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विवादों में रेत नीति

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा पिछले दिनों लागू की गई नई रेत नीति विवादों में आ गई है। इस नीति में कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जो मध्यमवर्गीय परिवार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। नई नीति के नियम के अनुसार निजी क्षेत्र में इतनी रेत ही रखी जा सकती है, जिससे कि छोटे घर की छत डाली जा सके। यदि घर थोड़ा बड़ा है, तो दो बार में छत डालनी पड़ सकती है। भंडारण करने वाले खनिज व्यवसायी भी इस नई नीति के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने इसे बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने वाली नीति बताया है। इस नीति में व्यापारियों को महीने में 6 हजार से ज्यादा डंपर रेत बेचने की अनिवार्यता है। इतनी रेत नहीं बेची तो वो राजसात हो जाएगी। नरसिंहपुर के खनिज व्यापारी नवीन अग्रवाल कहते हैं कि हमने मुख्यमंत्री सचिवालय से रेत नीति रद्द करने की मांग की है। इस नीति से खदानों पर बड़े उद्योगपतियों की मोनोपॉली हो जाएगी।
रेत भंडारण व्यापारियों के लिए भी इस रेत नीति ने बड़ी परेशानी पैदा कर दी है। भंडारण स्थल पर एक लाख घन मीटर यानी 35 लाख 31 हजार फीट रेत को तीन महीने के अंदर बेचना जरूरी होगा। इससे थोड़ा भी कम स्टॉक है, तो उसे एक महीने के अंदर बेचना अनिवार्य किया गया है। इस हिसाब से 208 डंपर रोजाना और महीने में छह हजार डंपर रेत बेचना जरूरी हो जाएगा। ऐसा न करने पर सरकार भंडारण को राजसात कर लेगी। इतनी रेत बेच पाना खनिज व्यवसायी को बूते से बाहर की बात दिखाई दे रही है।
नई रेत नीति में टेंडर स्वीकृत होने पर तीन दिन के अंदर 50 फीसदी राशि भरनी होगी। 25 फीसदी राशि टेंडर जमा करने पर और 25 फीसदी राशि टेंडर मंजूर करने पर देनी होगी। बोलीदार तीन बार में राशि जमा नहीं करता है, तो उसे कारण बताना होगा। अतिरिक्त समय की मांग करने पर दस दिन मिलेंगे। ये समयावधि उचित कारण मानने पर ही प्रदान की जाएगी। अब खदानों की नीलामी समूह में होगी यानी कोई एक खदान नहीं ले सकता, उसको पूरे समूह की बोली लगानी होगी। समूह की खदानों की कीमत करोड़ों में होगी।
रेत नीति में लिखा हुआ है कि निजी निर्माण कार्य के लिए निर्माण स्थल पर रेत का भंडारण अधिकतम 20 घनमीटर किया जा सकता है। 20 घनमीटर यानी 700 फीट रेत जो एक डंपर में होती है। एक डंपर रेत से एक बार में छोटे घर की छत डाली जा सकती है। यदि आपका घर थोड़ा बड़ा है, यानी 1500 से 2000 वर्ग फीट का है उसमें 40 घनमीटर रेत की जरुरत होगी, जो आप एक साथ निर्माण स्थल पर नहीं रख सकते। ऐसे में आपको किस्तों में छत डालनी पड़ सकती है। निर्माण कार्य या बेचने के लिए रेत का भंडारण कर चुके लोग और व्यापारियों की मुसीबत बढऩे वाली है। खनिज विभाग ने नई रेत नीति के नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। विभाग ने संभाग स्तर पर 10 उडऩदस्तों का गठन किया है, जो गौण खनिज के अवैध परिवहन और भंडारण की स्थिति में कार्रवाई करेंगे। उडऩदस्तों में तैनात अफसर जब्ती की कार्रवाई करेंगे और कलेक्टर न्यायालय में प्रकरणों की सुनवाई होगी।
प्रदेश में नई रेत नीति लागू हो गई है। इसमें निर्माण स्थल पर 20 घनमीटर से ज्यादा रेत का भंडारण नहीं करने और व्यापारियों द्वारा एक लाख घनमीटर रेत तीन माह में बेचने का प्रावधान है। नीति के तहत अवैध भंडारण पर सख्ती से कार्रवाई का प्रावधान है। अब विभाग ने अवैध भंडारण और परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसके तहत हर संभाग में एक उडऩदस्ता गठित किया जा रहा है, जो माह में एक बार क्षेत्र में गश्ती करेगा और अवैध खनन या परिवहन के मामलों में कार्रवाई करेगा। उडऩदस्ते उप संचालक और क्षेत्रीय प्रमुख के नेतृत्व में काम करेंगे। उडऩदस्तों को शासन को निरीक्षण रिपोर्ट भेजनी होगी।
प्रदेश सरकार ने पिछले हफ्ते नई रेत नीति को मंजूरी दी थी, जिसमें नर्मदा नदी से पूरी तरह मशीनों से रेत खनन रोकने का दावा किया था। सरकार नीति बनाकर भूल गई है, लेकिन नर्मदा में मशीनों से रेत का खनन रुकने की अपेक्षा बढ़ गया है। रेत माफिया बारिश से पहले नर्मदा से बड़े पैमाने पर खनन कर रहा है। खास बात यह है कि रेत का डंप किया जा रहा है। सरकार अभी तक नर्मदा नदी में रेत खनन रोकने में नाकाम रही है। नई रेत नीति में नर्मदा समेत अन्य छोटी रेत खदानों में मशीनों से उत्खनन पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद भी सरकार के सामने नर्मदा में मशीनों से खनन रोकने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
-धर्मेन्द्र सिंह कथूरिया