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विवादों का विश्वविद्यालय

उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थापित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय विवादों का विश्वविद्यालय बन गया है। किसानों की जमीन फर्जी तरीके से हड़पकर स्थापित किए गए इस विश्वविद्यालय के चांसलर सपा सांसद आजम खान हैं। 350 एकड़ से अधिक जमीन पर फैले इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में यूपी में मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान हुई थी। विश्वविद्यालय का दावा है कि उसमें फैशन डिजाइनिंग, मेडिकल, इंजीनियरिंग, मास कम्युनिकेशन समेत कुल 33 पाठ्यक्रम चल रहे हैं और करीब 5,000 छात्र पढ़ रहे हैं। विश्वविद्यालय से जुड़े विवादों ने तूल तब पकड़ा जब आजम खान ने इसे अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने का प्रयास शुरू किया। इसको लेकर पूर्व राज्यपाल टीवी राजेश्वर और इसके बाद बीएल जोशी से उनकी खूब तकरार हुई।
आजम को सफलता 2014 में मिली जब उनके करीबी और उत्तराखंड के तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी को यूपी का भी कार्यभार दिया गया। कुरैशी ने जुलाई, 2014 में जौहर विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी। अपने स्थापना से ही विश्वविद्यालय पर जमीन कब्जाने के आरोप लगते रहे हैं। आंजनेय कुमार बताते हैं, जौहर विश्वविद्यालय 78 हेक्टेयर जमीन पर फैला है। इनमें 34 हेक्टेयर जमीन सरकारी है या फिर दलितों से ली गई है। कोसी नदी के किनारे की छह हेक्टेयर जमीन पर भी अवैध कब्जा किया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जौहर यूनिवर्सिटी से कोसी नदी में अतिक्रमण और पर्यावरण की शिकायतों की जांच संयुक्त समिति से कराने का आदेश दिया है।
शिकायतों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। विश्वविद्यालय में सरकारी खर्च से बनी रोड, गेस्ट हाउस, सीवरेज लाइन और सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं स्थापित करने की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) के हवाले है। आजम खान पर लगे आरोपों की जांच के लिए सपा का 21 सदस्यीय जांच दल रामपुर का दौरा करके लौटा है। इसमें शामिल एक विधायक बताते हैं, नदी की जिस जमीन पर जौहर ट्रस्ट का अवैध कब्जा बताया गया है असल में वह सरकार से खरीदी हुई है। इसके लिए 40 लाख रुपयों का भुगतान हुआ है। बावजूद इसके ट्रस्ट को दो हेक्टेयर जमीन कम दी गई है। अब तक 106 करोड़ रु. विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न विभागों से स्वीकृत कराया जा चुका है। इसमें सांसद निधि, विधायक निधि, त्वरित विकास निधि शामिल हैं। निजी संस्था पर सरकारी धन लुटाने की जांच भी प्रशासन ने शुरू कर दी है। रामपुर जिले में भाजपा के प्रभारी डॉ. चंद्रमोहन कहते हैं, आम जनता का धन उपयोग करने के बावजूद विश्वविद्यालय में किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। यहां क्या पढ़ाया जा रहा है? कौन पढ़ा रहा है? कौन पढ़ रहा है? इसकी भी जांच होनी चाहिए।
आलियागंज के किसान मोहम्मद आलिम ने एफआइआर में पूर्व सीओ सिटी आले हसन खान और पूर्व अजीम नगर थानाध्यक्ष कुशलवीर सिंह पर भूमि का बैनामा कराने के लिए दबाव डालने और पीटने का आरोप लगाया है। वे कहते हैं, पूर्व सीओ और थाना प्रभारी ने मुझे एक दिन हवालात में बंद रखा। जमीन न देने पर चोरी, चरस और स्मैक के झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद भी जब जमीन का बैनामा जौहर विश्वविद्यालय के पक्ष में नहीं हुआ तो जबरन कब्जा कर लिया गया। जमीन कब्जा करने के आरोपों में हसन पर 30 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं। रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा बताते हैं, आले हसन का लुकआउट नोटिस जारी किया गया है ताकि वह विदेश न भाग सके।
अधिकारियों ने रामपुर के सींगनखेड़ा गांव में सार्वजनिक उपभोग वाली करीब सात हेक्टेयर रेत की जमीन को नवीन परती भूमि बताकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। शासन ने 2013 में इस जमीन को जौहर ट्रस्ट के संयुक्त सचिव नसीर अहमद खान के नाम 30 वर्ष के लिए पट्टा कर दिया। उप-जिलाधिकारी सदर की अदालत ने अब पट्टा निरस्त कर दिया है। रामपुर स्वार रोड पर बने उर्दू गेट को जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन ऐंड डिजाइन सर्विसेज (सीऐंडडीएस) की सेनटेज धनराशि से बनाने पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इसी तरह आजम खान की यह यूनिवर्सिटी कई विवादों में फंसी हुई है।
-मधु आलोक निगम