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खाड़ी में तनाव

संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाह फुजैरा में सऊदी अरब के दो समुद्री तेल टैंकरों पर हमले की घटना चिंताजनक है। उनमें से एक सऊदी अरब से तेल लेकर अमेरिका के लिए रवाना होने वाला था। इसके अलावा यूएई ने दो नावों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही है। अमेरिका ने इसके लिए ईरान और उसके सहयोगी देशों-संगठनों को जिम्मेवार बताते हुए कहा है वे प्रॉक्सी वॉर के तहत ऐसा कर रहे हैं। हालांकि ईरान ने इस हमले पर चिंता जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि फुजैरा बंदरगाह होर्मुज जलमार्ग से तकरीबन 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां से विश्व के एक तिहाई तेल और गैस का निर्यात होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हुआ बहुपक्षीय व्यापार समझौता एकतरफा तौर पर खारिज कर दिए जाने और ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा देने के बाद से ही ईरान यह कहता रहा है कि अमेरिका ने उस पर ज्यादा दबाव बढ़ाया तो वह होर्मुज जलमार्ग को बंद कर देगा। इस आशंका के तहत ही अमेरिका ने पिछले दिनों इस क्षेत्र में अब्राहम लिंकन युद्धपोत और बी-52 बमवर्षक विमान तैनात कर दिए हैं। ईरान के प्रमुख सैनिक संगठन इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गाड्र्स कोर को अमेरिका आतंकी संगठन करार दे चुका है। जवाब में ईरान ने अमेरिकी सेना को मध्य पूर्व में स्थित आतंकी बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। अभी ईरान तेल उत्पादन में शीर्ष पर है। उसके तेल निर्यात पर पूरी रोक के लिए अमेरिका बाकी देशों से मिलकर दबाव बनाना चाहता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के दोबारा लागू होने के बाद ईरानी अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त हो चली है।
विगत दिनों ईरान ने धमकी दी कि अगर वैश्विक समुदाय अगले 60 दिनों में नए समझौते की बातचीत में विफल रहता है तो वह दोबारा अपनी एटमी गतिविधियां पूरे दम से शुरू कर देगा। सऊदी टैंकरों पर हमले को अमेरिका इसी संदर्भ में देख रहा है, हालांकि इसमें ईरान की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला है। एक तबका इसमें अमेरिकी षड्यंत्र भी देख रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव अगले साल होने हैं और ट्रंप दूसरी बार सत्ता पाना चाहते हैं। दूर-दराज की कोई छोटी-मोटी लड़ाई इस काम में उनकी मदद कर सकती है। तो क्या माना जाए कि हम एक और खाड़ी युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमरीका, मध्यपूर्व में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली भेज रहा है। युद्धपोत यूएसएस आर्लिंगटन को खाड़ी में यूएसएस अब्राहम लिंकन लड़ाकू समूह में शामिल किया जाएगा। इसमें तैनात विमान जमीन और पानी दोनों पर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन का कहना है कि कतर के एक सैन्य ठिकाने पर बम बरसाने वाले यूएस बी-52 विमान भी भेजे जा चुके हैं। विभाग का कहना है कि मध्यपूर्व में मौजूद अमरीकी सेना को ईरान के संभावित खतरों से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि खतरे क्या हैं, इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। ईरान ने इन सब को बकवास बताया है। ईरान ने अमरीका की इस तैनाती को मनोवैज्ञानिक युद्ध बताया है, जिसका मकसद उनके देश को डराना है।
इससे पहले, अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपने यूरोप दौरे पर पत्रकारों से कहा था, हमने ईरान की तरफ से उकसाने वाले कदम निश्चित तौर पर देखे हैं और हम खुद पर होने वाले किसी भी तरह के हमले के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराएंगे। हालांकि पोम्पियो ने ये स्पष्ट नहीं किया कि वो किन उकसाने वाली कदमों के बारे में बात कर रहे थे। एक तरफ जहां अमरीका अपने सहयोगी देशों को ईरान से तेल न खरीदने पर मजबूर करके ईरान की अर्थव्यवस्था को धराशायी करना चाहता है वहीं ईरान का कहना है कि वो किसी भी हालत में झुकने वाला नहीं है।
– संजय शुक्ला