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नंबर वन पर खतरा

तीन बार नंबर वन रह चुके इंदौर शहर के लिए इस बार भी केंद्र सरकार की चुनौती को पूरा करना आसान नहीं है। नगर निगम की सबसे बड़ी दिक्कत खुद नगर निगम का खाली खजाना बन रहा है। नगर निगम हर साल सफाई पर लगभग 150 करोड़ से ज्यादा का खर्चा करता है। वहीं नगर निगम की खुद की आय 492 करोड़ रुपए हैं। वहीं नगर निगम की देनदारी ही 325 करोड़ से ज्यादा है। ऐसे हालात में नगर निगम का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उस पर सफाई पर खर्चा नगर निगम को भारी पडऩे लगा है।
केंद्र सरकार ने इस साल जो नई व्यवस्था स्वच्छता सर्वे के लिए रखी है, उसमें न सिर्फ सफाई बल्कि सफाई के साथ-साथ कचरे को खत्म करना और उसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करते हुए पैसा कमाने के साथ ही शहर की खूबसूरती के साथ ही सफाई को लेकर जनता को संदेश देने का बड़ा मापदंड रखा गया है। वहीं सफाई का सर्वे भी तीन बार होगा। ऐसे में नगर निगम को सभी व्यवस्थाओं को पूरे साल चाक चौबंद रखना होगा। वैसे तो इंदौर में सफाई के लिए कचरा स्टेशन, आवश्यक वाहन, कचरे के निपटान के लिए संयंत्र बनाने जैसी सारी सुविधाएं बीते सालों में पूरी कर ली गई थी। लेकिन शहर की खूबसूरती, शौचालयों का निर्माण और जलनिधियों को सुरक्षित और साफ रखने पर नगर निगम को पैसा खर्चा करना है। जबकि नगर निगम की माली हालत इसके लिए तैयार नहीं है। नगर निगम के पास अपनी देनदारी चुकाने के लिए ही पैसा नहीं है। वहीं नगर निगम के चुनाव भी इसी साल होना है, ऐसे में शहर के अन्य विकास के कामों को भी नगर निगम प्राथमिकता दे रहा है। इसमें भी बड़ी मात्रा में पैसा लगना है, जिसके चलते सफाई को लेकर पैसों की जुगाड़ करना नगर निगम के लिए बड़ी दिक्कत है।
निगम राजस्व विभाग के अनुसार शहर में तकरीबन 500 करोड़ रुपए संपत्तिकर बकाया है। इसमें आम लोगों के साथ सरकारी विभाग की संपत्ति भी शामिल है। इसके साथ ही जलकर में बकाया राशि का आंकड़ा 370 करोड़ रुपए के आसपास है। इस बकाया राशि को वसूलने के लिए निगम ने तकरीबन 2800 कर्मचारियों को काम पर लगाया है। अब इनकी संख्या बढ़ाने के लिए 2 हजार और कर्मचारी ढूंढ़े जा रहे हैं। मुख्यालय में लगने वाले विभाग और जोनल ऑफिस से कर्मचारियों के नाम लिए जा रहे हैं। निगम के 19 जोन पर तैनात जेडओ से स्थापना विभाग ने 7 कॉलम में कर्मचारी से संबंधित जानकारी मांगी है, लेकिन कोई जेडओ तीन तो कोई चार कॉलम में जानकारी दे रहे हैं। अधूरी जानकारी देने पर बड़े अफसरों ने जेडओ को फटकार लगाते हुए सही से भेजने के आदेश दिए हैं। बकाया टैक्स वसूली में लगाए जा रहे ये वे कर्मचारी हैं, जो पूरी तरह से कामचोरी करते हैं। साथ ही जहां पर काम कम और लोग ज्यादा हैं निगम के सभी विभागों में तैनात ऐसे 2800 कर्मचारियों को ढूंढकर वसूली में लगाया गया है, जो कि मुख्यालय सहित जोनल ऑफिस पर तैनात थे। टैक्स वसूली को लेकर निगम की इस नई व्यवस्था के तहत हर 250 घर पर एक कर्मचारी रहेगा। इन कर्मचारियों को संपत्तिकर बकायादारों की सूची थमा दी गई है। अब यह कर्मचारी कॉलोनी वाइज मकान नंबर के आधार पर ग्रुपिंग कर रहे हैं ताकि वसूली में आसानी हो। जिन कॉलोनी में 250 से कम घर होंगे, वहां पर पास की ही कॉलोनी में कर्मचारी बकाया पैसा मांगने जाएंगे।
कर्मचारियों के काम पर बिल कलेक्टर की मॉनिटरिंग रहेगी। इनके साथ ही नजर सहायक राजस्व अधिकारी (एआरओ) की रहेगी। अभी इन कर्मचारियों को संपत्तिकर बकायादारों की सूची दी गई है। इसमें टारगेट के हिसाब से अच्छा काम करने पर बाद में जलकर बकायादारों की सूची दी जाएगी। साथ ही टारगेट के हिसाब से वसूली न होने पर कार्रवाई की जाएगी। निगम ने उद्यान, महापौर टॉस्क फोर्स, जनकार्य, लेखा, विद्युत, जलकार्य और परिषद कार्यालय सहित अन्य कई विभागों से ढूंढकर कर्मचारियों को बकाया टैक्स वसूली में लगाया है। विभागों के साथ पार्षदों सहित अन्य नेताओं की चाकरी करने वाले कर्मचारियों को भी काम पर लगाया जा रहा है। जिन कर्मचारियों के नाम वसूली के लिए स्थापना विभाग को दिए गए हैं उन्हें हटाने के लिए नेतागीरी भी हो रही है। कर्मचारी किसी न किसी जुगाड़ से अपना नाम हटवाने में लगे हैं।
-विकास दुबे