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निवेश के साथ रोजगार!

प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में 18 अक्टूबर को होने जा रहा मैग्नीफिसेंट मप्र इंवेस्टर्स समिट प्रदेश की नहीं बल्कि देश के लिए औद्योगिक विकास का आईना बनने जा रहा है। इस समिट के माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक विकास का द्वार तो खुलेगा ही साथ ही देश के सामने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत होगा, जिससे निवेश के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित पूरी सरकार तैयारी में जुटी हुई है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य मध्यप्रदेश 308 हजार वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां औद्योगिक विकास अन्य कई राज्यों की अपेक्षा काफी पिछड़ा हुआ है। मप्र में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के शासनकाल में औद्योगिक विकास के नाम पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2007 से 2016 तक 12 इन्वेस्टर समिट कराए। इन सभी बारह इन्वेस्टर समिट में 6821 निवेश के प्रस्ताव आए।
इन प्रस्तावों के हिसाब से 17 लाख 49 हजार 739 करोड़ के निवेश का दावा किया गया, लेकिन हकीकत में 50 हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट ही प्रदेश की जमीन पर उतर पाया। इसका असर यह हुआ कि प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ती गई। लेकिन अब कमलनाथ सरकार पूर्ववर्ती सरकार में हुई गलतियों से सीख लेते हुए प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश का आयोजन करने जा रही है। इस आयोजन में देश-विदेश से करीब 900 उद्योगपति शामिल होंगे। इस आयोजन से सरकार को काफी उम्मीदें हैं।
सीधे प्रोजेक्ट पर बात
इंदौर के ब्रिलियट कन्वेंशन सेंटर में 18 अक्टूबर को होने वाले मैग्नीफिसेंट मप्र में इस बार निवेश प्रस्तावों पर एमओयू के बजाय सीधे प्रपोजल पर बात होगी। सरकार तीन माह में निवेश संवर्धन की कैबिनेट सब कमेटी में निवेशक को फायदा देने वाली स्कीम मंजूर करेगी। इसे तत्काल कैबिनेट में लाकर कंपनी से प्रोजेक्ट लगाने को कहेगी। मैग्नीफिसेंट मप्र के साथ सरकार ने करीब एक लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर काम तेज कर दिया है, ताकि समिट में होने वाले निवेश करारों के साथ ही इन प्रस्तावों को शीघ्र धरातल पर लाया जा सके। ये प्रस्ताव कृषि, उद्यानिकी, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास, उद्योग, चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हैं। इन प्रस्तावों से करीब 30 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश को भव्य और सफल बनाने के लिए शासन स्तर पर उद्योगों के लिए नई नीति और कई तरह के संशोधन किए जा रहे हैं। इसमें एक साथ लीज रेंट चुकाने पर छूट तो मिलेगी ही, वहीं पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्टों के लिए 90 साल की लीज पर जमीन भी देंगे। वहीं ब्रांड होटलों को सब्सिडी दी जाएगी। ऐसी होटल पर न्यूनतम 100 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। इंदौर एयरपोर्ट पर आने वाले उद्योगपतियों-निवेशकों के स्वागत के लिए एक लाउंज भी तैयार किया जा रहा है। वहीं आयोजन स्थल पर तीन दिन के लिए लगाई जा रही प्रदर्शनी में कम्पनियों के 60 स्टॉल रहेंगे और एक मध्यप्रदेश पैवेलियन भी बनेगा। पीथमपुर में स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क लगभग पूरा हो गया है। इसके साथ 300 करोड़ की वाटर स्कीम का शुभारंभ भी मुख्यमंत्री के हाथों करवाया जाएगा।
नीतियों में परिवर्तन
शासन आने वाले उद्योगपतियों-निवेशकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है और ताबड़तोड़ नीतियों में भी परिवर्तन किया जा रहा है। फार्मास्युटिकल्स, आईटी सेक्टर से लेकर अन्य क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं। 15 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट में कई नीतियों को मंजूरी दी जाएगी। इसमें लीज रेंट चुकाने पर 10 साल तक किराया जमा करने की छूट से लेकर अतिरिक्त एफएआर की अनुमति भी दी जा रही है। वहीं पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्टों के लिए 90 साल की लीज पर जमीन मिलेगी। वहीं ब्रांडेड होटल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। देश में पहली बार मध्यप्रदेश में 100 करोड़ या इससे अधिक कीमत की बड़ी लग्जरी होटलों के लिए सब्सिडी का प्रावधान किया जा रहा है, जिसमें होटल कमरों के किराए से प्राप्त टर्नओवर के मुताबिक 3 साल 20 से 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा 3 करोड़ रुपए होगी। होटल के साथ-साथ रिसोर्ट और हेरिटेज होटल को भी इसी तरह की सब्सिडी मिलेगी।
दिखावा नहीं
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अधिकारियों को साफ कर दिया है कि मैग्नीफिसेंट मप्र में किसी प्रकार का कोई दिखावा न किया जाए। निवेश को लेकर जो भी बात हो, वो ठोस और धरातल पर उतरने वाली होनी चाहिए। इसके मद्देनजर उद्योग सहित ऊर्जा, चिकित्सा शिक्षा, पर्यटन, उच्च शिक्षा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और उद्यानिकी विभाग विभिन्न प्रस्तावों पर अंतिम दौर की चर्चा कर रहे हैं। डाबर, सिप्ला, ल्यूपिन जैसी कंपनियां जमीन भी देख चुकी हैं। नार्वे सरकार की स्टेटक्राफ्ट आठ हजार करोड़ रुपए का निवेश स्टेट डाटा सेंटर के क्षेत्र में करने की इच्छुक है। इसके लिए आष्टा के पास जमीन भी दिखाई जा चुकी है। मैग्नीफिसेंट एमपी के दौरान मप्र सरकार उद्योगपतियों को बड़ी राहत देने जा रही है। प्रदेश की औद्योगिक नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब बंद पड़े प्रोजेक्ट, फैक्टरी की जमीन पर संबंधित भू-स्वामी को एक सामान्य शुल्क लेकर उसका वेयर हाउस के रूप में उपयोग करने की मंजूरी देगी। इससे मप्र को एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में बदला जा सकेगा। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने भी कहा था कि जीएसटी के बाद मप्र में देश का मुख्य लॉजिस्टिक हब बनने की संभावनाएं हैं। इस बदलाव से एमआईडीसी, जिला उद्योग केंद्र से ली गई जमीन पर अब किसी उद्योगपति का यदि प्रोजेक्ट सफल नहीं हुआ है तो वह इसे वेयर हाउस के रूप में तब्दील कर सकेगा।
मर्जर के लिए नहीं लगेगा नामांतरण शुल्क
एक अन्य बड़ा बदलाव कंपनियों के मर्जर और डिमर्जर को लेकर हो रहा है। अभी तक यदि किसी कंपनी को अन्य कंपनी अधिग्रहित करती थी तब नामांतरण शुल्क लगता था, जो कंपनियों को काफी भारी पड़ता था, लेकिन अब यह प्रावधान किया जा रहा है कि मात्र दस हजार रुपए के शुल्क पर यह मर्जर, डिमर्जर का काम किया जा सकेगा। इससे जो कंपनियां संकट में आने के चलते बंद होने की कगार पर आती हैं, उन्हें अन्य बड़ी कंपनियां आसानी से टेकओवर कर सकेंगी। इससे कंपनियों के बंद होने और रोजगार के छंटने का संकट कम होगा।
लॉजिस्टिक हब में निवेश पर फोकस
मैग्नीफिसेंट मप्र में सरकार का फोकस लॉजिस्टिक हब के क्षेत्र में निवेश लाने पर बना हुआ है। प्रदेश सरकार चुनिंदा जगहों पर ऐसे हब स्थापित करना चाहती है। यही वजह है कि राज्य सरकार लॉजिस्टिक हब एवं वेयर हाउसिंग के लिए अलग से नीति तक बना चुकी है। इसके अच्छे परिणाम आना दिखना शुरू हो गए हैं। इसकी शुरुआत रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा प्रदेश में ग्लोबल लॉजिस्टिक हब की स्थापना की तैयारी के रूप में कर दी गई है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, विभिन्न राज्यों से संपर्क और बंदरगाह तक पहुंच आदि, लॉजिस्टिक हब के लिए अनुकूल हैं। लॉजिस्टिक हब जहां स्थापित होता है, वहां की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में तो बढ़ोतरी होती ही है, साथ ही यह देश के समय आर्थिक विकास में भी मददगार साबित होता है। मप्र में एक अच्छे लॉजिस्टिक हब की सारी खूबियां और संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य सरकार प्रदेश को गुजरात और महाराष्ट्र के प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ रही है, जिससे यहां से माल परिवहन की गति तेज की जा सके।
मुख्यमंत्री कमलनाथ के इंदौर दौरे वैसे भी कम हुए हैं और इस बार मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश का मुख्य आयोजन भी एक दिन ही रखा गया है। 17 अक्टूबर को प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा और रात में होटल मेरिएट में डिनर का आयोजन भी किया गया है। लगभग डेढ़ दिन मुख्यमंत्री इंदौर में रहेंगे और 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री होटल मेरिएट में ही ठहरेंगे और मुख्य सचिव सहित अन्य आला अफसर भी इसी होटल में रुकेंगे। 18 के मुख्य आयोजन के बाद शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ डिनर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के गार्डन एरिया में आयोजित किया गया है। उसके बाद मुख्यमंत्री संभवत: रात को ही भोपाल रवाना हो जाएंगे।
पेश की जाएगी स्वास्थ्य निवेश नीति
मैग्नीफिसेंट मप्र में कमलनाथ सरकार ने प्रदेश में बंपर निवेश के लिए रेड कॉपरेट बिछा दिया है। इसी कड़ी में सरकार प्रदेश 18 अक्टूबर को स्वास्थ्य निवेश नीति भी पेश करेगी। जिसके तहत प्रदेश में निजी अस्पताल खोलने पर 50 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान होगा। दरअसल, प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के तमाम कोशिशों के बावजूद हालत सुधर नहीं रहे हैं। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग नई कोशिशों पर काम कर रहा है। प्रदेश में मरीजों को बेहतर इलाज दिलाने की खातिर स्वास्थ्य विभाग अब निजी अस्पतालों को बढ़ावा देने की तैयारी में है। विभाग ने स्वास्थ्य निवेश नीति तैयार की है और निजी अस्पताल खोलने के लिए निवेशक को 50 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाएगी। सेहत की दौड़ में पिछड़े मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की समस्या से निपटने की स्वास्थ्य विभाग ने एक और कवायद शुरू की है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने स्वास्थ्य निवेश नीति का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट हॉस्पिटल खोलने पर 50 फीसदी तक सरकारी फंड मिलेगा। ए कैटेगरी के जिलों में भोपाल, इंदौर जैसे विकसित जिलों को रखा गया है। यहां निजी अस्पताल खोलने पर विभाग द्वारा 30 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी, तो वहीं बी कैटेगरी जिलों के लिए सब्सिडी 40 फीसदी और कमजोर जिलों में 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी। सिर्फ अस्पताल ही नहीं, नई नीति के तहत स्पेशलाइज्ड यूनिट जैसे फिजियोथैरेपी यूनिट, डायलिसिस यूनिट या पैथोलॉजी लैब के लिए भी विभाग आर्थिक मदद करेगा। इसके अलावा विभाग इन उपक्रमों को जमीन के लिए भी सब्सिडी देने का खाका तैयार कर रहा है।
लैंड पूलिंग आसान
मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश से पहले राज्य सरकार ने ‘लैंड पूलिंग स्कीम 2019’ को मंजूरी दे दी है। अब उद्योग के लिए भूमि स्वामी से चर्चा करके व सहमति बनाकर जमीन ली जा सकेगी। बशर्ते भू-स्वामी को बाजार मूल्य से 20 फीसदी पैसा नकद देना होगा। जमीन मिलने के बाद उसे विकसित करके बाकी पैसे को आवासीय व व्यावसायिक प्लॉट की शक्ल में लौटाया जा सकेगा। लौटाए गए प्लॉट पर भूमि स्वामी का अधिकार होगा। इस स्कीम का पहला प्रयोग इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे नंबर 59 से सटी जमीनों पर होगा। इस जमीन को मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआईडीसी) विकसित करेगा। इस जगह जो प्लॉट काटे जाएंगे, उनका उपयोग उद्योग के साथ आवासीय, व्यावसायिक और आम जनता के लिए किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट की लागत 600 करोड़ रुपए प्रस्तावित है। राज्य सरकार का मानना है कि लैंड पूलिंग की नई स्कीम के कारण प्रति हेक्टेयर जमीन की कीमत 3 करोड़ 83 लाख रुपए से घटकर 2 करोड़ 54 लाख तक होने की संभावना है। साफ है कि शुरुआत में ही 34 फीसदी का फायदा हो जाएगा।
500 प्रस्ताव ही उतरे जमीन पर
मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश को लेकर मुख्यमंत्री खुद सतर्क हैं। इसकी एक वजह यह है कि अभी तक जो इन्वेस्टर समिट हुए हैं वे केवल कागजी साबित हुए हैं। इसलिए मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देश दिया है कि नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे प्रदेश में निवेश बढ़े। यही नहीं हाल ही में उद्योग विभाग ने पिछली सरकार में हुई इन्वेस्टर समिट की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेश के कितने दावे किए गए और असल में जमीन पर कितने उतरे। रिपोर्ट के मुताबिक 2007 से 2016 तक शिवराज सरकार ने 12 इन्वेस्टर समिट की। पहली इन्वेस्टर समिट 15-16 जनवरी 2007 में एनआरआई इन्वेस्टर मीट के नाम से खजुराहो में हुई। आखिरी मीट 22-23 अक्टूबर 2016 में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के नाम से इंदौर में हुई। इन सभी बारह इन्वेस्टर समिट में 6821 निवेश के प्रस्ताव आए। इन प्रस्तावों के हिसाब से 17 लाख 49 हजार 739 करोड़ के निवेश का दावा किया गया लेकिन हकीकत में 50 हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट ही प्रदेश की जमीन पर उतर पाया। सरकार का कहना है कि पिछली सरकार ने निवेश के नाम पर सिर्फ हवाई सपने ही प्रदेश की जनता को दिखाए। इस रिपोर्ट के जरिए सरकार प्रदेश की जनता को यही हकीकत दिखाना चाहती है। उद्योग विभाग मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास ही है, इस विभाग का अलग से कोई मंत्री नहीं बनाया गया। ये रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जारी की है।
कमलनाथ ने उद्योगपतियों में जगाया विश्वास
प्रदेश में भाजपा शासनकाल के दौरान जो 12 इन्वेस्टर्स समिट हुए हैं वे केवल दिखावा साबित हुए हैं। इन समिट में निवेश की घोषणा के बाद भी उद्योगपति उद्योग लगाने में असफल रहे। इसकी प्रमुख वजह रही उद्योगपतियों को सरकार वादे के मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सकी। इसका असर यह हुआ कि उद्योगपति मप्र से मुंह मोडऩेे लगे। लेकिन अब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उद्योगपतियों को सुविधाएं मुहैया कराने का विश्वास दिलाया है। उन्होंने देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों से मुलाकात कर उन्हें विश्वास दिलाया है कि प्रदेश सरकार उनकी हर संभव सहायता करेगी। मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश से पहले ही उद्योगपतियों ने मप्र में निवेश की दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। बीहड़ों की वजह से पहचाने जाने वाले ग्वालियर-चंबल अंचल में अब जल्द ही देश के दो जाने-माने उद्योग घराने सैकड़ों करोड़ की राशि निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं। इन दोनों ही निवेशकों में पारले एग्रो व अडानी ग्रुप शामिल हैं। पारले गु्रप बानमौर के सीतापुर में और अडानी ग्रुप मालनपुर में निवेश करने जा रहे हैं। पारले एग्रो 327 करोड़ का नया प्लांट सीतापुर में स्थापित करने जा रहा है तो वहीं, अडानी ग्रुप मालनपुर में गैस स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।
निवेश करने वाले को आमंत्रण
मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने, वर्तमान इकाइयों का विस्तार करने पर चर्चा होगी। मैग्नीफिसेंट एमपी में देश-विदेश के उन चुनिंदा औद्योगिक घरानों को आमंत्रित किया गया है जो 500 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश करने के इच्छुक हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री कमलनाथ उद्योगपतियों से सीधा संवाद कर चुके हैं। आदित्य बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला, गोदरेज ग्रुप के अध्यक्ष आदि गोदरेज, रेल इंडिया लिमिटेड के सीईओ असित कुमार जाना, गुजरात अंबुजा सीमेंट के सीएमडी मनीष गुप्ता, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के सीएमडी एमके सुराना, हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड के कॉर्पोरेट अफेयर्स हेड गनेश कृष्णमूर्ति, टाटा स्टील के सीईओ, मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेन्द्रन, अजंता फार्मा के एमडी योगेश अग्रवाल, बजाज फिनसर्व लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव बजाज, बसंल एक्सट्रेशन एक्सपोर्ट के एमडी सुनील बंसल, सीईओ अनिल बंसल, भारत ओमान रिफायनरी बीना के एमडी एमबी पिंपले, ब्लू स्टार लिमिटेड के वाइस चेयरमैन वीर एस अड़वानी, एमडी एमबी बी त्यागराज, काउंसिल आफ लेदर एक्सपोर्ट के चेयरमैन पीआर अकील अहमद, दावत फूड के सीएमडी अश्विनी अरोरा, डालमिया भारत गु्रप के एमडी पुनीत डालमिया दीपक फास्टेनर्स के एमडी संजीव कालरा, दिलीप बिल्डकान के सीएमडी दिलीप सूर्यवंशी, आयशर मोटर्स के चेयरमैन एस शांडिल्य, फीडबैक इंफ्रा के चेयरमैन विनायक चटर्जी आदि शामिल हैं।
स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में होंगी 60 से ज्यादा इंडस्ट्री
पीथमपुर में स्थापित स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का औपचारिक उद्घाटन 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कमलनाथ करने जा रहे हैं। यह प्रदेश का इकलौता पार्क है, जहां एक ही परिसर में उद्योगों के लिए 262 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसमें से 80 फीसदी से ज्यादा जमीन आवंटित भी हो चुकी है। अभी तक एमपीआईडीसी द्वारा यहां पर 25 उद्योगों को जमीन आवंटित हो चुकी है, जिसमें से चार ने प्लांट का काम भी शुरू कर दिया है। 11 अन्य को जमीन आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। पार्क में अन्य जमीन आवंटित होने पर 10 हजार करोड़ की लागत से करीब 60 इंडस्ट्री यहां पर एक साथ काम करेंगी, जिससे 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। यह इस मायने में भी प्रदेश का इकलौता पार्क है, जहां पर आवासीय, व्यावसायिक जमीन के साथ ही स्कूल, कॉलेज, अस्पताल व पार्किंग, फूड जोन आदि के लिए भी अलग से जमीन आरक्षित की हुई है। तीन साल पहले प्रदेश सरकार ने नेशनल ऑटो टेस्टिंग से 478 हेक्टेयर जमीन वापस लेकर इस पार्क की शुरुआत की थी। एकेवीएन के एमडी कुमार पुरुषोत्तम को इसका जिम्मा सौंपा गया। यह जगह चारों ओर से पहाडिय़ों से घिरी है। बीच में बड़ा पोखर है। ऐसे में तय किया गया कि पार्क में नहरें बनाकर पानी को संरक्षित रखा जाएगा और इस बड़े पोखर को तालाब का रूप दिया गया। यहां पर 30 से 45 मीटर तक चौड़ी सड़कें बनाई हैं। 24 घंटे नर्मदा का पानी है। सीवरेज लाइन है। एसटीपी है और सारी केबल अंडरग्राउंड हैं। औद्योगिक परिक्षेत्र में एक लाख से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। संपूर्ण औद्योगिक परिक्षेत्र बाउंड्रीवॉल से सुरक्षित है। महिलाओं के लिए भी होस्टल की व्यवस्था है। मैग्नीफिसेंट एमपी में आ रहे निवेशकों के सामनेे देश के सबसे स्वच्छ शहर की ब्रांडिंग की जाएगी। एयरपोर्ट से आयोजन स्थल ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर तक इसके पोस्टर, बैनर लगाए जाएंगे, साथ ही स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट को भी पेश किया जाएगा। इससे निवेशकों को बताया जाएगा कि वह ऐसे शहर में आए हैं, जहां पर स्वच्छता, विकास कामों पर काफी जोर दिया जाता है।
8 सत्र को संबोधित करेंगे 17 वक्ता
समिट को 8 सत्रों में बांटा गया है। हर सत्र में प्रदेश और देश के परिदृश्य में विकास, निवेश और संभावनाओं पर बात होगी। अलग-अलग विषयों में बंटे इन सत्रों में वक्ता के रूप में देश के शीर्ष उद्योगपति मौजूद रहेंगे। 17 वक्ताओं में कुमार मंगलम बिरला से लेकर रसना के पीरुज खंबाटा, अरुण नंदा, निरंजन हीरानंदानी और संजीव बजाज जैसी हस्तियां शामिल होंगी। 8 सत्र ब्रिलियंट कन्वेंशन के चारों सभागृह में समानांतर चलेंगे। मप्र लॉजिस्टिक हब विषय पर गति लिमिटेड के सीईओ महेंद्र अग्रवाल और टीएम इंटरनेशनल लॉजिस्टिक के चेयरमैन संदीपन चक्रवर्ती बोलेंगे। एमपी इमर्जिंग इनोवेशन हब विषय पर नीति आयोग के सीईओ अमिताभकांत और नेसकॉम के अध्यक्ष देबजानी घोष बोलेंगे। आयोजन स्थल ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के पीछे ही खुले मैदान में डोम बनाकर प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जो 17, 18 और 19 अक्टूबर के लिए रहेगी। इसमें स्थानीय और प्रदेश के साथ देश की बड़ी कम्पनियों के 60 स्टॉल रहेंगे।
मप्र को आखिर क्या फायदा मिलेगा?
मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश में तो शीर्ष उद्योगपति तो उसी वक्त निवेश की घोषणा करेंगे। उसके बाद प्रदेश में उद्योग लगेंगे, लेकिन उससे मप्र को क्या फायदा मिलेगा? यह सवाल इस लिए उठ रहा है कि भाजपा शासनकाल में प्रदेश में जो उद्योग स्थापित हुए उसमें स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल पाए। लोगों का कहना है कि सरकार प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए सस्ती बिजली, पानी और जमीन मुहैया कराती है, लेकिन उसका फायदा दूसरे राज्यों को मिलता है। जब प्रदेश में उत्पादित समान दूसरे राज्य में भेजा जाता है तो जीएसटी का फायदा भी उसी राज्य को होता है। यही नहीं उद्योग स्थापित करने के दौरान स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात होती है, लेकिन बाहरी लोगों को रोजगार दे दिया जाता है। अभी तक प्रदेश में यह भी देखने को मिला है कि प्रदेश में अधिकतर उद्योग मंडीदीप और पीथमपुर में लगाए गए हैं। वहीं प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में तमाम सुविधाएं होने के बाद भी उद्योगपति वहां निवेश के लिए तैयार नहीं होते हैं। ऐसे में प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या खत्म कैसे होगी? सरकार को इस दिशा में सोचना होगा। हालांकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उद्योगों में स्थानीय लोगों को 70 फीसदी नौकरी देने की घोषणा की है, लेकिन इसका पालन हुआ की नहीं इसकी मॉनीटरिंग कौन करेगा? लोगों का कहना है कि जमीन, बिजली, पानी हमारी लेकर उद्योगपति हमें केवल प्रदूषण दे रहे हैं।
30 करोड़ में होगा कॉर्पोरेट शो
मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश का आयोजन प्रदेश की कमलनाथ सरकार के लिए सबसे बड़ा शो होने जा रहा है, जिसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। पूरी सरकारी मशीनरी रात-दिन इस आयोजन को भव्य बनाने के साथ सफल करने में जुटी है। फिल्मी सितारों के देश-विदेश में बड़े-बड़े शो आयोजित करवाने वाली मुंबई की नम्बर वन इवेंट कम्पनी विचक्राफ्ट को इस आयोजन का जिम्मा सौंपा गया है। रात-दिन ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में इस इवेंट कंपनी की टीम आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। इस बार स्टेज भी भव्य और विशाल बनाया जा रहा है, जिस पर बॉलीवुड नाइट की तर्ज पर प्रेजेंटेशन नजर आएगा। इस इवेंट कंपनी को ही लगभग 22 करोड़ रुपए में ठेका दिया गया है और पूरे आयोजन पर 30 करोड़ रुपए तक की राशि खर्च की जा रही है। सरकार का दावा है कि पूर्व में हुई इन्वेस्टर्स समिट में 70 करोड़ रुपए से अधिक की राशि तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा खर्च की गई और इस बार का आयोजन इससे आधी से भी कम राशि में कर लिया जाएगा और बदल में असल तगड़ा निवेश इंदौर सहित प्रदेश में आने का भी दावा किया। पूर्व में भी इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन हो चुके हैं और पिछली समिट भी शिवराज सरकार ने करवाई थी, जिस पर लगभग 70 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई और इसको लेकर विपक्ष में रही कांग्रेस ने भी कई सवाल खड़े किए थे। अब इस बार उससे आधी राशि में यह आयोजन करने का दावा किया जा रहा है। इस पूरे आयोजन पर लगभग 30 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है और फिजूलखर्ची न करने की चेतावनी अधिकारियों को भी दी गई है। कन्वेंशन सेंटर में होने वाले आयोजन के अलावा प्रदर्शनी स्थल और अन्य कामकाज का जिम्मा मुंबई की जानी-मानी और देश की नम्बर वन इवेंट कम्पनी विचक्राफ्ट को सौंपा गया है, जो गुजरात वाइब्रेंट का भी आयोजन करती है। मैग्नीफिसेंट एमपी के लिए सभी विभागों ने तैयारी कर ली हैं। इंदौर विकास प्राधिकरण ने मेहमान उद्योगपतियों को आईटी पार्क, होटल और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए जमीन देने के वास्ते दो लाख वर्ग फुट तक के प्लॉट तैयार कर लिए हैं।
– राजेंद्र आगाल