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आईएसआई की जद में विंध्य

मप्र का विंध्य क्षेत्र कभी सफेद बाघों के लिए प्रसिद्ध था। लेकिन हाल में ही विंध्य क्षेत्र में कई ऐसे लोग पकड़े गए हैं जिनका संबंध पाकिस्तान में संचालित आतंकी संगठन से रहा है। मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र से एक बार फिर से पाकिस्तान के लिए काम करने वाले पांच युवकों को पुलिस और एटीएस ने गिरफ्तार किया है। पांचों संदिग्ध आतंकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहे थे। 21 अगस्त को क्राइम ब्रांच की टीम ने अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर इन्हें गिरफ्तार किया है। संदिग्ध आतंकियों के नाम बलराम सिंह, भागवेंद्र सिंह, सुनील सिंह, शुभम तिवारी और एक अन्य हैं। बलराम को भोपाल एटीएस ने पहले भी 8 फरवरी 2017 को गिरफ्तार किया था। वहीं, भागवेंद्र को इंदौर एसटीएस ने गिरफ्तार किया था। सुनील 2014 से देश विरोधी गतिविधियों में सक्रिय था, लेकिन एटीएस उसे पकड़ नहीं पाई।
बताया जा रहा है कि आरोपियों के पास से फोन और लैपटॉप बरामद किया गया है। उनके पास से 17 पाकिस्तानी नंबर मिले। ये लोग आतंकियों के फंड मैनेजर से वीडियो-मैसेंजर कॉल और वॉट्सऐप चैटिंग करते थे। 2017 में गिरफ्तारी के बाद बलराम जमानत पर बाहर आया था और वह फिर से टेरर फंडिंग का काम करने लगा था। बताया जा रहा है कि वो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से बात करते थे। फिर बैंक खातों में पैसा जमा कराकर उसे आतंकियों तक पहुंचाते थे। बताया जा रहा है कि आरोपी बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से जुड़े संदिग्ध लोगों को बैंक खातों और हवाला के जरिए कमीशन बेस पर पैसे ट्रांसफर करते थे।
अभी हाल ही में यूपी एटीएस ने प्रयागराज से एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया था। संदिग्ध आतंकी मध्यप्रदेश के सीधी का रहने वाला था। ये पहला मौका नहीं है जब कोई संदिग्ध आतंकी विंध्य क्षेत्र से पकड़ा गया है। इससे पहले भी कई युवाओं को पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को फंडिंग के आरोप में एटीएस गिरफ्तार कर चुकी है। पाकिस्तान इन क्षेत्र में अपने स्लीपर सेल तैयार कर रहा है।
मध्य प्रदेश एटीएस ने कार्रवाई करते हुए फरवरी 2017 में सतना के बलराम को गिरफ्तार किया था। बलराम आंतकियों के लिए फंडिंग का काम करता था और इसके बदले में पाकिस्तानी आकाओं से कमीशन लेता था। बलराम सतना जिले के सुहास गांव का रहने वाला था और साइबर फ्रॉड, लाटरी ठगी जैसे गिरोह के साथ पाकिस्तान हैंडलर्स व आईएसआई के संपर्क में आ गया था। धीरे-धीरे महारत हासिल कर वह आतंकियों तक धन पहुंचाने का मास्टर माइंड बन गया था। बलराम निजी टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए पाकिस्तान से आने वाली इंटरनेट कॉल को मोबाइल कॉल में कन्वर्ट कर बात भी कराता था। इसके लिए वह चाइनीज सिम बॉक्स का इस्तेमाल कर रहा था। मार्च, 2018 में उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने आतंकी संगठनों को फंड मुहैया कराने वाले 10 मददगारों को गिरफ्तार किया था। इसमें एक रीवा का भी लड़का था। ये आंतकियों के लिए फंडिंग का काम करता था। ये कार्रवाई देश के तीन राज्यों में की गई थी। एटीएस ने बताया था कि पाकिस्तान में बैठा लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकी इन लोगों की मदद से भारत में गैरकानूनी पैसे की सप्लाई का नेटवर्क चला रहा था। जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था उसमें से एक संदिग्ध आतंकी मध्यप्रदेश के रीवा जिले का था। आंतकियों की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार शंकर सिंह रीवा जिले के सेमारिया थाने के बीड़ा जनपद का रहने वाला था।
हाल ही में यूपी एटीएस ने कार्रवाई
करते हुए सीधी जिले के सौरभ शुक्ला को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया था। सौरभ शुक्ला आंतकियों को फंडिंग करने का काम करता था। सौरभ शुक्ला पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था और आतंकियों के लिए फंडिंग का काम करता था।
– श्याम सिंह सिकरवार