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जंगबाज तैयार

मिशन विश्वकप में भारतीय टीम इस बार तीसरा विश्वकप खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी। आईसीसी क्रिकेट वल्र्ड कप 2019 का यह टूर्नामेंट इंग्लैंड और वेल्स में आयोजित किया जाएगा। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही अपनी वल्र्ड कप टीम का ऐलान कर दिया था। भारत तीसरा ऐसा देश है जिसने वल्र्ड कप 2019 के लिए अपने खिलाड़ी तय कर लिये हैं। टीम इंडिया पांच जून 2019 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने वल्र्ड कप अभियान की शुरुआत करेगी। हालांकि इस विश्वकप का पहला मैच मेजबान इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाएगा। मौजूदा विश्वकप के लिए भारतीय टीम मजबूत दिख रही है, लेकिन हमें ये भी गौर करना होगा कि ये वल्र्ड कप 2015 की भारतीय टीम से कैसे अलग है।
पिछले वल्र्ड कप 2015 के कुछ भारतीय खिलाडिय़ों की कमी इस साल वल्र्ड कप में खलेगी। उनमें से एक हैं भारतीय तेज गेंदबाज उमेश यादव, जो साल 2015 के वल्र्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा थे। वो टीम इंडिया की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने थे। उन्होंने वल्र्ड कप के आठ मैचों में कुल 18 विकेट हासिल किए थे और टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचाने में मदद की थी। पिछले कुछ वक्त से वो लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं और यही वजह कि उन्हें इस साल वल्र्ड कप के लिए नहीं चुना गया। हालांकि जैसा अनुभव उमेश के पास है उसकी कमी इस साल भारतीय टीम में जरूर खलेगी।
एमएसके प्रसाद की अगुआई में पांच सदस्यीय चयन समिति ने दिनेश कार्तिक के अलावा ऑल राउंडर विजय शंकर, लोकेश राहुल और रविंद्र जडेजा को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। अंबाती रायडू को जगह नहीं मिल पाई है। चौथे क्रम के बल्लेबाज के लिए 55 वनडे खेल चुके रायडू की जगह नौ वनडे खेलने वाले विजय शंकर को तरजीह दी गई है। हालांकि इस क्रम पर कई अन्य विकल्प खुले हैं। विकेटकीपर धोनी अपना चौथा विश्वकप खेलेंगे जो कि उनका अंतिम विश्वकप माना जा रहा है। कप्तान कोहली का यह तीसरा और रोहित शर्मा, शिखर धवन, रविंद्र जडेजा, मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर इससे पहले 2015 में विश्वकप टीम में शामिल थे। दिनेश कार्तिक का भी दूसरा विश्वकप है। आठ खिलाडिय़ों लोकेश राहुल, विजय शंकर, केदार जाधव, हार्दिक पंड्या, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह का यह पहला विश्वकप होगा।
बात विश्वकप में खेलने की हो तो कोई भी टीम इतने बड़े आयोजन में प्रयोगों से बचना चाहेगी, लेकिन टीम इंडिया पर अगले माह इंग्लैंड में होने वाले विश्वकप को लेकर यह बात फिट नहीं बैठने जा रही है। इसका उदाहरण नंबर चार बल्लेबाजी क्रम पर मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का बयान है, जिसमें उन्होंने इस क्रम पर कई विकल्प मौजूद होने की बात कहकर विजय शंकर, केदार जाधव, दिनेश कार्तिक को आजमाने को कहा है।
वर्ष 1983 का विश्वकप जीतने वाली टीम के विकेट कीपर सैयद किरमानी को यही बात गले के नीचे नहीं उतर रही है। विजय शंकर बेहद भाग्यशाली हैं जिन्हें विश्वकप की टीम में जगह मिली है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दोनों बेहद महत्वपूर्ण मुकाबलों में उन्हें टीम में जगह नहीं मिलेगी। वहीं 1987 और 1992 का विश्वकप खेलने वाली भारतीय टीम के विकेट कीपर किरन मोरे ऋषभ पंत को टीम में नहीं लिए जाने को गलत करार दे रहे हैं।
नंबर चार पर कोहली की पहली पसंद बीते वर्ष अक्टूबर से अंबाती रायडू रहे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई घरेलू श्रृंखला के दौरान उनकी पसंद बदल गई। रायडू ने पिछले अक्टूबर से नंबर चार पर 14 पारियों में 42.18 की औसत से 85.60 के स्ट्राइक रेट के साथ 464 रन बनाए। खास बात यह रही कि इस दौरान अन्य किसी बल्लेबाज को इस क्रम पर आजमाया नहीं गया। नतीजन इस क्रम पर रिजर्व बल्लेबाज की जगह नहीं बन पाई। शंकर ने अब तक नौ वन डे खेले हैं, लेकिन एक बार भी नंबर चार पर नहीं खेले हैं।
जून माह में इंग्लिश परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नंबर चार का क्रम बेहद महत्वपूर्ण है। यहां कुकाबुरा नहीं बल्कि दो-दो ड्यूक गेंदों से आक्रमण होगा। भारत के पहले चारों मैच मजबूत दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान से हैं। जून के भारी मौसम में यहां गेंद काफी घूमती है। किरमानी इसी को लेकर हैरान हैं। उनका कहना है कि जब किसी मजबूत बल्लेबाज का विकल्प ही नहीं है तो ऐसे में पहले दो मैचों में इस क्रम पर केदार जाधव को मौका देना चाहिए।
दिक्कत यह है कि अगर टॉप ऑर्डर फेल हो गया तो मध्यक्रम में इसे संभालने वाला मैच विनर कौन होगा? धोनी से उम्मीद की जा सकती है पर उनके साथ एक और बल्लेबाज होना चाहिए। इसी एक्स फैक्टर की वकालत किरन मोरे करते हैं। मोरे का कहना है कि इस क्रम पर पंत को आजमाने से विकल्प मिल सकते थे। हालांकि किरमानी पंत पर कार्तिक के चयन को जायज ठहराते हैं। उनका मानना है कि पंत को अभी विकेट कीपिंग में काफी कुछ करने की जरूरत है।
– आशीष नेमा