Ghotala

सब्सिडी का खेल

मप्र सरकार की सरल योजना (इंदिरा गृह ज्योति योजना) में फर्जीवाड़ा होने लगा है। उपभोक्ताओं के मीटरों में 20 से 21 हजार यूनिट की खपत निकल रही है और बिल की राशि भी लाखों रुपए में पहुंच गई, लेकिन कंपनी ने उससे 200 रुपए ही बिल जमा कराया और शेष राशि सब्सिडी के रूप में सरकार से क्लेम कर ली। उनके मीटर भी बदल दिए। इन उपभोक्ताओं के बिलों पर चर्चा हाल ही में हुई कंपनी अधिकारियों की बैठक में भी की गई।
गरीब व मजूदरों को 200 रुपए प्रति महीने के हिसाब से बिजली देने के लिए सरल योजना लागू की है। इस योजना में उन उपभोक्ताओं को लाभ दिया गया है, जिनके पास मजदूरी, बीपीएल कार्ड है और घर का लोड 1 हजार वाट है। शहर में 25 फीसदी उपभोक्ता इस योजना के तहत रजिस्टर्ड हैं। कंपनी के रीडरों ने मीटरों की रीडिंग की तो हैरान करने वाला बिल तैयार हुआ। इनके मीटरों में हजारों यूनिट की खपत निकल रही है और लाखों रुपए का बिल जनरेट हो रहा है। वहीं दूसरी ओर बिना जांच के बिजली कंपनी ने सरकार से सब्सिडी ले ली।
ग्वालियर के हरनामपुर बजरिया आनंद नगर निवासी वीरेन्द्र सिंह भोज का आईवीआरएस नंबर 3677692000 है। फरवरी में इनके मीटर में 20200 की खपत निकली और 1 लाख 75 हजार 713 रुपए का बिल जारी हुआ, लेकिन कंपनी के सिटी सेंटर जोन ने सरल योजना में सरकार से सब्सिडी ले ली। वहीं कोटेवाला मोहल्ला निवासी शेर सिंह का आईवीआरएस नंबर 8719692000 है। फरवरी में इनके मीटर में 21184 यूनिट की खपत निकली और 1 लाख 84 हजार 295 रुपए का बिल जारी हुआ। कंपनी के फूलबाग जोन ने सरकार से सब्सिडी क्लेम कर ली।
गौरतलब है कि योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने गाइड लाइन बनाई है। योजना 1 जुलाई 2018 से लागू की गई। इस योजना के तहत बल्व, पंखा, टीवी चलाने की पात्रता होगी और खपत 100 यूनिट तक रखी जाएगी। घर का लोड 1 हजार वाट होना चाहिए। योजना का लाभ देने से पहले घर का निरीक्षण अनिवार्य है। इन उपभोक्ताओं की बिलिंग विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 55 के तहत होगी। धारा 65 के तहत सरकार सब्सिडी दे सकती है। लेकिन सरल योजना के तहत कईयों को ज्यादा खपत के बाद भी लाभ दिया गया है। मध्य क्षेत्र
विद्युत वितरण कंपनी के सर्कल में कुछ ऐसे उपभोक्ता सामने आए हैं जिनकों योजना में रियायत दी गई है।
ओएंडएम भिंड सर्कल में आईडी नंबर 5539332000 के उपभोक्ता की खपत 10812 यूनिट रही। जिसका बिल 93913.1 रूपए का आया लेकिन कंपनी ने उससे 200 रुपए ही बिल जमा कराया और शेष राशि सब्सिडी के रूप में सरकार से क्लेम कर ली। इसी तरह ओएंडएम भिंड में आईडी नंबर 0848232000 की खपत 11843 बिल 102901 रूपए, भोपाल सिटी आईडी नंबर 1858515111 की खपत 69552 बिल 605717 रूपए, भोपाल सिटी आईडी नंबर 2258355000 की खपत 11937 बिल 103714 रूपए, ओएंडएम सीहोर आईडी नंबर 9018000000 की खपत 10083 बिल 87574 रूपए, होशंगाबाद आईडी नंबर 8327181000 की खपत 38109 बिल 331757 रूपए और बैतूल आईडी नंबर 8400350000 की खपत 10211 बिल 88677 रूपए का आया लेकिन कंपनी ने उससे 200 रुपए ही बिल जमा कराया और शेष राशि सब्सिडी के रूप में सरकार से क्लेम कर ली। सरल योजना में हुए फर्जीवाड़े का खामियाजा वह उपभोक्ता उठा रहे हैं, जो नियमित बिल भरते हैं। इस मामले में ऊर्जा प्रियव्रत सिंह का कहना है कि 20 हजार व 21 हजार यूनिट के बिलों को सरल योजना में फायदा दिया है तो यह गड़बड़ी है। सभी की जांच कराकर कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरल बिजली बिल योजना का लाभ ले रहे उपभोक्ता
सरल बिजली बिल योजना का लाभ ले रहे उपभोक्ता 100 रुपए मासिक का भी बिल जमा नहीं कर रहे हैं। पिछले 8 माह में लगातार शहर में डिफॉल्टरों की संख्या में इजाफा हुआ है। वहीं योजना के नाम पर पूरे प्रदेश में यह बात भी सामने आ रही है कि योजना का लाभ पाने के लिए अधिकारियों की मिलीभगत से उद्योगपति, सरकारी कर्मचारी, अधिकारियों सहित व्यवसाइयों और नेताओं सहित हजारों अपात्र लोगों ने मजदूरों के तौर पर अपना पंजीयन करवा लिया है। बिजली बिल में छूट और पिछले बिलों का बकाया माफ करवाने के लिए योजना में इतनी बड़ी संख्या में फर्जीवाड़ा किया जा रहा जिसमें कई अरबपतियों और लखपतियों सहित पूंजीपतियों और व्यापारियों के नाम भी असंगठित मजदूर के नाम पर सामने आ रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां मध्य क्षेत्र, पूर्व क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र पहले से ही भारी कर्ज में डूबी हुई हैं। ऐसे में योजना ने कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस योजना की आड़ में कई बड़े शहरों के अलावा सिवनी जिले में विद्युत विभाग के जोनल कार्यालय, मुख्य सहायक इंजीनियर और कार्यपालन यंत्रियों ने जमकर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार किया है।
-सुनील सिंह