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मुलायम हुए रिश्ते

चौबीस साल की दुश्मनी के बाद जब मुलायम और मायावती एक मंच पर आए तो जैसे एक दूसरे के प्रति कड़वाहट भुला चुके थे, जहां मायावती ने मुलायम सिंह को पिछड़ों का असली नेता बताते हुए भारी मतों से जिताने की अपील की, तो वहीं मुलायम ने भी कहा, वह इस एहसान को नहीं भूलेंगे। गेस्ट हाउस कांड के 24 साल बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में मायावती और मुलायम एक मंच पर आकर एक दूसरे की तारीफ की। मायावती को हमेशा इस बात का इल्म रहता है कि लोगों के मन में गेस्ट हाउस कांड को लेकर सवाल जरूर रहते हैं, इसीलिए उन्होंने खुद ही रैली में इसका जिक्र करते हुए कहा-देशहित में हम गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर चुनाव लड़ रहे हैं, इसका बार-बार जिक्र करके समय नष्ट नहीं करना चाहतीं।
एक जो सबसे बड़ी चुनौती है कि दोनों के बेस वोटर्स का दिल मिले। इसलिए अखिलेश हर मंच से बसपा प्रत्याशी को जिताने और मायावती का सम्मान करने की बात दोहराते हैं। आज मुलायम ने भी अपने भाषण के दौरान कई बार मायावती का अभिनंदन करते हुए सभी लोगों से मायावती का सम्मान करने की अपील की। मैनपुरी में जमा भीड़ से बार-बार भारी मतों से जिताने की अपील के बीच मुलायम ने मायावती का कई बार अभिनंदन किया। तो मायावती ने भी जब मुलायम मंच पर आए तो खड़े होकर अभिवादन किया। मायवती ने मुलायम को पिछड़ों का असली सर्वमान्य नेता बताते हुए नरेन्द्र मोदी को पिछड़ों का नकली नेता करार दिया, तो जोरदार नारेबाजी से रैली स्थल गूंज गया। एक चीज जो खास दिखी वह पुरानी कड़वी यादों को मिटा कर सुनहरे राजनीतिक भविष्य का एक मंच पर मौजूद होना। मायावती ने अखिलेश यादव को मुलायम का एकमात्र उत्तराधिकारी करार दिया गया तो रैली के आखिर में अखिलेश यादव ने मायावती के भतीजे आकाश को ले जाकर मुलायम सिंह यादव से परिचय कराया। सपा नेता अपने भाषणों में आकाश का नाम बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से पहले लेते दिखे।
हमेशा अपने भाषणों में मनुवाद और हरिजनों की बात करने वाली बसपा प्रमुख मायावती में गजब का आत्मविश्वास दिखा, उनकी भाषण देने की शैली में पैना पन नजर आया। आज के भाषण में नौकरियों और विकास की बात करने वाली मायावती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गठबंधन को सराब कहने पर चुटकी लेते हुए तंज भी कसा। कहां-यही सराब का नशा बीजेपी को हराने के लिए जनसमूह पर चढ़ चुका है। हमेशा पढ़ के भाषण देने वाली मायावती आज रैली के संबोधन में बीच-बीच जनता से नजरें मिलाकर, हाथ हिलाकर संबोधित करने के साथ अंत में सभी से कहा, मैं आप से रजा लेती हूं। अंत में अखिलेश यादव ने बोलते हुए कहा कि सपा-बसपा ने मिलकर आप को दिल्ली के करीब ला दिया, अब आप भी वोट देकर गठबंधन को दिल्ली के करीब पहुंचा दो। हाल में ही पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा खुद को पिछड़े वर्ग का बताए जाने के बयान पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा, वो कागज में पिछड़े हम जन्म से पिछड़े।
भारतीय राजनीति के लिए ऐतिहासिक इस रैली पर सभी की निगाहें टिकी थीं, कि मुलायम और मायावती आमने-सामने होंगे तो क्या रिएक्शन होगा? लेकिन मंच पर साफ दिखाई दिया कि सपा और बसपा के नेता एक दूसरे के प्रति सम्मान और समर्थन देते दिखाई दिए। ये तो नहीं मालूम कि मंच पर मुलायम सिंह यादव ने मायावती के प्रति जो आभार और सम्मान भाव प्रकट किया उसमें थोड़ा बहुत अफसोस भी रहा या नहीं, लेकिन मायावती आत्मविश्वास से लबालब नजर आ रही थीं। मुलायम सिंह यादव ने मायावती का एहसान माना तो बीएसपी नेता ने अपनी बातों और हाव भाव से जताया भी। अखिलेश यादव को देख कर तो पहले से ही लगता है कि गठबंधन में मायावती का ही दबदबा है, मंच पर मुलायम सिंह की मौजूदगी में भी मायावती ने अपने हाव भाव से ये जताने की पूरी कोशिश की कि सपा-बसपा गठबंधन तो वो ही चला रही हैं।
– मधु आलोक निगम