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किसान जिम्मेदार

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी पूरे शबाब पर है। प्रदेश में 3 हजार से अधिक खरीदी केंद्रों पर गेहूं खरीदा जा रहा है। इस बार गेहूं खरीदी के लिए एक ऐसा मापदंड बनाया गया है जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। दरअसल समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं की गुणवत्ता की जवाबदारी अब सोसायटी की नहीं बल्कि किसानों की होगी। खराब अनाज निकलने पर वह किसान को वापस कर दिया जाएगा। इसके लिए सरकार अनाज पर दो टैग लगाने जा रही है, ताकि पहचान की जा सके। इससे पहले खराब अनाज निकलने पर सोसायटी को भुगतना पड़ता था।
नागरिक आपूर्ति निगम के अनुसार इस बार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने के बाद बोरियों में दो टैग (पर्चे) लगाए जाएंगे। एक टैग में सोसाइटी और दूसरे में किसान की जानकारी होगी। जिससे वेयरहाउस में भंडारण होने पर सीधे किसान के बैंक खाते में उपज की राशि पहुंचेगी। यदि अनाज रिजेक्ट किया गया तो संबंधित किसान को सोसाइटी के जरिए अनाज वापस कर दिया जाएगा। अब तक वेयरहाउस से अनाज रिजेक्ट होने के बाद जिम्मेदारी सोसाइटी प्रबंधन की होती थी। पिछले साल की गई गेहूं खरीदी में हजारों क्विंटल गेहूं वेयर हाउसों से नागरिक आपूर्ति निगम ने रिजेक्ट किया था।
गौरतलब है कि गेहंू खरीदी केंद्रों से अनाज खरीदने के बाद सोसाइटी भंडारण के लिए वेयरहाउस भेजा जाता है। वेयरहउस में भी अनाज की गुणवत्ता जांची जाती है। यहां गुणवत्ता में कमी मिलने पर अनाज रिजेक्ट करके सोसाइटी को भेजा जाता है। बोरियों में सिर्फ सोसाइटी का टैग होने से अनाज किसका है, यह पता कर पाना मुश्किल होता था। किसान संगठनों का कहना है कि टैग लगाने की आड़ में फर्जीवाड़ा होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि समितियों में अगर कोई गड़बड़ी होती है तो उसका ठीकरा हमारे सिर फोड़ा जा सकता है।
इस बार केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 357 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है। जिसके तहत मध्य प्रदेश से 75 लाख टन गेहूं की खरीद होगी। पिछले साल मध्य प्रदेश से 73 लाख टन गेहूं की खरीद सरकार द्वारा की गई थी। उधर हर बार की तरह इस बार भी किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समर्थन मूल्य पर की जा रही गेहूं खरीदी में नमी के नाम पर किसानों से 300 से 400 ग्राम प्रति बोरी अधिक उपज लेने का मामला सामने आया है। शासन ने प्रत्येक 50 किलो पर बारदान सहित 600 ग्राम लेने के निर्देश दिए है। इसमें 500 ग्राम का बारदान भी शामिल है। सोसायटियों में 900 ग्राम तक लिया जा रहा है। इस हिसाब से प्रत्येक किसान से करीब 400 ग्राम प्रति बोरी अधिक गेहूं लिया जा रहा है। महू-नीमच रोड स्थित खरीदी केंद्रों पर हकीकत सामने आने के बाद यहां मार्केटिंग सोसायटी के प्रबंधक मनोहर लोढ़ा ने बताया कि 50 किलो 600 ग्राम लिया जा रहा है। वहीं हम्मालों ने बताया कि 50 किलो पर एक किसान से 700 से 900 ग्राम अधिक उपज ली जा रही है। प्रबंधक लोढ़ा और हम्माल की बातों में अंतर आने पर वहां रखे कट्टों में से एक कट्टे का तौल कराया गया तो उसमें 50 किलो 970 ग्राम गेहूं मिला। यही स्थित अन्य तीन कट्टे तुलवाने पर भी बनी। इस पर प्रबंधक ने सफाई देते हुए कहा कि गेहूं में नमी होने से अधिक लिया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पिछले 20 दिन से तापमान लगातार 41 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे हाल में अब गेहूं में नमी कहां बची है।
लगभग ऐसे ही हालात दलहन फसलों को लेकर भी है। कोढ़ में खाज यह कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार नए वित्त वर्ष में साढ़े छह लाख टन दालों के आयात को मंजूरी दे दी है। इनमें मूंग और उड़द डेढ़ -डेढ़ लाख टन, अरहर दो लाख टन और मटर डेढ़ लाख टन आयात की मंजूरी शामिल है। इससे किसानों की समस्या और बढ़ेगी। किसानों की तकलीफ का दूसरा कारण यह है कि केंद्रों पर हम्माल भी चाय-पानी के नाम पर किसानों का शोषण करने में लगे हैं। भीषण गर्मी के दिनों में भी किसानों के लिए बैठक व्यवस्था तक नहीं है। इतना ही नहीं टैग भी किसानों को खुद ही बनाना पड़ रहे हैं।
– श्याम सिंह सिकरवार