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बदला तो नहीं

श्रीलंका में 21 अप्रैल को हुए सीरियल ब्लास्ट में मारे गए लोगों का आंकड़ा सरकार ने घटा दिया है। श्रीलंका सरकार के अनुसार हमले में 253 लोगों की मौत हुई। पहले 359 लोगों के मारे जाने की बात कही गई थी। वहीं श्रीलंका पुलिस ने इस फिदायीन हमले में शामिल रहे 4 संदिग्धों के फोटो जारी किए हैं। इनमें दो महिलाएं हैं। वहीं 39 देशों के यात्रियों के लिए आगमन पर वीजा (वीजा ऑन अराइवल) देने की सुविधा को बंद कर दिया। उधर, श्रीलंका ब्लास्ट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसी में से एक कयास यह है कि श्रीलंका के चर्चों में हुआ ब्लास्ट कहीं न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों में हुई गोलीबारी का बदला तो नहीं है।
गौरतलब है कि 15 मार्च को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में जुमे की नमाज पढऩे पहुंंचे 50 लोगों को एक आतंकवादी ने अंधाधुंध गोलीबारी करके मौत के घाट उतार दिया था। कुछ उसी तरह श्रीलंका की तीन बड़ी चर्च में ईस्टर के मौके पर जमा हुए ईसाई धर्मावलंबियों को आतंकियों ने निशाना बनाया है। श्रीलंका में अलग-अलग जगह हुए 8 धमाकों में अब तक 253 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से भी अधिक लोग घायल हैं। चार फिदाइन हमलावरों के भी नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि जेहरान हाशिम ने खुद को पांच सितारा होटल शांग-री-ला में खुद को बम से उड़ा लिया, जबकि श्रीलंका के पूर्वी शहर बट्टीकालोआ की चर्च में अबू मोहम्मद ने फिदाइन हमला किया। हमले के पीछे आतंकी संगठन तौहीद-ए-जमात (नेशनल तौहीत जमात) का हाथ हैं। हमले की चिंताजनक बात यह है कि न्यूजीलैंड के दूरदराज इलाके की मस्जिद पर दुर्दांत हमला करके आतंकी ने दुनिया में खौफ का पैगाम देने की कोशिश की थी, कुछ-कुछ वैसा संदेश देने के लिए आतंकियों ने श्रीलंका की बहुत छोटी ईसाई आबादी के बेगुनाह लोगों को चुना।
ये हमले कोलंबो में सेंट एंथनी चर्च, नौगोंबो में सेंट सेबेस्टियन चर्च और बट्टिकलाओ में एक चर्च में हुए। इसके अलावा पांच सितारा होटल शांग्री-ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरी को भी निशाना बनाया गया। शांग्री-ला होटल में हमला करने वाले सुसाइड बॉम्बर का नाम जहरान हाशिम बताया जा रहा है, जबकि बट्टिकलाओ के चर्च में हमला करने वाले सुसाइड बॉम्बर की पहचान अबु मोहम्मद नाम के शख्स के तौर पर हुई है। श्रीलंका पुलिस ने ईस्टर के दिन हुए सीरियल ब्लास्ट में शामिल रहे संदिग्धों के फोटो जारी किए। जिन संदिग्धों के फोटो जारी किए हैं, उनके नाम मोहम्मद इवुहईम सादिक अब्दुल हक, मोहम्मद कासिम मोहम्मद रिलवान, पुलास्थिनी राजेंद्रन उर्फ साराह और फातिमा लतीफ हैं।
श्रीलंका के पूर्व भारतीय अंबेसडर अचल मल्होत्रा के अनुसार- ये ग्लोबल आतंकवाद का एक हिस्सा है। तमिल और सिंंहली कम्युनिटी और एलटीटीई के बीच विवाद का इतिहास काफी पुराना है। 2009 में एलटीटीई के खात्मे के साथ यूं लगा कि शांति कायम हो गई। लेकिन अगर मान लें कि लिट्टे फिर से वापस आ रहा है तो वह ईसाईयों को टारगेट क्यों करेगा? श्रीलंका में करीब 8 फीसदी ईसाई हैं, जिनका सिनेला कम्युनिटी या फिर तमिल समुदाय के लोगों के साथ कोई विवाद नहीं दिखता है। इन सीरियल धमाकों से आतंकी पूरी दुनिया को एक मैसेज देना चाहते हैं। ये मैसेज कि उनका नेटवर्क बहुत बड़ा है। वह इससे बड़े हमले भी कर सकते हैं। हाई सिक्योरिटी वाले 3 पांच सितारा होटलों को निशाना बनाने का मतलब है पश्चिमी देशों को चेतावनी देना, क्योंकि यहां इन देशों से बहुत से लोग आते हैं। अचल मल्होत्रा ने इस हमले के संदर्भ में ये भी कहा है कि श्रीलंका का पड़ोसी होने के नाते भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
पिछले महीने 15 मार्च को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में एक मस्जिद पर हमला हुआ था। मस्जिद में एक ब्रिटिश मूल के 28 साल के हमलावर ब्रेंटन टैरेंट ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जो ऑस्ट्रेलिया का है। उसमें करीब 50 लोगों की मौत हुई थी। जिस ग्लोबल आतंकवाद की ओर अचल मल्होत्रा ने इशारा किया है, उसी ओर सोशल मीडिया भी इशारा कर रहा है। श्रीलंका में हुए हमले को न्यूजीलैंड के हमले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये हमला न्यूजीलैंड की मस्जिद पर हुए हमले का बदला है। न्यूजीलैंड में इस्लाम धर्म के लोग बहुत ही कम हैं और वहां इस्लाम धर्म के लोगों की हत्या होने की घटनाएं सामने आती हैं। कुछ वैसा ही श्रीलंका में हो रहा है। यहां ईसाई धर्म के लोग कम हैं और उन पर हमले हो रहे हैं। देखा जाए तो श्रीलंका हमला देखकर ये कहा जा सकता है कि ग्लोबल आतंकवाद के तहत ये न्यूजीलैंड में मस्जिद पर हुए हमले का बदला है।
– अक्स ब्यूरो