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पर्यावरण से खिलवाड़

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में तवा नदी किनारे अवैध तरीके से बनाए गए 32 निजी स्टॉक यार्ड के कामकाज पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोक लगा दी है। तवा नदी नर्मदा की प्रमुख सहायक नदी है। इन स्टॉकयार्ड का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर खनन से निकले बालू व खनिज के भंडारण और व्यापार के लिए होता है। जस्टिस रघुवेंद्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 23 मई को कहा है कि तथ्य और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हम यह उचित समझते हैं कि सुनवाई की अगली तारीख 11 जुलाई तक सरकार सभी स्टॉक यार्ड के कामकाज पर रोक लगा दे।
एनजीटी में मामले को उठाने वाले याची विकास ओझा की ओर से अधिवक्ता संजय उपाध्याय और सालिक शफीक ने बताया कि यह सभी स्टॉक यार्ड एकदम नदी किनारे ही मौजूद हैं। इसकी वजह से अवैध खनन भी जोर पकड़ सकता है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन से बचाव, परिवहन और भंडारण) कानून, 2006 के मुताबिक खनिज के लिए नदी किनारे से 50 किलोमीटर तक स्टॉक यार्ड लगाना प्रतिबंधित है। यदि कोई लीज मालिक स्टॉक यार्ड लगाना चाहता है कि तो उसे भी नदी किनारे से कम से कम 4 किलोमीटर का फासला बनाना अनिवार्य होगा।
अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने बताया कि इन सभी स्टॉक यार्ड को स्थापना की अनुमित या संचालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी (सीओई या एनओसी) लेनी होती है। लेकिन तवा नदी किनारे बनाए गए 32 स्टॉक यार्ड के पास ऐसी कोई मंजूरी नहीं है। एनजीटी में दाखिल याचिका में होशंगाबाद के पूर्व जिलाधिकारी आशीष सक्सेना पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने तबादले से ठीक पहले बिना नियम और शर्तों पर गौर किए हुए महज पांच मिनट में 45 स्टॉक यार्ड को मंजूरी दी थी। याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सालिक शफीक ने खनन विभाग से सभी स्टॉक यार्ड के मंजूरी संबंधी जानकारी के लिए सूचना के अधिकार का इस्तेमाल किया था। जवाब में उन्हें 32 खनन स्टॉक यार्ड की जानकारी मिली है। एनजीटी ने इन 32 खनन स्टॉक यार्ड और खनन संसाधन विभाग, भू-गर्भ और खनन निदेशालय, होशंगाबाद जिलाधिकारी, पूर्व जिलाधिकारी आशीष सक्सेना और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस देकर चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि कई सालों से नर्मदा एवं तवा सहित अन्य जिले की नदियों और नालों के किनारे पर स्थित रेत और मिट्टी का कई लोग चोरी छिपे अवैध खनन करते हैं। रेत के अलावा मिट्टी का भी अवैध उत्खनन जोरों से हो रहा है। जानकारी के अनुसार, बैतूल जिले में शाहपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोटमी में बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध उत्खनन लंबे समय से किया जा रहा है। अब तक इस पर रोक लगाने के लिए न तो खनिज विभाग ही कोई कार्रवाई कर रहा था और न राजस्व और पुलिस विभाग को फिक्र थी। इस मामले में जब गंभीर शिकायत के बाद कमिश्नर और आईजी ने अवैध खदानों को अपनी आंखों से देखा तो तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए। फटकार के बाद पुलिस और राजस्व विभाग के अमले को तवा और माचना नदी में अवैध कोयला खदानें नजर आ गईं। राजस्व और पुलिस विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए कोटमी में कोयले की अवैध खदानों को जेसीबी की मदद से बंद किया गया। सभी खदानों को मुरम और रेत से बंद कर दिया गया। लेकिन कई अन्य क्षेत्रों में अवैध खनन चल रहा है।
– नवीन रघुवंशी