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2031 का मास्टर प्लान

भाजपा शासनकाल में भोपाल और इंदौर सहित अन्य शहरों के मास्टर प्लान को लागू करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होता रहा है। लेकिन कमलनाथ सरकार ने शहरों के मास्टर प्लान को हरी झंडी दे दी है। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ और विभागीय मंत्री जयवर्धन सिंह ने मास्टर प्लान की रूपरेखा तय कर दी है। गौरतलब है कि 11 साल में एक बार भी भोपाल-इंदौर के वर्तमान मास्टर प्लान की न तो समीक्षा की गई और न ही व्यापक संशोधन हो सके। दो साल पहले मास्टर प्लान की समीक्षा के भी आदेश शासन ने भिजवाए, मगर उन पर भी अमल नहीं किया जा सका। अब दो साल बाद 2021 तक के लिए बनाया गया प्लान समाप्त हो जाएगा और यह साल तो पूरा चुनावों में ही निकलेगा। फिलहाल 2031 के मास्टर प्लान की तैयारी अवश्य नगर तथा ग्राम निवेश ने शुरू कर दी है। लेकिन उनकी राह में भू माफिया सबसे बड़ा रोड़ा बन सकते हैं।
भोपाल-इंदौर का मास्टर प्लान 1 जनवरी 2008 को लागू किया गया था, जो 2021 तक के लिए है। यानी 31 दिसम्बर 2021 तक वर्तमान मास्टर प्लान अमल में आता रहेगा। उसके पहले शासन के आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय को नया प्लान तैयार करना होगा, ताकि 1 जनवरी 2022 से उसे लागू किया जा सके। नगर तथा ग्राम निवेश इंदौर ने फिलहाल 2031 के आगामी मास्टर प्लान की तैयारी की है। यानी 10 साल के लिए जो प्लान बनना है उसके लिए संबंधित विभागों से डाटा कलेक्शन किए जा रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अब चूंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई है और पूर्व की तैयारी भाजपा सरकार के मन मुताबिक की गई थी, लिहाजा अब संभव है कि अब मास्टर प्लान 2031 के बजाय 2041 के मान से बनाया जाए। फिलहाल तो आगामी मास्टर प्लान के लिए विभाग ने अपने स्तर पर काफी तैयारियां कर ली हैं। उधर, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नगरीय विकास और परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान भोपाल सहित प्रमुख शहरों के बनाए जाने वाले मास्टर प्लान के लिए 10 बिन्दुओं पर दिशा-निर्देश जारी करवाए हैं, जिनमें नगरीय निकायों के लिए जोनल और लोकल एरिया प्लान भी तैयार करवाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने शहरों के सघन और अधिक सघन क्षेत्रों को चिह्नांकित करते हुए नगरीय निकाय सीमा निवेश क्षेत्र के अंदर जनसंख्या के विस्तार के लिए नियोजन में लेने को भी कहा है। सामुहिक पार्किंग प्रावधान के साथ छोटे सघन रास्तों, पैदल मार्गों पर नक्शों पर अंकित करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने नगरीय निकाय जोनल एवं लोकल एरिया प्लान वॉक थ्रू सर्वे करवाकर तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि अधोसंरचना परियोजनाएं जरूरत के मुताबिक शामिल की जा सकें। इनमें नगरीय सुविधाएं, जिनमें कचरा प्रबंधन, जल-मल निकासी, बस स्टैंड आदि का भी स्पष्ट चिह्नांकन करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान में विवाहघरों, यानी मैरिज गार्डनों के लिए भी आवश्यक नीति बनाने को कहा है। सरकारी भूमि के संरक्षण और न्यायालयीन मामलों में प्रतिरक्षण की समुचित कार्रवाई करने, मुख्य स्थानों पर किए गए अतिक्रमणों को चिह्नित कर हटाने और मास्टर प्लान में एक बॉयो डायवर्सिटी पार्क के विकास का प्रावधान करने को भी कहा गया है। इतना ही नहीं, ऑडिटोरियम, कन्वेंशन सेंटर, सुुपर मार्केट, सामुदायिक पार्किंग का विकास सेल्फ फाइनेंसिंग से करने का परीक्षण भी किया जाएगा। हालांकि कमलनाथ सरकार भी एक महीने बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते काम नहीं कर पाएगी। उसके बाद नगरीय निकायों के स्थानीय चुनाव आ जाएंगे। बहरहाल, आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मुख्यमंत्री द्वारा मास्टर प्लान को लेकर दी गई गाइडलाइन पर अमल शुरू कर दिया है।
24 शहरों में जीआईएस बेस पर बनेगा प्लान
अभी तक परम्परागत तरीके से मास्टर प्लान बनाए जाते थे, मगर अब समय की जरूरतों और खासकर स्मार्ट सिटी, अमृत से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना और मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्टों का समावेश करते हुए मास्टर प्लान बनाना पड़ते हैं। इंदौर में ही स्मार्ट सिटी के साथ अमृत और अन्य बड़े-बड़े प्रोजेक्ट अमल में लाए जाना है। लिहाजा आगामी मास्टर प्लान में उनके स्पष्ट प्रावधान करना होंगे। नगर तथा ग्राम निवेश ने 2031 के मान से जहां संबंधित विभागों से डाटा कलेक्शन का कार्य तो कर लिया है, मगर केन्द्र सरकार ने इंदौर सहित 24 शहरों में जीआईएस बेस आधारित मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसके चलते इसरो से सेटेलाइट इमेज हासिल की जाएगी। इसरो के हैदराबाद स्थित कार्यालय ने भोपाल की सेटेलाइट इमेज तो तैयार करके भेज दी है, अब जल्द ही इंदौर की भी प्राप्त हो जाएगी, जिसके आधार पर आगामी मास्टर प्लान जीआईएस बेस पर रहेगा।
– भोपाल से राजेश बोरकर