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सट्टे का कारोबार

आईपीएल मैचों पर प्रतिदिन लाखों रुपए के दांव लग रहे हैं। मप्र की राजधानी भोपाल में पुलिस दो दर्जन से अधिक एजेंटों को पकड़ चुकी है। व्यापारियों से मिले लैपटॉप और मोबाइल को खंगाला जा रहा है। इनसे कुछ जानकारी मिली है जो चौकाने वाली है। दुबई में बैठकर पूरा धंधा ऑपरेट करने वाले गिरीश के कई देशों के क्रिकेटरों से संबंध हैं। इनमें से कुछ आईपीएल खेल चुके खिलाड़ी भी हैं। गिरीश हर गेंद से लेकर हर ओवर पर बड़ा भाव देता था। डीआइजी इरशाद वली ने बताया कि राजधानी में करीब पांच हजार सटोरिए हैं, जो पकड़े गए बुकी के जरिए आइपीएल मैच पर सट्टा लगवा रहे हैं। आइटी अफसरों के साथ पुलिस की छापेमारी के दौरान जब्त हुई डायरियों से यह सुराग मिले हैं।
भोपाल में नरेश हेमनानी और जशपाल उर्फ पाली सुपर मास्टर और मास्टर की भूमिका निभाते हैं। इनके पास 500 करोड़ के सट्टे के कारोबार में लिप्त होने के प्रमाण मिले हैं। गिरीश तलरेजा दुबई से सट्टे की लाइन देता है। दोनों उसे बाहर बांटते हंै। छापे में इनके यहां 56 लाख 56 हजार 700 रुपए समेत दो मोबाइल और डायरियों में सट्टे का हिसाब-किताब मिला। संजीत सिंह चावला भाई जशपाल के साथ सट्टा लेता है। इनकी मोबाइल की दुकान है। इनसे 11 लाख एवं दो मोबाइल मिले। मनोहरलाल तलरेजा का दुबई में गिरीश से सीधा संपर्क है। वह गिरीश की बेक एंड शेक बेकरी का संचालन करता है। नरेश के साथ भी काम करता है। इसके यहां दो लाख 39 हजार 800 रुपए मिले। चेतन वाधवानी आइपीएल प्रकरण की मुख्य भूमिका में है। इसकी बैरागढ़ में कपड़ों की दुकान है। चेतन के यहां से 5.9 लाख रुपए, 10 मोबाइल, चार कम्प्यूटर, लेपटॉप, सट्टे की पर्चियां मिलीं। संतोष वाधवानी भाई चेतन के साथ सट्टा लगवाने में सहयोग करता है। कंबलजीत सिंह और सतीश गोपनानी सट्टा लगवाते हैंं।
जयप्रकाश मंधानी फायनेंसर के काम के साथ सट्टा लगवाता है। इसके यहां 5 लाख 58 हजार 260 रुपए व एक मोबाइल मिला। गौरव राठी इवेंट मैनेजमेंट का काम करता है। यह लाइन लेकर सट्टा लगता और लगवाता है। इसके यहां 9 लाख रुपए व एक मोबाइल मिला है। भरत सोनी, टैंट हाउस संचालक है। गौरव राठी के साथ धंधे में पार्टनर है। इसके यहां 20.22 लाख, तीन मोबाइल, लेपटॉप मिला है। पुलिस को इनके पास से लाखों का हिसाब-किताब भी मिल चुका है, लेकिन नकदी बरामद करने के नाम पर ढाई लाख से अधिक बरामद नहीं कर पाई है। क्योंकि अब आईपीएल के बुकी कैश में लेन-देन करने के बजाए ई-वॉलेट का उपयोग कर रहे हैं। ई-वॉलेट में 10 हजार रुपए डलवाकर 20 हजार तक का दांव लगवा रहे हैं। इसके साथ ही लाखों का दांव लगाने वाले भी ई-वॉलेट से भुगतान कर रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस के हाथ सिर्फ कमीशन पर सट्टा खिलवाने वाले एजेंट ही पकड़ में आ रहे हैं। बुकी हाईटैक होकर पुलिस से बच रहे हैं। पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं कि बुकी तक पहुंचना इतना आसान नहीं है। बुकी हर रोज मोबाइल की सिम बदलने के साथ ही लोकेशन भी बदल रहे हैं।
पुलिस अधिकारी यह बात स्वीकार कर रहे हैं कि आईपीएल मैचों पर लाखों के दांव लगाए जा रहे हैं। लेकिन इस बार सटोरियों तक पहुंचना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। क्योंकि सटोरिए ई वॉलेट का उपयोग कर रहे हैं। पहले मोबाइल पर लाइन देते थे और डिब्बे पर भाव बताते थे। जिसके कारण आसानी से पकड़ में आ जाते थे। अब मोबाइल पर ऑनलाइन लिंक दे रहे हैं। इस पर एक साइड भाव आ रहा है और दूसरी साइड सट्टा खेलने वाला हिसाब-किताब आ रहा है।
बुकी के एजेंट भी अधिक होशियार और चालाक हैं। ये लोग दूसरे जिलों में जाकर सट्टे का काम कर रहे हैं। पूरा कारोबार मोबाइल से हो रहा है। पुलिस के दबाव के बाद भी ये लोग हाथ नहीं आ रहे हैं। व्यापारी के अलावा नौकरीपेशा लोग भी आईपीएल में सट्टा लगाने से लाखों के कर्ज में डूब जाते हैं। घर, दुकान व गहने तक गिरवी रखने पड़ते हैं। कुछ लोग तो कर्ज से परेशान होकर सुसाइड तक कर लेते हैं।
– बृजेश साहू