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कांग्रेस के बूरे दिन

राजस्थान कांग्रेस सत्ता और संगठन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रही खींचतान का असर अब विधायकों एवं संगठन के पदाधिकारियों में नजर आने लगा है। दोनों दिग्गजों में चल रही कुर्सी की लड़ाई के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामनारायण मीणा ने मंत्री बनाने और टिकट बांटने में पैसों के लेनदेन की बात कही है। एक बार सांसद और राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे मीणा का कहना है कि सरकार और संगठन में वरिष्ठता को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। पिछले कुछ समय से नेतृत्व से नाराज चल रहे मीणा ने कुछ लोगों को पैसे देकर मंत्री बनने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पैसे देकर मंत्रीपद लिया है उन्हे हटाया जाना चाहिए। खुद को स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी के जमाने के कार्यकर्ता बताते हुए चार बार विधायक रहे मीणा का कहना है कि टिकट वितरण में भी पैसों के लेनदेन की बात कुछ लोगों ने आलाकमान तक पहुंचाई थी। मीणा ने कहा कि जिन लोगों को भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुकदमों में राहत मिली, उन्हे अब हमारी सरकार में सम्मान दिया जा रहा है।
उधर मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे वरिष्ठ कांग्रेसी विधायक हेमाराम चौधरी ने विधानसभा की कार्रवाई में शामिल होना छोड़ दिया है। चौधरी के साथ ही दयाराम परमार और महेंद्रजीत मालवीय ने भी अपनी नाराजगी आलाकमान तक पहुंचाई है। हेमाराम चौधरी ने कहा कि मंैने अपनी बात ऊपर तक पहुंचा दी है। जाहिदा खान और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत भी मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज बताए जाते है। जाहिदा खान के पिता स्व. तैयब हुसैन मेव समाज के बड़े नेता माने जाते थे और वे हरियाणा एवं राजस्थान सरकार में मंत्री रहे थे।
दरअसल पहली बार मुख्यमंत्री ने इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले अशोक गहलोत कभी इस तरह खुलकर नहीं बोले। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रदेश में करारी हार मिली और प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति में उथल-पुथल मच गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हम सफल नहीं हो पाए, लेकिन यह सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हुआ। राहुल गांधी के इस्तीफे देने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमाई हुई है। अशोक गहलोत को जयपुर से दिल्ली अध्यक्ष बनाकर भेजने की भी चर्चा चली थी। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दे दिया कि वे राजस्थान में ही रहेंगे, क्योंकि प्रदेश की जनता का मन था कि वे मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री का सीधा ईशारा उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की तरफ था। विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद की लड़ाई हारे सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ उप मुख्यमंत्री बनाया गया था।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान आते ही उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने गहलोत पर पलटवार करते हुये कहा कि राजस्थान की जनता ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के नाम पर वोट दिए थे। देश के 3 राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव एक साथ हुये थे। तीनों ही प्रदेशों में कांग्रेस की सरकार बनी है। तीनों ही प्रदेशों में कांग्रेस पार्टी की नीतियों व राहुल गांधी के कुशल नेतृत्व के कारण बहुमत मिल पाया था। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बहुत मेहनत करके कांग्रेस की सरकार बनवाई थी। इसमें प्रदेश के किसी एक नेता का योगदान नहीं था जिसके कारण प्रदेश में सरकार बन पाई थी।
-जयपुर से आर.के. बिन्नानी