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गठबंधन में गांठ

लोकसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। यूपी की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो चुकी है। जातीय समीकरण के आधार पर बने गठबंधन के फेल होने की अब वजहें तलाशी जा रही हैं। जातीय समीकरण के आधार पर यूपी में गठबंधन को भाजपा के खिलाफ काफी मजबूत होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन रिजल्ट आने के बाद जातीय राजनीति का युग बदलता हुआ सा दिख रहा है। लोकसभा 2019 के परिणाम को यूपी की बदलती राजनीति के नमूने के रूप में देखा जा रहा है।
अब प्रदेश के सियासी हल्के में यह बहस छिड़ी है कि यदि कांग्रेस भी सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के साथ रहती तो नतीजे क्या होते? चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि ऐसा होने पर प्रदेश में भाजपा विरोधी दलों से सांसदों की संख्या 25 या उससे भी अधिक हो सकती थी। क्योंकि बांदा, सुल्तानपुर, धौरहरा, बाराबंकी, बस्ती, भदोही, चंदौली, संत कबीरनगर, मेरठ आदि सीटों पर गठबंधन प्रत्याशी जितने मतों से हारे उससे अधिक मत इन सीटों पर कांग्रेस को मिले थे। बलिया में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह मस्त कुल 15,519 मत से सपा प्रत्याशी सनातन पांडेय को हरा सके। यहां पर कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव मैदान से बाहर था। गठबंधन का हिस्सा नहीं होने से कांग्रेस प्रत्याशी उदासीन रहे। कांग्रेस का नाम भी साथ होता तो शायद गठबंधन यह सीट निकाल ले जाता। इस सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 35,874 मत मिले।
चंदौली में भाजपा प्रत्यासी महेंद्र नाथ पांडेय ने सपा प्रत्याशी संजय सिंह चौहान को महज 13,959 मतों से हराया। भाजपा को 47.07 तथा सपा को 45.79 फीसदी मत मिले। इस सीट पर कांग्रेस गठबंधन से जन अधिकारी पार्टी की प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को 22,190 (2.05) फीसदी मत मिले। यहां गठबंधन से जुडऩे पर भाजपा को हराया जा सकता था। मेरठ में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र अग्रवाल ने बसपा के हाजी मोहम्मद याकूब को महज 4729 मतों से हराया। भाजपा को 48.19 तथा बसपा को 47.8 फीसदी मत मिले। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल को यहां 34,479 (2.83 फीसदी) मत मिले। गठबंधन के साथ कांग्रेस का मत जुड़ता तो बसपा प्रत्याशी की जीत पक्की हो जाती। सुल्तानपुर में भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी 14,526 के अंतर से बसपा प्रत्याशी चंद्रभद्र सिंह सोनू को हराया। यहां भाजपा को 45.91 फीसदी तथा बसपा को 44.45 फीसदी मत मिले। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी डा. संजय सिंह को 41,588 (4.17 फीसदी) मत मिले। यहां भी कांग्रेस का साथ बसपा प्रत्याशी का बेड़ा पार कर सकता था।
संतकबीर नगर में भाजपा प्रत्याशी प्रवीण कुमार निषाद ने 35,749 मतों के अंतर से बसपा प्रत्याशी भीष्म शंकर को हराया। यहां भाजपा को 43.97 तथा बसपा को 40.61 फीसदी मत मिले। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी भालचंद्र यादव को 1,28,242 (12.08 फीसदी) मत मिले थे। इस सीट पर जीत हासिल करने में कोई दिक्कत ही नहीं होती। धौरहरा में भाजपा प्रत्याशी रेखा वर्मा ने बसपा प्रत्याशी इलियास सिद्दीकी को 1,60,611 मतों के अंतर से हराया। भाजपा को 48.21 तथा बसपा को 33.12 फीसदी मत मिले। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद को 1,62,727 (15.31 फीसदी) मत मिले। गठबंधन के साथ कांग्रेस का साथ होता तो इस सीट को भी निकाला जा सकता था। बदायूं में भाजपा प्रत्याशी डा. संघमित्रा मौर्य ने सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव को 18,454 मतों के अंतर से हराया। यहां पर भाजपा को 47.3 तथा सपा को 45.59 मत मिले। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी सलीम इकबाल शेरवानी को 51,896 (4.8) फीसदी मत मिले। गठबंधन प्रत्याशी की हार के इस अंतर को आसानी से कांग्रेस के सहयोग से पाटा जा सकता था। बस्ती में भाजपा प्रत्याशी हरीश द्विवेदी ने 30,354 मतों के अंतर से बसपा प्रत्याशी राम प्रसाद चौधरी को हराया। भाजपा को 44.68 तथा बसपा को 41.8 फीसदी मत मिले। यहां पर कांग्रेस प्रत्याशी राजकिशोर सिंह को 86,453 (8.24 फीसदी) मत मिले। यहां भी कांग्रेस के साथ होने पर गठबंधन की आसान जीत होती। बाराबंकी में भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र रावत ने 1,10,140 मतों के अंतर से सपा प्रत्याशी राम सागर रावत को हराया। भाजपा को यहां 46.39 तथा सपा को 36.85 फीसदी मत मिले।
-मधु आलोक निगम