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बदलेंगे हालात?

मप्र में अब दुपहिया गाड़ी पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट लगाना अनिवार्य हो गया है। पीछे बैठा व्यक्ति अगर बिना हेलमेट के दिखा, तो पुलिस गाड़ी रोककर उसका चालान काटेगी। परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव ने दो पहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट अनिवार्य करने संबंधी आदेश जारी किया है। दरअसल प्रदेश में तेजी से बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं में वाहन चालक और उसके पीछे बैठे व्यक्ति की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने निर्देश जारी करते हुए सभी दो पहिया वाहन बेचने वाले डीलरों को वाहन खरीदने वाले ग्राहक के दस्तावजों के साथ दो हेडमेट की रसीद संबंधित आरटीओ में जमा करने की बात कही है। अगर किसी ग्राहक के पास पहले से ही हेलमेट है तो उसे इस हेलमेट का बिल जमा करना होगा नहीं तो नए वाहन का रजिस्ट्रेशन परिवहन विभाग में नहीं होगा।
मध्यप्रदेश में दोपहिया वाहन चालको और उनके पीछे बैठने वाले व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर चिंतित परिवहन आयुक्त ने यह निर्देश इसलिए जारी किए है ताकि इसका सख्ती से पालन हो सके और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम से कम किया जा सके। अब सवाल उठता है कि क्या इस निर्देश का ठीक से अनुपालन हो सकेगा। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश में दो पहिया वाहन चालक को हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया है। उसके बावजूद आज स्थिति यह है कि कमतर लोग ही हेलमेट पहन रहे हैं। यही नहीं दो पहिया वाहन चालकों के लिए परिवहन विभाग द्वारा जो भी नियम बनाए गए हैं उनका पालन नहीं हो पा रहा है। जबकि अकेले भोपाल में ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 17 करोड़ की लागत से आधुनिक कैमरे तो लगा दिए गए हैं लेकिन अधिकतर इलाकों में सुचारू यातायात कीआवश्यक बुनियादी चीजें ही मौजूद नहीं हैं। कई जगह ट्रैफिक सिग्नल बंद पड़े हैं। जहां चालू हैं, वहां स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग ही नहीं है। स्पीड लिमिट के बोर्ड भी इक्का दुक्का जगहों पर ही लगे हैं। जब स्पीड लिमिट ही तय नहीं है तो कैमरों की मदद से तेज गति वाले वाहनों का चालान कैसे बनेगा। कुल मिलाकर पहली जरूरत शहर में ट्रैफिक से जुड़ी बेसिक सुविधाएं जुटाने की है। इसके बाद ही इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) जैसा आधुनिक सिस्टम सफल हो सकता है।
आलम यह है कि राजधानी भोपाल में ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिन चौराहों पर कैमरे लगे हैं वहां भी यातायात नियमों को तोड़ा जा रहा है। जबकि कहा गया था कि आईटीएमएस में प्रमुख चौराहों पर लगे आधुनिक कैमरों की मदद से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के घर चालान पहुंचेगा। शुरू-शुरू में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के घर चालान भेजे गए, लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया। अब खानापूर्ति के लिए कभी-कभी किसी के यहां चालान भेज दिया जाता है। हालांकि इंदौर में यातायात नियम तोडऩे वालों के खिलाफ कुछ सख्ती बरती गई है। पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों लोगों के लाइसेंस निरस्त किए गए है। ऐसी सख्ती प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में क्यों नहीं बरती जा रही है।
एक बात तो यह तय है कि केवल नियम बनाने और आईटीएमएस से ट्रैफिक सुधरने वाला नहीं है। एजेंसियों को आपसी तालमेल बनाकर बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती दिखानी होगी। मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 129 में साफ कहा गया है कि दोपहिया गाड़ी चलाने वाला या उस पर सवारी करने वाले व्यक्ति को भारतीय मानक ब्यूरो के तय मानकों के तहत हेडमेट पहनना होगा। इस संबंध में न्यायालय भी आदेश जारी कर चुका है। इसके बाद 5 सितंबर 2014 को परिवहन विभाग ने आदेश का पालन करने के लिए निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद इस निर्देश का सख्ती से पालन नहीं हो सका। यही कारण है मध्यप्रदेश के परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव ने निर्देश जारी कर राजधानी भोपाल सहित सभी जिलों के वाहन डीलरों को फिर से निर्देश दिए है कि नया दोपहिया वाहन खरीदने वाले हर ग्राहक को दो हेलमेट उपलब्ध करवाए। अब देखना यह है कि परिवहन आयुक्त के इस निर्देश का किस तरह पालन होता है।
-विशाल गर्ग