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अवैध खनन पर वार

पिछली भाजपा सरकार की रेत खनन नीति को कमलनाथ सरकार ने बदल दिया है। अब ग्राम पंचायतों की बजाए खनिज निगम रेत खदानें नीलाम करेगा। इसमें छोटे-छोटे समूहों को रेत खदानें ई-ऑक्शन के जरिए दी जाएगी। नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों के अधिकार छीनेंगे, लेकिन अब 50 रुपए की बजाए 75 रुपए घनमीटर वसूले जाएंगे। रेत रॉयल्टी 125 रुपए घनमीटर ही रहेगी। खुद का मकान बनाने 10 घनमीटर सालाना तक रॉयल्टी फ्री रेत कोई भी ले जा सकेगा। रेत नीति में परिवर्तन की वजह राजस्व में घाटा और अवैध रेत उत्खनन के मामलों में बढ़ोतरी होना बताया जा रहा है। पंचायतों को अधिकार दिए जाने के बाद सरकार की रेत से आय सिर्फ 69 करोड़ रुपए रह गई थी। नई व्यवस्था से यह बढ़कर 900 करोड़ रुपए हो जाएगी। नई रेत नीति में खदानों का समूह बनाकर उनकी नीलामी राज्य खनिज निगम ऑनलाइन करेगा।
नई रेत खनन नीति में छोटे समूहों को दो साल के लिए खदानें दी जाएंगी। खेतों के अंदर खनन की मंजूरी नहीं मिलेगी, लेकिन यदि नदी किनारे खेत है तो उसे समेटकर बेचने की अनुमति होगी। नर्मदा में मशीन से खनन प्रतिबंधित रहेगा। शासकीय कामों के लिए भी रॉयल्टी फ्री रेत मिलेगी। अभी जो रेत खदानें हैं, उनके अलावा भी 30 प्रतिशत और रेत खदानें चिह्नित कर ऑक्शन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह चौहान सरकार ने डेढ़ साल पहले रेत खदानों के संचालन का अधिकार ग्राम पंचायतों को सौंपा था, अब कमलनाथ सरकार इस फैसले को बदलते हुए फिर से रेत खदानों को ठेके पर देने जा रही है। इसके पीछे सरकार की मंशा रेत खदानों से खजाना भरने की है, क्योंकि पंचायतों को रेत खदानें सौंपने के बाद से प्रदेश में रेत के दाम कम नहीं हुए, बल्कि खजाने को करोड़ों रुपए की चपत लग गई। नर्मदा नदी पर स्थित खदानों में रेत खनन, संग्रहण और लोडिंग के काम में मशीनों पर पूरी तरह रोक रहेगी। अन्य नदियों में पांच हेक्टेयर तक की खदानों में स्थानीय श्रमिकों की समिति से खनन, संग्रहण और लोडिंग का काम कराया जाएगा। बड़ी खदानों में मशीन के उपयोग की इजाजत होगी। रेत खनन पर मानसून सीजन प्रारंभ होते ही 15 जून से प्रतिबंध लग जाएगा।
प्रदेश में नई रेत खनन नीति की घोषणा के साथ ही कांग्रेस और भाजपा एक बार फिर आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाए कि भाजपा के कार्यकाल में रेत का अवैध उत्खनन हुआ। भाजपा नेताओं ने भी उगाही की। जनंसपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार के 15 साल के कार्यकाल में रेत का अवैध उत्खनन हुआ है। भाजपा नेताओं ने अफसरों से सांठगांठ कर नदियों को खोखला कर दिया। रेत खनन नीति से रेत महंगी हुई। भाजपा सरकार में रेत के अवैध खनन की सरकार जांच कराएगी। जिम्मेदारों के खिलाफ एक्शन भी होगा। भाजपा सरकार को आम आदमी की फिफ्र नहीं थी, इसलिए रेत के दाम बढ़े और घर बनाना महंगा हो गया, लेकिन अब आम आदमी को ध्यान में रखकर नीति बनाई गई है।
मंत्री पीसी शर्मा के बयान पर भाजपा सरकार में राजस्व मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में अवैध तौर से धन उगाही बढ़ी है। सरकार अपने पांच माह के कार्यकाल में हुए अवैध खनन की पहले जांच कराए। उन्होंने आगे यह भी जोड़ा जांच एजेंसियों ने भी सरकार के करीबी लोगों के यहां कार्रवाई की थी इससे ही स्पष्ट होता है कि सरकार किस दिशा में काम कर रही है।
गौरतलब है कि सीमेंट और कंकरीट के निर्माण कार्यों में रेत का उपयोग अपरिहार्य है। आबादी बढऩे के साथ-साथ आवास, स्कूल, अस्पताल या सड़क हों या पेयजल भंडारण से जुड़ी जरूरतें सभी के निर्माण में रेत, सीमेंट, कंकरीट आदि की मांग तेजी से बढ़ी है। रेत में भी प्राथमिकता में मांग नदियों से निकलने वाली रेत की है। इसलिए भारत सहित दुनिया भर में ही नदियों से रेत खनन अत्यधिक होने लगा है। गैर कानूनी रेत खनन का कारोबार पूरे देश में ही आपराधिक हिंसक प्रवृत्तियों के साथ जड़ें जमा चुका है। मप्र में अवैध खनन के कारण पिछले कुछ सालों में कई जानें जा चुकी हैं।
-रजनीकांत पारे