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डकैतों की चुनावी दस्तक

मिनी चंबल के नाम से मशहूर पाठा का जंगल आज भी दस्यु गैंगो के साए में है। चंबल का बीहड़ तो डकैतों के आतंक से लगभग मुक्त हो चुका है लेकिन, चित्रकूट के आसपास दस्युओं का खौफ कायम है। ददुआ, ठोकिया, रागिया, बलखडिय़ा सहित कई ऐसे नाम रहे हैं जिन्होंने वर्षों इस जंगल पर हुकूमत की है। वर्तमान में बबुली कौल और साधना पटेल कुख्यात है। लोकसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही बबुली कौल और साधना पटेल की सक्रियता बढ़ गई है। उधर, लोकसभा चुनाव में मतदान को लेकर डकैतों से प्रभावित इलाकों में पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को निर्भीक मतदान के लिए प्रेरित करने का जिम्मा उठाया है। प्रतिदिन दस्यु प्रभावित क्षेत्र में चौपाल व मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील पुलिस द्वारा की जाती है। चुनावी माहौल में ग्रामीणों पर दहशत का साया न पड़े इसके लिए कॉम्बिंग व सर्च ऑपरेशन से पुलिस कुख्यात डकैत बबुली कोल और अन्य दस्यु गैंग की तलाश में जुटी है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से सटे पाठा के जंगलों में कई दशकों से दस्यु सुंदरी की दस्तक से दहशत व्याप्त है। नवोदित शिवहरे गैंग की सारी गतिविधियां उसी के इशारे पर चल रही हैं। बीहड़ में कूदने के बाद से यह महिला डकैत अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी है। साधना पटेल बीहड़ में कूदने के बाद से दस्यु सुंदरी फूलन देवी, सीमा परिहार और कुसमा नाईन की तरह काम कर रही है। पिता चुन्नीलाल पटेल खुद पाठा का इनामी डकैत था, इसलिए जंगल के गुर उसे विरासत में मिले हैं। साधना जेल में बंद इनामी डकैल नवल की प्रेमिका रही है। अब दस हजार रुपये के इनामी डकैत दीपक शिवहरे ने उसे अपने साथ कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, वह हाल में पाल देव गांव के छोटू सेन अपहरण कांड की मास्टरमाइंड है। मध्य प्रदेश के सतना नया गांव थाने में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हो चुका है।
पाठा में पांच दशक से डकैतों का राज है। अधिकांश समय ये डकैत उत्तर प्रदेश की सीमा में ही रहते हैं। ज्यादातर आपराधिक वारदात भी यहीं करते हैं। भागने के लिए कभी-कभार ही मध्य प्रदेश की शरण लेते हैं। जब भी ये डकैत मध्य प्रदेश में सिर उठाने की कोशिश करते हैं तो पुलिस मुठभेड़ में मार गिराए जाते हैं। डकैत गुड्डा पटेल, ललित पटेल, नवल धोबी, रजुआ जैसे कई डकैत मध्य प्रदेश में ही मारे गए थे। दस्यु सुंदरी साधना पटेल अब उतर प्रदेश की एसटीएफ के रडार पर है। आशंका जताई गई है कि वह अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए लोकसभा चुनाव में गड़बड़ी पैदा कर सकती है। उसके कुछ करीबी प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ इलाके में छिपकर रह रहे हैं। इसकी भनक लगते ही उनकी तलाश तेज कर दी गई है। शंकरगढ़, मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। इस पठारी क्षेत्र में मध्य प्रदेश के तमाम अपराधी व डकैत पहले भी पनाह लेकर वारदात करते रहे हैं। ऐसे में इस समय एसटीएफ साधना गैंग के मूवमेंट पर नजर रख रही है। चित्रकूट जिले के भरतकूप थाना क्षेत्र के बगहिया गांव निवासी साधना पटेल पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित है। कुछ माह पहले गिरफ्तारी के लिए मप्र और उप्र पुलिस ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया था। तब वह साथियों के साथ भूमिगत हो गई थी।
पुलिस अधिकारियों को पता चला है कि विधानसभा चुनाव के दौरान साधना मध्य प्रदेश के तराई क्षेत्र में भेष बदलकर किसी के लिए चुनाव प्रचार कर रही थी। वह कभी जींस-टॉप पहनती तो कभी साड़ी पहनकर घूंघट कर लेती थी। उसे अपनी बिरादरी के लोगों की मदद भी मिलती है। बताया जाता है कि लोकसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही उसकी सक्रियता बढ़ गई हैं। करीब 20 साल की साधना सतना, कर्वी, चित्रकूट, बांदा और उसके आसपास के इलाके में लेडी डकैत के नाम से जानी जाती है। बताया जाता है कि कुख्यात डकैत चुन्नी लाल का साधना की मां से प्रेम प्रसंग था। चुन्नी, साधना को बेटी बताता था। चुन्नी का एनकाउंटर होने के बाद साधना नवल धोबी के गैंग में शामिल हुई। नवल की गिरफ्तारी के बाद दीपक शिवहरे ने गिरोह बनाया। अब वह दीपक, नवल के साले अजय उर्फ नावेंद्र समेत अन्य के साथ गैंग चला रही है।
-रजनीकांत पारे