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एक्शन मोड में सरकार

मप्र विधानसभा का मानसून सत्र अपने निर्धारित समय से दो दिन पहले यानी 24 जुलाई को समाप्त हो गया। यह सत्र मप्र के इतिहास में पहला ऐसा सत्र रहा जिसमें शनिवार और रविवार को भी सदन चला। वहीं यह सत्र भ्रष्टों और भ्रष्टाचार के खिलाफ वार करने के लिए भी जाना जाएगा। 13 दिनों तक चले मानसून सत्र में सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के करीब आधा दर्जन घोटालों पर जांच बैठा दी है। इनमें सिंहस्थ, नर्मदा किनारे पौधारोपण, व्यापमं, सहकारिता विभाग में हुई नियुक्तियां, नर्सिंग कॉलेज की जांच, स्मार्ट फोन वितरण आदि शामिल है। वहीं पहले से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, ई-टेंडरिंग, संबल योजना जांच के दायरे में हैं।
सूत्र बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पहल पर पूर्ववर्ती सरकार के भ्रष्टाचारों की जांच कराई जा रही है। दरअसल दिग्वजय सिंह के खिलाफ पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान ईओडब्ल्यू में पेशी करवाई गई थी। जहां छ: घंटे उन्हें बैठाकर रखा गया। अब सिंह उसी का बदला लेने के लिए ऐसा करवा रहे हैं। अगर देखा जाए तो मुख्यमंत्री कमलनाथ कभी भी बदले की भावना से राजनीति नहीं करते हैं। अब सरकार एक्शन मोड में आ गई है और नाथ की चक्की में शिव राज के भ्रष्टाचार पीसने की तैयारी हो चुकी है। इससे प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक वीथिका में भय और घबराहट का माहौल दिख रहा है।
मौत का मायाजाल बन चुके कुख्यात व्यापमं घोटाले की परतें एक बार फिर खुलेंगी। प्रदेश की कमलनाथ सरकार नए सिरे से घोटाले की जांच कराने जा रही है। गौरतलब है कि इस घोटाले की भेंट अब तक 54 जिंदगियां चढ़ चुकी हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ ने देश के सबसे कुख्यात इस घोटाले की जांच पुन: कराने की घोषणा की है। व्यापमं घोटाले की दोबारा जांच में कई राजनेता और अधिकारी बेनकाब होंगे। इसलिए सरकार ने इसकी जांच करवाने में कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई। बाकायदा इस मामले में विधानसभा में सवाल लगाया गया। जिससे यह तथ्य सामने आया है कि व्यापमं में हुई गड़बडिय़ों का जिस गुमनाम चि_ी के आधार पर खुलासा होने का दावा किया गया था, वो चि_ी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। जबकि पहले पूर्व की सरकार इस चि_ी के होने के दावे के साथ ही विधानसभा में इसका जिक्र कर चुकी है। जिसको लेकर अब गुमनाम चि_ी एक पहली बन गई है। इसी के साथ एक बार फिर व्यापमं का मामला गरमा गया है। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बयान दिया है कि व्यापमं घोटाले की दोबारा जांच होगी। वहीं दिग्विजय सिंह के पत्र का जिक्र करते हुए कहा है कई बच्चों का भविष्य बर्बाद हुआ है। 54 लोगों की मौत हुई है। कई बेगुनाह लोग जेल में बंद है। एजेंसियों ने सही तरीके से जांच नहीं की है। अब जांच होगी तो कई राजनीतिक लोग और अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे।
व्यापमं महाघोटाले से जुड़ी 197 पेंडिंग शिकायतों की भी जांच एसटीएफ करेगी। इसमें पीएमटी 2008 से लेकर पीएमटी 2011, डीमेट और प्री-पीजी सहित कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बडिय़ों से जुड़ी शिकायतें शामिल हैं। शिकायतों की जांच में तथ्य मिलने पर एसटीएफ इसमें एफआईआर भी करेगी। व्यापमं महाघोटाले से जुड़े मामलों की सीबीआई जांच चलने की वजह से एसटीएफ पेंडिंग मामलों में असमंजस में थी। विधानसभा में गृहमंत्री बाला बच्चन की घोषणा के बाद एसटीएफ अधिकारियों ने पेंडिंग शिकायतों पर काम शुरू कर दिया है। यह भी साफ है कि एसटीएफ की जांच के दायरे में सीबीआई को ट्रांसफर किए गए 212 मामले शामिल नहीं होंगे। सीबीआई जांच के दायरे में पीएमटी 2012 और 2013 शामिल है। एसटीएफ के पास पीएमटी 2008 से लेकर 2011 और प्री-पीजी में धांधली की शिकायत है। अब एसटीएफ इन शिकायतों पर जांच शुरू करेगी।
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पिछली शिवराज सरकार में नर्मदा किनारे किए गए पौधारोपण की जांच कराएगी। करीब 499 करोड़ों रुपए के इस काम की जांच की घोषणा वन मंत्री उमंग सिंगार ने विधानसभा में की है। सरकार ने जांच के लिए 4 मंत्रियों की समिति बना दी है। वन मंत्री उमंग सिंगार, उद्यानिकी मंत्री सचिन यादव, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री तरुण भनोत और ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल की समिति पूरे मामले की जांच करेगी। समिति 1 महीने में अपनी जांच पूरी करेगी। दो साल पहले 2 जुलाई 2017 को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में एक दिन में करीब 7 करोड़ पौधे एक साथ लगाने का दावा किया गया था। इस अभियान में खुद शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए थे। प्लांटेशन पर करीब 499 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। बाद में इसमें धांधली की बात सामने आयी। प्लांटेशन के इस काम में वन, कृषि, उद्यानिकी, ग्रामीण विकास और जन अभियान परिषद भागीदार थे।
गौरतलब है कि साल 2007 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने पौधरोपण में गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए सात करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया था। कांग्रेस द्वारा इस पौधरोपण को शुरुआत से ही फर्जी करार दिया जा रहा था। अब इस वल्र्ड रिकॉर्ड की पोल मध्यप्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार ने खोल दी है। जंगल में पौधे गिरने की जानकारी पर वन मंत्री 26 जून को अचानक बैतूल जिले में पहुंचे। यहां उन्होंने दो डीएफओ समेत आठ वन कर्मियों पर कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह शिवराज सरकार का एक बड़ा घोटाला है। जो रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई थी उस पर भरोसा ही नहीं हो रहा था। वन मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट के बाद हमने तकनीक का सहारा लिया और असलियत जानने के लिए मौके पर भी गए जहां घोटाला सामने आया। उन्होंने बताया कि पूरे मामले में जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। बता दें की बैतूल वन क्षेत्र की शाहपुर रेंज की पाठई बीट के अंतर्गत कक्ष संख्या 227 में दो जुलाई 2017 को शिवराज सरकार ने पौधरोपण कर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाकर खूब वाहवाही लूटी थी। जब राज्य में कांग्रेस सत्ता में आई तो वन मंत्री सिंघार ने इसकी पड़ताल की और रिपोर्ट मंगवाई। पौधों की गणना कक्ष क्रमांक 227 में सौ बाई सौ के पांच प्लाट बनाकर तथा पांच टीमों का गठन कर गणना की गई। टीम से मिली रिपोर्ट में यह पाया कि सरकारी रिपोर्ट में 15,625 पौधे रोपित होने की बात है जबकि गढ्ढे 9,375 ही खोदे गए। 60 फीसदी को आधार मानकर की गई गणना में मात्र 2343 यानी 15 फीसदी पौधे ही जीवित मिले।
प्रदेश सरकार भाजपा शासन में हुए सिंहस्थ घोटाले की भी जांच कराने की तैयारी कर चुकी है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह के अनुसार सिंहस्थ के निर्माण कार्यों के बारे में प्राप्त शिकायतों की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के आदेश देने पर कार्यवाही विचाराधीन है। जयवर्धन सिंह ने विधायक महेश परमार के सवाल के लिखित जवाब में ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उज्जैन सिंहस्थ महापर्व 2016 के लिये 2790.37 करोड़ रुपए लागत के कार्य स्वीकृत हुए हैं, अंतिम आंकड़ों का संकलन किया जा रहा हैं। 2433.49 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है। मंत्री ने बताया कि फरवरी, 2019 में शहर (जिला) कांग्रेस कमेटी, उज्जैन द्वारा कुंभ मेले में किये गये कार्यों की जांच के लिए आयोग के गठन की मांग की गई है, पत्र विचाराधीन है। महाकाल मंदिर में नंदी हाल, इंदौर-उन्हेंल-उज्जैन सड़क, कान्ह नदी कार्य के अधूरा रहने, वृक्षारोपण, पानी की टंकियों एवं अस्पताल में अव्यवस्थाओं आदि संबंध में प्राप्त शिकायतों की जांच ईओडब्ल्यू से करवाने के आदेश देने पर कार्रवाई विचाराधीन है।
उधर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र सरकार ने मुख्यमंत्री के भांजे रतुल पुरी पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। आरोप लगाया जा रहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदम को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है। गौरतलब है कि पुरी पर अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में ईडी ने विगत दिनों उन्हें बुलाकर पूछताछ की। अब इस मामले को मप्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। अब देखना यह है कि केंद्र और राज्य के बीच सह-मात के इस खेल में कौन किस पर भारी
पड़ता है।
– विशाल गर्ग