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टारगेट-50

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। बीजेपी चुनाव से पहले विपक्षी दलों में लगातार सेंधमारी कर रही है। एनसीपी के तीन और कांग्रेस के एक विधायक सहित कई नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। ऐसे में महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। बता दें कि पिछले दिनों बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया था कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपना पाला बदलने के लिए कांग्रेस और एनसीपी के कम से कम 50 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। बीजेपी नेता का दावा अब सच होता नजर आ रहा है।
शरद पवार की पार्टी के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक नेताओं ने एनसीपी छोड़कर बुधवार को बीजेपी का दामन थामा लिया है। बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं में एनसीपी के तीन विधायक, एक महिला प्रदेश अध्यक्ष, एक पूर्व मंत्री और करीब एक दर्जन से अधिक पार्षद शामिल हैं। इनमें सतारा सीट से विधायक शिवेंद्र सिंहराजे भोसले, अकोला से विधायक वैभव पिचड़ और ऐरोली से विधायक संदीप नाइक के नाम शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण मुंबई के नायगांव से कांग्रेस के सात बार के विधायक कालिदास कोलंबकर ने भी बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है। एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री मधुकर पिचड़ ने भी बीजेपी का दामन थामा है। ये सारे नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए हैं।
इससे पहले भी एनसीपी के मुंबई इकाई के प्रमुख रहे सचिन अहीर भी पार्टी छोड़कर शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा एनसीपी के जयदत्त क्षीरसागर ने भी लोकसभा चुनाव के दौरान शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की थी। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की प्रवक्ता रही प्रियंका चतुर्वेदी ने शिवसेना का दामन थाम लिया था। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल और उनके बेटे सुजय विखे पाटिल ने भी बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 220 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। बीजेपी अपने सियासी किले को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। इसी के तहत बीजेपी विपक्षी दल में सेंध लगाकर उनके मनोबल को पूरी तरह से तोड़ देना चाहती है ताकि चुनावी रण में उनके मुकाबले मजूबती से खड़ा न हो सके।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कह रहे हैं कि बीजेपी को मिल रहा जनसमर्थन देखकर ये लोग बीजेपी मे प्रवेश कर रहे हैं। फिर सवाल ये उठता है कि अगर इतना समर्थन मिल ही रहा है तो गैरों की जगह पार्टी के ही पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट क्यों नहीं दे रहे? इस पर बीजेपी की सोच साफ है, चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले को ही चुनाव मैदान में उतारना चाहिये। लेकिन इससे भी ज्यादा बीजेपी को इस बात का अहसास है कि कांग्रेस या एनसीपी को खत्म करने के लिए तो उनकी जड़ें उखाडऩी होंगी। खासकर महाराष्ट्र जैसे राज्य में, जिसने मुश्किल से मुश्किल घड़ी में भी कांग्रेस को कभी उखडऩे नहीं दिया। सालों-साल पार्टी के साथ जुड़े रहे कांग्रेसी परिवारों को ले आओ तो कांग्रेस और एनसीपी अपने आप कमजोर हो जाएगी।
एक वक्त था कि बीजेपी या जनसंघ से बहुजन समाज के लोग दूर ही रहते थे। सेठजी भटजी की पार्टी कही जाने वाली पार्टी को गोपीनाथ मुंडे ने अपना ओबीसी चेहरा दिया लेकिन, फिर भी मराठा (मराठी नहीं) समाज के लिये कांग्रेसी, समाजवादी विचारधारा को छोड़ बीजेपी में जाना मुश्किल था, बीजेपी उनके लिये अछूत पार्टी थी। लेकिन अब-जब राजनीति में विचारधारा की दीवारें टूट चुकी हैं, अब मराठा राजनीतिक परिवार से नेताओं का बीजेपी में आना मतलब अब बीजेपी में आना कोई निषेध नहीं रहा। ये बीजेपी की राजनीति के लिये सर्वसमावेषक चेहरा बनने का अच्छा मौका है।
वैसे पार्टी बदलने वालों की पहली ख्वाहिश या च्वाइस बीजेपी ही है, लेकिन जब उम्मीद से ज्यादा या कहें कि छप्पर फाड़कर नेता पार्टी में आने लगते हैं तो उनको संभालना मुश्किल होता है, वो भी तब जब पार्टी गठबंधन में चुनाव लड़ रही हो। अब देखना यह है कि भाजपा में बाहर से आने वाले नेताओं को कितना महत्व
मिलता है।
-बिन्दु माथुर