chunauti

क्या बचेगी साख

स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 में अपनी साख बचाने के लिए भोपाल नगर निगम तैयारी में जुटा हुआ है। लेकिन इस बार शहर को सिर्फ सर्वे के वक्त चकाचक दिखाकर स्वच्छ सर्वे में अव्वल आना अब संभव नहीं है। स्वच्छ सर्वे-2020 को इस तरह तीन भागों में बांटा गया है कि सालभर के पूरे परफॉर्मंेस के आधार पर ही नंबर मिलेंगे। खास बात यह है कि नगरीय निकाय द्वारा किए जाने वाले दावे को प्रमाणित करने के लिए डॉक्यूमेंट की जांच करने की बजाय उन्हें सही मानकर नागरिकों से फीडबैक लिया जाएगा। इस बार नागरिकों से सामान्य फीडबैक नहीं लिया जाएगा, बल्कि एक फीसदी आबादी से 12 सवालों के जवाब के आधार पर प्रमाणीकरण होगा। इसी आधार पर नंबर तय होंगे। अप्रैल से जून और जुलाई से सितंबर तक की साफ-सफाई पर 2000-2000 अंकों की परीक्षा को लीग माना गया है। जबकि अक्टूबर से दिसंबर तक के कार्यों का जनवरी में सर्वे होगा। दोनों लीग के अंकों का सर्वे में वैटेज 1000 अंकों का होगा और सर्वे का वैटेज 3000 अंकों का होगा।
हर साल जनवरी में होने वाले सर्वे के लिए अक्टूबर से कामकाज शुरू होता था। दिसंबर में शहर साफ नजर आता था। बाकी पूरे साल के आंकड़ों के कागजात बनाए जाते थे और सर्वे में बेहतर स्थान की जुगाड़ हो जाती थी। स्वच्छ सर्वे 2017 और 2018 में भोपाल देश में दूसरे नंबर पर था और 2019 में डाक्यूमेंटेशन में गफलत के कारण भोपाल 19 वें नंबर पर आ गया था। स्वच्छ सर्वे में दूसरे से लुढ़ककर 19वें स्थान पर आने के बाद भी नगर निगम के पूरे सिस्टम में हालात बदलने को लेकर कोई चुस्ती व मुस्तैदी नजर नहीं आ रही है। पूरे शहर का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं है जहां कचरा नजर नहीं होता हो। मेनरोड से लेकर गलियों और कॉलोनियों तक कचरे के ढेर लगे हैं।
यह स्थिति तब है जबकि सफाई की ऑनलाइन मॉनिटरिंग का दावा किया जा रहा है। दावा ये भी है कि वार्ड प्रभारी से लेकर अपर आयुक्त और आयुक्त तक रोजाना मैदान में निरीक्षण के लिए उतर रहे हैं। आलम ये है कि निगम मुख्यालय से लेकर वार्ड कार्यालयों तक में गंदगी के ढेर देखे जा सकते हैं। यह स्थिति तब है जब स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 में कॉम्पिटीशन और ज्यादा कठिन हो गया है। जगह-जगह लगाई गईं स्मार्ट डस्टबिन भी कचरे का स्पॉट बन गई हैं। डस्टबिन के बाहर कचरे का ढेर लगा रहता है। इससे पता चलता है कि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं हो रहा है। बताया जाता है की नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे को स्वच्छता को लेकर निगम की लापरवाही मिलने के साथ स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 के तय पैरामीटर में पिछडऩे की सूचना मिल रही थी। लिहाजा उन्होंने नगरीय प्रशासन के सात अधिकारियों की टीम बनाई। निरीक्षण के लिए सुबह ही दल अलग-अलग क्षेत्रों में निकल गए। करीब पांच घंटे दलों ने जमीनी स्थिति को डायरी में नोट किया। प्रमुख सचिव के निर्देश पर गोविंदपुरा स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय तत्काल पहुंचने का निर्देश दिया। इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों को भी तत्काल स्मार्ट सिटी कार्यालय पहुंचने का आदेश दिया। साफ-सफाई व्यवस्थाओं का जायजा लेकर पहुंची टीम ने अपना फीडबैक दिया। इस दौरान एक दल ने बताया कि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सही तरीके से नहीं हो रहा है। कचरा उठाने का समय ही तय नहीं है। दूसरी टीम ने कहा कि बाजारों में सफाई की स्थिति अच्छी नहीं है। साथ ही गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करने की प्रक्रिया में लापरवाही की बात कही।
सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति में भोपाल नगर निगम अपनी साख कैसे बचा पाएगा। दरअसल, सूखे-गीले कचरे का अलग-अलग सेग्रीगेशन नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है। नगर निगम के पास डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाले मैजिक वाहनों में सूखे और गीले कचरे के लिए अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए गए हैं। लेकिन इनमें निर्धारित कंपार्टमेंट में कचरा नहीं डाला जाता। यही कचरा सीधे ट्रांसफर स्टेशन भेज दिया जाता है। यहां भी गीला और सूखा कचरा अलग-अलग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निगम के बड़े वाहनों से आदमपुर छावनी डंपिंग साइड में इसी कचरे को भेज दिया जाता है।
-रजनीकांत पारे