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पांडव भरोसे

कहते हैं कि नई दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है और देश की राजनीति के इस केंद्र पर कब्जे के लिए सत्ताधारी बीजेपी को वर्ष 2014 की अपेक्षा ज्यादा पुख्ता रणनीति के साथ मैदान में उतरना पड़ा है। बीजेपी की 5 सदस्यीय टीम खामोशी से मिशन में जुटी हुई है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भी राज्य में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 80 में से 71 सीटों पर कब्जा किया था लेकिन इस बार उसे एसपी-बीएसपी गठबंधन से कड़ी टक्कर मिल रही है।
वर्ष 2019 में स्थिति पिछले चुनाव की अपेक्षा काफी अलग है। दशकों तक एक-दूसरे की धुर-विरोधी रही एसपी और बीएसपी एक साथ आ गई हैं और उन्होंने आरएलडी के साथ गठबंधन बनाया है। इस महागठबंधन ने अब यूपी में बीजेपी के लिए करो या मरो की स्थिति पैदा कर दी है। इस महाचुनौती से निपटने के लिए बीजेपी ने अपनी 5 सदस्यीय टीम को मोर्चे पर लगा दिया है। बीजेपी की इस पांच सदस्यीय टीम में सुनील बंसल (मोदी की तरह पूर्णकालिक प्रचारक रहे), बीजेपी के दलित नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत गौतम, मध्य प्रदेश के नेता डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा, गुजरात के गोरधन झड़फिया और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल हैं। यह टीम रणनीति बनाती है और इसकी रिपोर्ट सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेजती है। टीम में शामिल एक सदस्य कहते हैं, यूपी में इस बार हमारे लिए सब आसान नहीं है। दिसंबर से जिस तरीके से हमने काम किया है, हमें विश्वास है कि यहां पर हम अच्छा परिणाम देने में सफल रहेंगे। आरएसएस के नजदीकी एक और टीम मेंबर ने कहा, हमारी नियुक्ति के साथ ही हमारी चुनावी रणनीति शुरू हो गई थी। हम जानते हैं कि अमितभाई ने हमें चुना है और किसलिए चुना है। गोरधन झड़फिया के नेतृत्व में इन सदस्यों को यूपी की जातिगत राजनीति को ध्यान में रखकर चुना गया है। यूपी में हार्दिक पटेल फैक्टर को खत्म करने के लिए पाटीदार नेता गोरधन झड़फिया को चुना गया। सारे दलित मायावती के पाले में न चले जाएं इसके लिए राजस्थान के बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम को लाया गया।
अपर कास्ट को साधने के लिए डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा को चुना गया। इन दिनों यूपी में छोटे मोदी कहे जा रहे सुनील बंशल को टीम का मेंबर बनाया गया। ये चारों लोग जहां बीजेपी के गैरपरंपरागत वोट बैंक को अपने साथ लाने के लिए रणनीति बना रहे हैं वहीं योगी आदित्यनाथ हिंदू वोट बैंक को पार्टी के साथ लाने पर काम कर रहे हैं। चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए आरएसएस ने भी अपनी पूरी ताकत लगा दी है। बीजेपी ने राज्य की 80 सीटों को जोन में बांट दिया है। राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, किसानों की बदहाली, जल संकट, जाति और बेरोजगारी, ये छह मुद्दे निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद इन मुद्दों को हर सीट के साथ जोड़कर उसे नक्शे पर निशान लगाया गया है।
-मधु आलोक निगम