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पानी पर गदर

मप्र में पड़ रही तेज गर्मी के बीच मानसून की देरी ने आम लोगों का जीना तक मुश्किल कर दिया है। एक ओर जहां प्रदेश में कई जगह तालाब सूखने के स्तर पर आ पहुंचे हैं, वहीं बारिश का अभी आसमान में नामो-निशान तक नहीं है। इन्हीं सब के बीच प्रदेशभर में जलसंकट से जूझ रही जनता गदर पर उतारी होने लगी है। लोग चक्काजाम कर सड़कों पर मटके फोड़ रहे हैं।
दरअसल प्रदेश के 36 जिलों के 4 हजार गांवों सहित शहरों में भी पानी का जलस्तर नीचे जाने से कई हैंडपंप, ट्यूबवेलों ने दम तोड़ दिया है। इस स्थिति में लोगों को पर्याप्त पानी की व्यवस्था करने में रात दिन एक करना पड़ रहा है। अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि आधी रात तक लोग पानी भरते नजर आ रहे हैं। मप्र में गर्मी के साथ जलसंकट भी गहराता जा रहा है। मप्र के सभी 27 बड़े जलाशयों में जलस्तर डेड लेवल से भी नीचे पहुंच चुका है। इनमें से कई जलाशयों में तो जलस्तर 20-20 मीटर तक नीचे खिसक चुका है। सबसे खराब स्थिति शिवपुरी, राजगढ़, सीहोर के जलाशयों की है। शिवपुरी के मनीखेड़ा डेम का जलस्तर कुल क्षमता से 26 मीटर नीचे तक पहुंच गया है। भोपाल के केरवा डेम को छोड़कर बाकी सभी जलाशयों की स्थिति काफी खराब है। यदि मानसून में एक पखवाड़े की देरी हुई तो जिलों में पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा।
राज्य में जल स्रोतों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कई जलाशयों में पानी का स्तर क्षमता का 10 फीसदी ही रह गया है। सेंट्रल वॉटर कमीशन के मुताबिक पानी का स्तर अभी बीते 10 साल में सबसे कम है। जाहिर है मध्य प्रदेश सरकार यदि प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को पानी की गारंटी देना चाहती है तो इसके लिए वो पानी लाएगी कहां से। प्लान ये है कि प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी प्रतिदिन दिया जाए। सरकार पानी एटीएम भी लगाने की तैयारी में है। कमलनाथ सरकार मध्य प्रदेश में राइट टू वॉटर यानि पानी का अधिकार लागू करने जा रही है। ये फैसला उस वक्त लिया गया है जब प्रदेश में चारों तरफ जल संकट है। हर तरफ पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। यकीनन हर नागरिक तक निश्चित मात्रा में पानी पहुंचाना सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
कमलनाथ सरकार हर नागरिक को कम से कम निश्चित मात्रा में पानी मिल सके ऐसी व्यवस्था करने जा रही है। पानी का अधिकार देने के लिए सरकार विधानसभा में कानून लाएगी। पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि वो अपने नागरिकों को स्वास्थ्य देखभाल के साथ पर्याप्त पानी की गारंटी पर विचार कर रही है। अगर ऐसा हो जाता है तो मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। पानी का अधिकार राज्य में लागू करना इतना आसान भी नहीं है। सरकार के सामने तमाम चुनौतियां हैं। पानी का अधिकार लाने पर विचार उसी तरह किया जा रहा है जैसे महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम या भोजन की गारंटी कानून संसद में लाया गया था। लेकिन बात वहीं आकर अटक जाती है कि जहां पानी के जल स्रोत्र ही नहीं हैं तो जनता को ये अधिकार मिलेगा कैसे। मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में स्थिति इतनी खराब है कि लोग पलायन कर चुके हैं।
मध्य प्रदेश में बीते कुछ साल में कई जगह तो गर्मी आते ही पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक हर व्यक्ति को रोज कम से कम 70 लीटर पानी मिलना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में तो छोडि़ए कई शहरी इलाकों में भी ये मुहैया नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार का विचार तो काफी नेक है, लेकिन ये होगा कैसे ये सबसे बड़ा सवाल है।
– अक्स ब्यूरो