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मंजिल अभी दूर

केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना सुखाड़ प्रभावित बुन्देलखण्ड इलाके में सिंचाई और पीने के लिये पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई केन्द्र सरकार की बहु-प्रतीक्षित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, अभी हाल ही में पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी आई थी। कमेटी ने क्षेत्र की परिस्थितियों का खाका तैयार किया। गौरतलब है कि केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना को लेकर दोनों प्रदेश सरकारों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनने से समझौता रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं।
उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से पानी की डिमांड तीसरी बार बढ़ा दी है। इससे परियोजना का काम अटक गया। जब केंद्र सरकार से परियोजना स्वीकृत हुई थी, तब यूपी को गैरबारिश के समय 700 एमसीएम पानी देने का निर्णय हुआ था। इसके बाद यूपी ने 780 एमसीएम पानी की डिमांड की। अब 900 एमसीएम पानी की डिमांड भेज दी है। पानी पर समझौता और अनुबंध न होने से इस परियोजना की लागत 9000 करोड़ से बढ़कर 22000 करोड़ से अधिक हो गई है। जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता राजीव सुकलीकर कहते हैं कि एमओयू में देरी उत्तर प्रदेश की तरफ से हो रही है। उसकी पानी की डिमांग बढ़ती जा रही है। शुरुआत में 700 एमसीएम पानी देने के बात हुई थी, उतना ही पानी उत्तर प्रदेश को दिया जाएगा।
दरअसल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच पानी के बंटवारे को लेकर पिछले एक साल से सहमति नहीं बन पा रही है। उत्तर प्रदेश लगातार पानी की डिमांड बढ़ाता जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि इस परियोजना में 100 प्रतिशत जमीन और जंगल उसका डूब रहा है, इसलिए अगर पूरा पानी उत्तर प्रदेश ले जाएगा तो प्रदेश के किसानों को कोई फायदा नहीं मिलेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 4.5 लाख हेक्टेयर से अधिक बढ़ेगा। वहीं, उत्तर प्रदेश में करीब 2.5 हेक्टेयर सिंचाई का अनुमान है। परियोजना के मुताबिक उत्तरप्रदेश के बांदा और मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले की सीमा पर बोधन गांव के निकट गंगोई बांध से केन नदी को 30 मीटर चौड़ी कांक्रीट नहर बनाकर आगे ले जाना है। धसान नदी पर एक टनल बनाकर आगे बढ़ाया जाएगा। छतरपुर के हरपालपुर से होकर यूपी के मऊरानीपुर बॉर्डर से मध्यप्रदेश की जतारा तहसील के गांवों से होकर नहर बनाई जाएगी। ये बरुआसागर बांध के ऊपर से होते हुए ओरछा के निचले हिस्से में स्थित नदी (नोटघाट पुल) में मिलाई जाएगी।
गौरतलब है कि यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में तैयार की गई ‘नदी जोड़ो योजनाÓ का ही हिस्सा है। इस योजना के तहत देश की तीस प्रमुख नदियों को जोड़े जाने की योजना है जिनमें 14 हिमालय क्षेत्र और 16 प्रायद्वीपीय भारत की नदियां शामिल हैं। इस योजना के अनुसार 30 नहरों के साथ ही 3000 जलाशयों और 34,000 मेगावाट क्षमता वाली विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण कराया जाना है। इसके अतिरिक्त इसके पूरा होने पर 87 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना इस वृहद नदी जोड़ो योजना की ही पहली कड़ी है।
गौरतलब है कि केन बेतवा नदी को जोडऩे के लिए कई बार मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में सहमति बनाने की कोशिश की गई, लेकिन कोई न कोई अडंगा सामने आता रहा। एक बार फिर से नई पहल की गई है।
समझौता नहीं चढ़ा परवान
इस परियोजना को धरातल पर लाने के लिये इससे जुड़े राज्यों, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच 2005 में ही समझौता हुआ था लेकिन विभिन्न अड़चनों के कारण इसे अब तक नहीं शुरू किया जा सका है। जिनमें पन्ना टाइगर रिजर्व, पर्यावरण मंजूरी, पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान से जुड़े मुद्दे, राज्यों के बीच विवाद, फसलों के वर्तमान पैटर्न पर पडऩे वाला प्रभाव आदि शामिल हैं। केन नदी मध्य प्रदेश स्थित कैमूर की पहाड़ी से निकलती है और 427 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद उत्तर प्रदेश के बांदा में यमुना में मिल जाती है। वहीं बेतवा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलती है और 576 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना में मिल जाती है। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने पर मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जिले के 3.96 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश के महोबा, बांदा और झांसी जिले के 2.65 लाख हेक्टेयर हिस्से पर सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। ये सभी जिले बुन्देलखण्ड क्षेत्र के हैं जो सूखा प्रभावित क्षेत्र हैं। इसके अन्तर्गत केन नदी का अतिरिक्त पानी 230 किलोमीटर लम्बी नहर के माध्यम से बेतवा नदी में डाला जाना है।
– राजेश बोरकर