप में रायसेन के डीएफओ राजेश खरे, भोपाल वन मंडल के डीएफओ एच एस मिश्रा, सीहोर वन मंडल के डीएफओ एचएस मांझी ने 24 सितंबर को आयोजित बैठक में रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की सहमति प्रदान की। यह कमेटी 19 सितंबर को गठित की गई थी।
राजधानी के नजदीक स्थित रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव चौथी बार तैयार हुआ है। हालांकि रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने में अफसरों की रुचि भी नहीं है। यही कारण है कि विभागीय मंत्री उमंग सिंघार के लगातार कहने के बावजूद अफसर औबेदुल्लागंज को वाइल्ड डिवीजन बनाने का प्रस्ताव दे रहे हैं। दरअसल राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों की काले पत्थर की खदानें और ईंट-भट्टे संचालित होने की वजह से रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव 10 साल से अटका हुआ है। वनमंत्री उमंग सिंघार लगातार कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन वन अफसरों का सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
कमलनाथ सरकार में वन विभाग की जिम्मेदारी मिलते ही उमंग सिंघार ने रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की घोषणा करते हुए वन अफसरों से प्रस्ताव मांगा था। सूत्र बताते हैं कि अफसरों ने टाइगर रिजर्व का प्रस्ताव न देते हुए औबेदुल्लागंज को वाइल्ड लाइफ डिवीजन बनाने का प्रस्ताव रख दिया। इंटरनेशनल टाइगर-डे पर वनमंत्री सिंघार ने यही घोषणा दोबारा की और अफसरों से प्रस्ताव मांगा। फिर भी अफसरों ने वाइल्ड लाइफ डिवीजन का ही प्रस्ताव भेजा। इससे सिंघार नाराज हो गए और प्रस्ताव लौटाते हुए फिर से टाइगर रिजर्व का प्रस्ताव लाने को कहा, लेकिन तीसरी बार भी अफसरों ने वाइल्ड लाइफ डिवीजन का ही प्रस्ताव दिया। तब जाकर कमेटी गठित की गई और कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। दरअसल, रातापानी अभयारण्य में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इस अभयारण्य का टाइगर रिजर्व बनाने की कोशिश की जा रही है।
वन्य-प्राणी क्षेत्रों के संरक्षण और विकास के लिए बनेगी उप समिति
वन्य-प्राणी क्षेत्रों के संरक्षण तथा विकास आदि पर विचार करने के लिए सरकार ने एक उप समिति बनाने का निर्णय लिया है, जिसमें विषय-विशेषज्ञ शामिल होंगे। 11 अक्टूबर को राज्य वन्य-प्राणी बोर्ड की 18वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह फैसला किया। इस बैठक में सीएम ने कहा राष्ट्रीय उद्यानों के पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने पर विचार होना चाहिए। वन्य-प्राणी क्षेत्रों के आसपास के रहवासियों और पर्यटन के दृष्टिकोण से समन्वित नीति बनाने को कहा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को मिले टाइगर स्टेट के गौरव को पर्यटन के रूप में प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक रूप से प्रचारित करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा आज सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि हम वन्य-प्राणी क्षेत्रों के विकास और पर्यावण संरक्षण के लिए पूरी सजगता और सतर्कता से काम करें। अगर हमने इसकी अनदेखी की, तो हम आने वाले समय में अपनी इन प्राकृतिक संपदा को गंवा बैठेंगे। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय वन उद्यानों के आसपास के रहवासियों को सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि हमें इनके साथ तालमेल बनाकर काम करना चाहिए। इससे हम इन क्षेत्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकेंगे। सीएम ने लोगों में वन्य-जीवों के प्रति जागरुकता लाने को भी कहा।
– धर्मेन्द्र सिंह कथूरिया