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‘गरीबोंÓ की सामत

घर पर गाड़ी, अलीशान मकान, सुख-सुविधाओं की सामग्री, पर्याप्त मात्रा में जमीन, अच्छी खासी आमदनी…। यदि ऐसे लोग रसूख के चलते गरीब होने का श्वांग रचकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं तो उनकी सामत आ गई है। क्योंकि 5 सितंबर से ऐसे गरीबों की पड़ताल शुरू हो गई है। 29 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में प्रदेशभर में शहर और ग्रामीण क्षेत्र में जिन लोगों ने नियमों के विपरीत और गलत तरीके से अनुचित लाभ लेने गरीबी रेखा राशन कार्ड बनाए हैं, ऐसे सभी राशन निरस्त किए जा रहे हैं। जांच अभियान दल में कृषि, महिला-बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, उद्यानिकी, श्रम, मंडी, नगरीय प्रशासन और आदिम-जाति कल्याण विभाग का मैदानी अमला शामिल किया गया है।
मप्र में पूर्ववर्ती भाजपा शासन के दौरान प्रदेश को अव्वल बनाने के लिए जो आंकड़ेबाजी की गई है अब उसकी पोल खुलने लगी है। प्रदेश में फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनवाकर गरीबों का अनाज हड़पने वालों की तादाद लाखों में है। ऐसे में कांग्रेस सरकार ने इस फर्जीवाड़े की तह तक जाने के लिए राशन कार्डों की पड़ताल करवा रही है। सरकार के इस अभियान की शुरूआत के साथ ही प्रदेशभर में राशनकार्ड सरेंडर करने का सिलसिला भी बढ़ गया है। दरअसल पिछले 15 साल के दौरान सरकार की योजनाओं का फायदा उठाने के लिए गरीबी रेखा के कार्ड बड़ी संख्या में बने हैं। खुद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी यह स्वीकार कर चुके हैं।
अभी हाल ही में केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट में मप्र को देश के सबसे अमीर राज्यों में 10वें स्थान पर बताया गया है, वहीं राज्य और केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में मप्र को देश का सबसे बदहाल राज्य बताया गया है। गरीबी के मामले में मप्र अभी भी देश के 29 राज्यों में 27 वें स्थान पर है। शिक्षा सूचकांक में देश के 29 राज्यों में प्रदेश का स्थान 23 वां है। कृषि फसलों की वार्षिक मूल्य वृद्धि में 2013-14 से 2017-18 में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मप्र में यह मात्र 0.1 प्रतिशत ही रही। गेहूं और धान जैसी फसलों का उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मप्र टॉप टेन अमीर राज्य कैसे बन गया जबकि सबसे अधिक गरीब इसी राज्य में रहते हैं। अभी हाल ही में यूएन ने 101 देशों में गरीबी पर रिपोर्ट जारी की है। भारत ने 10 विकासशील देशों के समूह में सबसे तेजी से गरीबी कम की है। देश के 27.1 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीब 55.1 प्रतिशत (64 करोड़) से घटकर 27.9 प्रतिशत (36.9 करोड़) रह गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के आधे से ज्यादा गरीब 4 राज्यों बिहार, झारखंड, यूपी और मप्र में रहते हैं। यह स्थिति तब है जब शिवराज सिंह चौहान अपने हर भाषण में इस बात का उल्लेख जरूर करते थे कि जब वे सत्ता में आए तो प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी में आता था। उनकी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से आज प्रदेश विकास दर में नंबर वन पर है। प्रदेश अब विकसित राज्य की ओर कदम रख चुका है।
अभी हाल ही में आई केंद्र सरकार की रिपोर्ट में देश के सबसे अमीर 10 राज्यों का आंकलन किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे राष्ट्र बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ये राज्य भी। कौन सा राज्य दूसरे से ‘समृद्धÓ है इसका आंकलन करने के लिए समृद्धि के दो प्राथमिक भाजक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पादन) अर्थात राज्य की वार्षिक आय दूसरा उसकी आर्थिक प्रगति को आधार बनाया गया है। इस आंकलन के आधार पर मध्य प्रदेश दसवें स्थान पर है और इसकी जीडीपी 7.35 लाख करोड़ रुपए है। यह रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 में राज्यों द्वारा केंद्र सरकार को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।
– सुनील सिंह