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नया पाकिस्तान

पाकिस्तान के अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं। इमरान खान जिन्होंने अपने कैबिनेट मिनिस्टर्स के साथ नया पाकिस्तान बनाने का दावा किया था वो 8 महीने में ही अपनी कैबिनेट के काम से खुश नहीं हैं। आलम ये है कि इस दौर में पाकिस्तान की सबसे जरूरी मिनिस्ट्री यानी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने अपना पोस्टर ब्वॉय खो दिया है। असद उमर ने पाकिस्तानी वित्तमंत्री की कुर्सी से इस्तीफा दे दिया और ये हुआ भी तब जब उमर ने ये वादा किया था कि कुछ ही हफ्तों में वो आईएमएफ का बेलआउट पैकेज पाकिस्तान के लिए ले आएंगे।
असद उमर ने 2012 में पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का हाथ थामा था और तब से लेकर अब तक असद उमर को इमरान खान ने पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की उलझन का जवाब बताया था। दरअसल, असद उमर एक मल्टीमिलियन डॉलर कंपनी के सीईओ हुआ करते थे और पाकिस्तान में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ भी। इंग्रो कॉर्पोरेशन कंपनी से असद 1985 में जुड़े थे और 1997 में वो इस कंपनी के सीईओ बन गए थे। 2004 में उन्हें इसी ग्रुप के प्रेसिडेंट और सीईओ का पद मिला था और 2009 में पाकिस्तान का सितारा-ए-इम्तियाज अवॉर्ड क्योंकि वो पब्लिक सेक्टर में काफी अच्छा काम कर रहे थे।
असद पाकिस्तान के सबसे चर्चित बिजनेसमैन के रूप में जाने जाते थे और उन्हें इंग्रो कॉर्पोरेशन को फर्श से अर्श तक पहुंचाने के लिए जाना जाता था। यही कारण है कि 2012 में उन्हें आर्थिक मसीहा के रूप में पेश किया गया और पीटीआई ने तब से लेकर अब तक की लड़ाई में असद को इमरान खान ने एक ऐसे जवाब के तौर पर पेश किया जो पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के पेचीदा सवाल का हल था, लेकिन सरकार बनने के महज 8 महीने के अंदर ही असद उमर को अपने पद से हटना पड़ा। कैबिनेट की अदला-बदली को इमरान खान सरकार की नाकामी माना जाए या फिर उसके मंत्रियों की ये तो नहीं पता, लेकिन एक बात तो पक्की है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए ये बेहद खराब दौर चल रहा है। असद उमर हाल ही में अमेरिकी दौरे से वापस आए थे और उनके मुताबिक आईएमएफ का पैकेज जल्दी ही मिलने वाला था, लेकिन उसके पहले ही असद उमर का इस्तीफा अब उस बेकआउट पैकेज के लिए भी सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
2019 में मौजूदा हालात में पाकिस्तान गजब की आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। ये देश आयात पर ज्यादा खर्च कर रहा है और निर्यात हो नहीं रहा। इसका करंट अकाउंट डेफिसिट 2.7 बिलियन डॉलर (2015) से बढ़कर 18.2 बिलियन डॉलर (2018) में हो गया। किसी देश के करंट अकाउंट डेफिसिट यानी (सीएडी) से पता चलता है कि उसने गुड्स, सर्लिस और ट्रांसफर्स के एक्सपोर्ट के मुकाबले कितना ज्यादा इंपोर्ट किया है? यह जरूरी नहीं है कि करंट अकाउंट डेफिसिट देश के लिए नुकसानदेह ही होगा। विकासशील देशों में लोकल प्रॉडक्टिविटी और फ्यूचर में एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए शॉर्ट टर्म में करंट अकाउंट डेफिसिट हो सकता है। लेकिन लॉन्ग टर्म में करंट अकाउंट डेफिसिटी इकोनॉमी का दम निकाल सकती है। इसका सबसे अहम कारण है आयात का बढऩा जो सीपीईसी प्रोजेक्ट के कारण हुआ है। इसके पहले वाली सरकारों ने ध्यान नहीं दिया और आयात इतना बढ़ गया कि पाकिस्तान में विकास होने की जगह अर्थव्यवस्था ही चरमरा गई। जून 2018 तक पाकिस्तान का कर्ज 179.8 बिलियन डॉलर हो चुका था और महज एक ही साल में ये 25.2 बिलियन डॉलर बढ़ा है। 2018 में तो सिर्फ पाकिस्तानी रुपए की कीमत कम होने के कारण 7.9 बिलियन डॉलर का कर्ज बढ़ा है। पाकिस्तान, असद उमर, इमरान खान, अर्थव्यवस्था असद उमर जिन्हें पाकिस्तान का पालनहार समझा जा रहा था वो तो बीच मजधार में ही छोड़कर चले गए।
– माया राठी