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सर्जरी की तैयारी

लोकसभा चुनाव के बाद मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सरकार बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी करेगी। लोकसभा के नतीजे इसका आधार बनेंगे। वहीं, चुनाव प्रचार के दौरान जो फीडबैक मिल रहा है, वो भी संज्ञान में लिया जाएगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसके संकेत भी दिए हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में भी कुछ बदलाव के संकेत हैं। माना जा रहा है कि प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में पदस्थ संजय बंदोपाध्याय को वापस भी बुलाया जा सकता है। वहीं प्रदेश में एक ही विभाग में वर्षों से जमे अफसरों को इधर से उधर किया जा सकता है।
प्रदेश में सत्ता बदलते ही मैदानी अफसरों की हुई अदला-बदली के बाद अब सरकारी विभागों में सालों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी बदलने की तैयारी है। प्रदेश में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद कमलनाथ सरकार एक बार फिर प्रशासनिक सर्जरी करेगी। कांग्रेस के वचन-पत्र के प्रमुख बिंदुओं को पूरा करने के लिए इनसे संबंधित विभागों में मुख्यमंत्री कमलनाथ काबिल और नतीजे देने वाले अफसरों की पदस्थापना करना चाहत हैं। उन्होंने अपनी मंशा से मुख्य सचिव एसआर मोहंती को अवगत करा दिया है।
कमलनाथ सरकार की दूसरी प्रशासनिक सर्जरी प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाने के लिए होगी। इसको लेकर शासन स्तर पर रणनीति बन चुकी है। फील्ड स्तर में भी कुछ अफसरों की पदस्थापना होगी। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर अन्य विभागों में भी अफसरों की नए सिरे से जमावट होगी। माना जा रहा है कि इस कसावट में मुख्यमंत्री कमलनाथ का लंबा संसदीय और प्रशासनिक अनुभव दिखाई देगा। केन्द्रीय मंत्री रहते हुए कमलनाथ ने अनेक बड़े मंत्रालयों में काम किया है और बेहतर नतीजे दिए हैं, इसलिए कहा जाता है कि वे अफसरों से काम लेना जानते हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय में फेरबदल भी प्रस्तावित है। सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी को स्कूल शिक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों बड़े और महत्वपूर्ण विभाग हैं। आमतौर पर सामान्य प्रशासन की कार्मिक शाखा जिस प्रमुख सचिव के पास रहती है, उसको दूसरा काम नहीं सौंपा जाता है। इसी तरह मुख्यमंत्री सचिवालय में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं। यहां पदस्थ अधिकारी भी यही अनुमान लगाकर बैठे हैं। यह भी संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के भरोसेमंद अफसर संजय बंदोपाध्याय को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाया जा सकता है।
चुनाव के बाद मंत्रियों से परामर्श करके मंत्रालय में अधिकारी भी बदले जाएंगे। मैदानी स्तर पर नए सिरे से जमावट होगी। इसके लिए कुछ कमिश्नर और कलेक्टरों के तबादले होंगे। इसके साथ ही सरकार फीडबैक लेने का तंत्र भी चुस्त-दुरुस्त करेगी। चाहे बिजली की समस्या हो या फिर कर्जमाफी से जुड़ी मैदानी शिकायतें, सरकार तक वैसी नहीं पहुंची, जैसी उम्मीद की जाती है। यही वजह है कि जब समस्या सतह पर आ गई तब सरकार एक्शन में आई और डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हुई। यह कितनी कारगर रही यह तो चुनाव के बाद पता लगेगा पर इतना तय है कि इसका असर ब्यूरोक्रेसी पर जरूर पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव मोहंती जीएडी के अफसरों के साथ बैठक कर प्रमुख विभागों में अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और आयुक्त के रूप में विभागाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए आईएएस अफसरों के नाम का पैनल तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि 28 मई के बाद एक बार आईएएस अधिकारियों की नईपदस्थापना का दौर शुरू होगा। इस सर्जरी में मंत्रालय एवं विभाग मुख्यालयों में सालों से एक ही कुर्सी पर जमे अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी बदला जाएगा।
-सुनील सिंह