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7 हजार करोड़ की भोज मेट्रो

इंदौर के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल मेट्रो का शिलान्यास कर प्रदेशवासियों के मेट्रो ट्रेन की सवारी के सपने को पंख लगा दिए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एमपी नगर स्थित गायत्री मंदिर के पास मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। सीएम कमलनाथ ने मेट्रो का नाम राजा भोज के नाम पर रखने का ऐलान किया। इसी के साथ मेट्रो ट्रेन का काम तेज हो गया है। सीएम कमलनाथ ने प्रोजेक्ट की शुरुआत करते हुए कहा कि आज बेहद खुशी का दिन है। भोपाल ही नहीं प्रदेश का इतिहास बनने जा रहा है। उन्होंने कहा वर्ष 1991 में भोपाल में कोई सुख-सुविधाएं नहीं थीं। अपनी जवानी में हमने यहां गंदी लेक देखी थी। कोई सड़क यहां नहीं थी। उस समय केंद्र में पर्यावरण मंत्री था, तब मैंने भोपाल को संवारने के लिए पैसा दिया था। आज जब शान से लोग भोपाल की लेक दिखाते हैं तब मुझे अपनी जवानी याद आती है।
भोपाल में अभी मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में 27.87 किलोमीटर में 2 कॉरिडोर बनेंगे, एक कॉरिडोर करोंद सर्किल से एम्स तक 14.94 किलोमीटर और दूसरा भदभदा चौराहा से रत्नागिरि चौराहा तक 12.88 किलोमीटर का होगा। इसकी कुल लागत 6941 करोड़ 40 लाख होगी। प्रोजेक्ट में एलीवेटेड सेक्शन 26.08 किलोमीटर का होगा। इसमें कुल 28 स्टेशन बनेंगे। दूसरी ओर अंडर ग्राउण्ड सेक्शन 1.79 किलोमीटर का होगा, जिसमें 2 स्टेशन बनेंगे। मेट्रो रेल के ट्रैक पर रफ्तार की सीमा 90 किमी/घंटा तक होगी। हालांकि मेट्रो रेल अधिकतम 80 किमी/ घंटा की रफ्तार से ही चलेगी।
राजधानी में बारह मेट्रो स्टेशनों का निर्माण यात्रियों के लिए किया जाना है। भोपाल मेट्रो के पहले सिविल वर्क के एम्स, अलकापुरी, हबीबंगज कॉम्पलेक्स, सरगम सिनेमा, एमपी नगर से सुभाष नगर अंडर पास तक निर्माण कार्य किया जाना है। दूसरे सिविल टेंडर में करोंद से कृषि उपज मंडी, डीआईजी बंगला, सिंधी कॉलोनी, नादरा बस स्टैंड, भारत टाकीज, पुल बोगदा, ऐशबाग स्टेडियम से सुभाष नगर अंडर पास को जोड़ा जाएगा। पहले कॉरिडोर के तहत 14.99 किमी में करोंद से एम्स तक मेट्रो का निर्माण कराया जाएगा। राजधानी में मेट्रो संचालन के लिए भले ही सरकार तेजी से काम कर रही हो, लेकिन इनकी बाधों को अब तक दूर नहीं किया जा सका है। लिहाजा मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि मेट्रो के निर्माण के लिए चिन्हित बाधाओं को जल्द दूर किया जाए। साथ ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया भी पूरी की जाए। पत्र में यह भी खिला गया कि ऐसे कार्रवाई की गई तो 2023 तक मेट्रो संचालन कर पाना संभव नहीं होगा। मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने सिविल वर्क के टेंडर जारी करने से पहले एम्स से सुभाष नगर रूट का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने बोगदा पुल, सुभाष नगर अंडरब्रिज, हबीबगंज नाका, अलकापुरी बस स्टैंड और एम्स के पास बनी अवैध झुग्गियों को हटाने की सहमति दी थी, लेकिन अब तक इन्हें हटाया नहीं गया। दूसरा रूट जो कि भदभदा डिपो चौराहे से होते हुए गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया जाएगा इस रूट में भी अवैध झुग्गियां बनी हुई हैं। कार्पोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि कई बार मामले पर अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है। इसके बाद भी अवैध झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। मेट्रो के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा हाईटेंशन लाइन की है। इसमें डीआरएम कार्यालय के सामने, हबीबगंज स्टेशन रोड, बैरागढ़, लाल घाटी, मनुआभान टेकरी, करोंद चौराहा, मिसरोद, चूना भट्टी चौराहा और गोविंदपुरा इंडस्ट्री एरिया में बिजली की तारों का जाल फैला हुई है। 132 केवी की इन लाइन को हटाने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर बिजली कंपनी ने निरीक्षण किया था। इसके बाद भी इन्हें हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं की गई।
मेट्रो की कहानी कमलनाथ की जुबानी
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के शिलान्यास समारोह में परियोजना की शुरुआत कैसे हुई, इस बारे में विस्तार से बताया। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वे शहरी विकास मंत्री थे, तब जयपुर में शुरू हुई मेट्रो रेल परियोजना के शुभारंभ समारोह में गए थे। उसके पहले वह बैंगलौर, हैदराबाद में भी मेट्रो रेल शुभारंभ समारोह में शामिल हुए थे। तब उन्हें लगा था कि यह मेट्रो रेल हमारे प्रदेश के भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में शुरू क्यों नहीं हो सकती। कमलनाथ ने बताया कि तब उन्होंने दिल्ली से प्रदेश के तत्कालीन मंत्री बाबूलाल गौर को फोन लगाया और उनसे कहा कि वे मेट्रो रेल परियोजना की शुरुआत क्यों नहीं कर रहे हैं। गौर ने उन्हें बताया कि पैसा ही नहीं है। डीपीआर बनाने के लिए भी हमारे पास पैसा नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने गौर से कहा था कि वे प्रस्ताव बनाकर भेजें। कमलनाथ ने बताया कि प्रस्ताव आने पर केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री होने के नाते मैंने मेट्रो रेल की डीपीआर बनाने के लिए उस समय मध्यप्रदेश को 5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।
– रजनीकांत पारे