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कृपा विहीन कांग्रेस

मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस के खेमे में इस बात की चर्चा थी कि कृपाशंकर सिंह पार्टी छोड़ सकते हैं और वो शिवसेना या बीजेपी दोनों ही पार्टियों के संपर्क में हैं। दरअसल महाराष्ट्र के महासचिव मल्लिकार्जुन खडग़े और कृपाशंकर सिंह के बीच स्क्रीनिंग कमेटी में टिकटों को लेकर झगड़ा हो गया। महाराष्ट्र के प्रभारी मल्लिकार्जुन खडग़े ने कृपाशंकर सिंह को कहा कि आप पांच मिनट में मुझे मुंबई का फीडबैक दीजिए। इसका जवाब देते हुए कृपाशंकर सिंह ने कहा कि पांच मिनट में सभी सीटों के बारे में कैसे बता सकते हैं। साथ ही कृपाशंकर सिंह ने यह भी कहा कि वे मुंबई के अध्यक्ष रहे हैं। इस वक्त मुंबई कांग्रेस कैसे काम करती थी वो भी देखें। कृपाशंकर ने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने के लिए समय चाहिए। इसके जवाब में मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि आप अपनी राय कल हमें लिखित में भेज दीजिए और आपको आने की जरुरत नहीं है। कृपाशंकर सिंह को मल्लिकार्जुन खडग़े का यह रवैया ठीक नहीं लगा और उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खडग़े को भेज दिया। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए ये झटका माना जा रहा है।
कृपाशंकर सिंह को मुंबई में कांग्रेस का दिग्गज नेता माना जाता है और खासतौर से उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी लोगों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। लिहाजा ये कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। असल में महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कृपाशंकर सिंह के पार्टी छोडऩे को लेकर कांग्रेस सकते में है। हालांकि कृपाशंकर सिंह अभी किस पार्टी में शामिल होंगे इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि वह भाजपा और शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने भी इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले ही कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। गौरतलब है कि सिंह 15 वर्षों तक कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन सरकार में मंत्री भी रहे।
कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक कृपाशंकर सिंह अपने बेटे को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़वाना चाहते हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी उस पर सहमत नहीं हो रही थी। मल्लिकार्जुन खडग़े चाहते थे कि कृपाशंकर सिंह विधानसभा चुनाव लड़ें क्योंकि महाराष्ट्र में अभी पार्टी कमजोर है। ऐसी स्थिति में सभी सीनियर लोगों को कांग्रेस टिकट देना चाहती है। कृपाशंकर सिंह मुंबई की कलिना सीट से चुनाव लड़ते हैं और वहीं से अपने बेटे को टिकट दिलवाना चाहते थे। लोकसभा चुनाव से पहले भी जब मिलिंद देवड़ा को मुंबई का अध्यक्ष बनाया गया उस वक्त भी कृपाशंकर सिंह खुद मुंबई के अध्यक्ष बनना चाहते थे। उसके बाद जब लोकसभा टिकट बांटने की बारी आयी तो गुरदास कामत की सीट से लोकसभा चुनाव लडऩा चाहते थे लेकिन पार्टी ने संजय निरूपम को वहां से टिकट दिया। जिस सीट से संजय निरूपम चुनाव लड़ते थे वहां से उर्मिला मातोंडकर को टिकट दिया गया था। उसके बाद ही कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने पार्टी को अलविदा कह दिया और शिवसेना में शामिल हो गईं।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही उनके पार्टी छोड़कर भगवा खेमे का दामन थामने की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन उस समय उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी। सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के बीच रसूख रखने वाले सिंह पार्टी में अपेक्षित तवज्जो न मिलने व गुटबाजी के कारण अब वहां के विधानसभा चुनाव के पूर्व भाजपा में जा सकते हैं हालांकि उन्होंने अभी इस मामले में चुप्पी साधी हुई है। मूल रूप से महराजगंज के शहोदर पुर गांव निवासी कृपाशंकर सिंह 1982 में मुंबई पहुंचकर कर्मचारी हितों के लिए संघर्ष कर लोकप्रिय हुए कृपाशंकर ने कांग्रेस का दामन थाम सक्रिय राजनीति शुरू कर दी। कुशल प्रबंधक और सामाजिक सोच के कारण 1989 में ये मुंबई कांग्रेस के महासचिव बने और अनवरत पार्टी में कद बढ़ता गया। 1996 में विधान परिषद सदस्य होने के साथ ही प्रदेश के महासचिव बने। प्रतिभा पाटिल, अर्जुन सिंह, सुशील शिंदे, विलासराव देशमुख सहित कई नेताओं के करीबी होने के साथ सोनिया गांधी के विश्वास पात्र बन चुके कृपाशंकर 2001 में विधायक होने के साथ ही महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री बने। तीन साल बाद इन्हें मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व दिया गया। 2006 में ये दोबारा विधायक बने।
-बिन्दु माथुर