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सफेद झूठ!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर बयान पर भारत में सियासत अपने चरम में आ गयी है। विपक्षी दल के नेता मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। वाशिंगटन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे पर उनसे मध्यस्थता की अपील की है और वो इसके लिए तैयार हैं। इसके बाद तुरंत ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने फौरन डोनाल्ड ट्रंप के दावे का खंडन किया। ट्रंप के इस इंटरनेशनल झूठ से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। भारतीय संसद इस विवाद से भला क्यों अछूता रहता। संसद शुरू होने के बाद से ही संसद में हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस की ओर से राज्यसभा और लोकसभा दोनों जगह पर इस मसले को उठाया गया। कांग्रेस ने मांग की कि इस मामले पर नरेंद्र मोदी का नाम आया है, तो प्रधानमंत्री को सदन में आकर इस पर सफाई देनी चाहिए। राज्यसभा में कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने और लोकसभा में भी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री के बयान की मांग की।
इन सबके बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर राज्यसभा में आधिकारिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है। उन्होंने कहा कि भारत का लगातार यह पक्ष रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता ही होगी। उन्होंने साफ शब्दों में स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से किसी तरह की मध्यस्थता की पेशकश नहीं की गई है।
अमेरिका विश्व में खुद को सबसे अधिक ताकतवर देश मानता है। रूस की विश्व पटल में कम सकारात्मक भूमिका निभाने के कारण अमेरिका वर्तमान में खुद को विश्व का मुख्य केंद्र बिंदु मानने लगा है। उसे लगता है कि विवाद किसी भी देश का क्यों न हो उसे सुलझाने के लिए अमेरिकी मदद जरूर लेनी पड़ेगी। भारतीय प्रधानमंत्री की विश्व में बढ़ती लोकप्रियता के कारण और अपने देश के अंदर ट्रंप की कम होते जनाधार और लोकप्रियता के कारण भी वो अपना महत्व जताने के लिए और विश्व का सबसे ताकतवर नेता दर्शाने के लिए भी इस तरह का बयान देने पर विवश हुए हों। हो सकता है, ट्रंप ने इस तरह का बयान अफगानिस्तान मसले और आतंकवाद से लड़ाई में पाकिस्तान का साथ लेने के लिए दिया हो। साथ ही साथ चीन से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को कम करने के लिए उन्होंने इस तरह का शिगूफा छोड़ा हो। अमेरिका के नामी-गिरामी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट में उनके झूठों का कच्चा चिट्टा प्रस्तुत किया गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के दो साल तक यानी 2018 तक ट्रंप ने 8158 झूठ बोले हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने 2018 में हर रोज औसतन 16.5 झूठ बोले और राष्ट्रपति पद के पहले साल में ट्रंप ने औसतन 5.9 झूठ बोले। साथ ही साथ आपको ये भी बता दें कि इमिग्रेशन मुद्दे और विदेश नीति पर उन्होंने क्रमश 1433 और 900 झूठ बोले हैं। जनवरी 2019 की इस वाशिंगटन पोस्ट के फैक्ट चेकर्स रिपोर्ट ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों का विश्लेषण किया जो उन्हें सत्यता से परे लगे। उन्होंने अपने इस आंकलन में ट्रंप के ज्यादातर बयान झूठे पाए।
भारत ने अपना रुख बिलकुल स्पष्ट कर रखा है कि पाकिस्तान से कोई भी द्विपक्षीय बातचीत तब तक नहीं होगी जब तक पाकिस्तान आतंकवादियों को समर्थन देना बंद नहीं करेगा। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, उस पर किसी का दखल भारत को कभी भी स्वीकार नहीं होगा। कश्मीर को लेकर और उसके समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच 1972 में शिमला समझौते के माध्यम से आपसी सहमति बनी थी। इसके तहत ये निर्णय लिया गया था कि यह मामला दोनों देश खुद सुलझाएंगे और किसी तीसरे देश का दखल नहीं स्वीकार किया जायेगा।
– अक्स ब्यूरो