hadasha

जहरीला धुआं

विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी का दंश झेल चुके भोपाल की आबो हवा में आज जहरीली गैस का असर है। लगभग साढ़े तीन दशक बाद भी जहरीली गैस का असर कम नहीं हुआ। ऐसे में आदमपुर स्थित कचरा खंती से उठने वाला धुआं शहर की हवा को प्रदूषित करता रहता है। 21 अप्रैल को आदमपुर छावनी गांव में स्थित लैंडफिल साइट (कचरा खंती) में ऐसी आग लगी कि उसका असर 30 किलोमीटर के दायरे में महसूस किया गया। कचरे से उठ रहे धुएं की वजह से पैदा जहरीली गैस के कारण आसपास की रिहाइशी कॉलोनियों और गांवों में लोगों का जीना मुहाल हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वे पहले ही नगर निगम को चेता चुके थे कि कचरा खंती में कभी भी आग लग सकती है, लेकिन निगम प्रशासन ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
पांच दिन तक लगी आग से उठने वाले धुएं के गुबार से आसपास के गांवों के लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की समस्या होने लगी। गांवों और बस्तियों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी पांडे का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के सामने पहले ही खंती में आग लगने की आशंका जताई थी मगर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आग लगने से निकलने वाली फ्यूरेन, डॉइआक्सिन, कार्बन मोनो आक्साइड व कार्बन डाइआक्साइड जैसी जहरीली गैसों से मानव व वन्यप्राणियों को नुकसान की आशंका जताई है। हवा की दिशा भोपाल की तरफ न होकर गांवों की तरफ थी इसके कारण शहर की तरफ ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। फिर भी आदमपुर छावनी से सटे पटेल नगर, आनंद नगर समेत 5 से अधिक रिहाइशी कॉलोनियों तक धुएं का हल्का असर हुआ, जबकि आदमपुर छावनी, पडरिया, कोलुआ समेत आसपास के 10 गांवों पर भी धुएं के असर की बात सामने आई। खंती में तैनात निगम कर्मचारी गोवर्धन यादव ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे वह पोकलेन से काम कर रहा था तभी आग लगी और तेज हवा के झोंके से पोकलेन के चारों ओर धुआं फैल गया, इससे दम घुटने लगा। तैनात निगमकर्मियों ने आग देखकर मशीन छोड़कर भागकर अपनी जान बचाई।
गौरतलब है कि आदमपुर छावनी में गत मई 2018 में भी भीषण आग लगी थी, उस दौरान कचरे की मात्रा कम थी फिर भी आग पर काबू पाने में 24 घंटे का समय लगा था। एक साल पहले भोपाल की भानपुर खंती कचरा खंती में बायो रेमिडिएशन का काम शुरू हुआ था, जिसके बाद यहां कचरा डालना बंद कर दिया गया था फिर जनवरी 2018 से शहर का पूरा कचरा आदमपुर छावनी की इस लैंडफिल साइट में भेजा जाने लगा था। आदमपुर छावनी की खंती में लगी आग और तीस किलोमीटर क्षेत्र में फैले धुएं पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। बोर्ड की रपट में इस दुर्घटना से घटनास्थल के आसपास का पीएम -10 का स्तर जो सामान्य वातावरण में 100 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होता है, वो आग से निकले धुएं के कारण तीन गुना बढ़कर 317 हो गया है। इसी प्रकार पीएम-2.5 का संयंत्र भी जो सामान्य तौर पर 60 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर होती है वह भी धुएं के दुष्प्रभाव के कारण 164 तक पंहुच गया है।
राजधानी के लिए नासूर बनी भानपुर खंती की तरह ही अब आदमपुर छावनी में भी कचरे का नया पहाड़ बनना शुरू हो गया है। 15 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में 25 फीट ऊंचा कचरे का नया पहाड़ अब तक खड़ा हो चुका है। इस कचरे से बिजली बनाने का जो सपना शहरवासियों को दिखाया गया था, उसकी बुनियाद भी कहीं नजर नहीं आ रही है। कचरे को वैज्ञानिक रूप से खत्म कर बिजली बनाने के इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकारी तंत्र और ठेकेदार कंपनी कितनी संवेदनशील हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोजेक्ट को अब तक न तो पर्यावरणीय मंजूरी मिली है और न ही कंपनी ने अब तक प्रोजेक्ट के लिए फायनेंशियल क्लोजर पूरा किया है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के निर्माण के नाम पर पिछले 4 महीने से यहां अब तक सिर्फ एक बाउंड्रीवॉल और एप्रोच रोड का निर्माण चल रहा है।
-नवीन रघुवंशी