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एलान-ए-जंग

लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की 29 सीटों का क्या महत्व रहेगा इसका आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस और भाजपा के लिए मध्यप्रदेश चुनावी रणनीति का केन्द्र बन गया है। दोनों पार्टियों के दिग्गज नेता लगातार मप्र का दौरा कर रहे हैं और यहां के नेताओं के साथ बैठकर चुनावी रणनीति बना रहे हैं। विगत दिनों भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव का शंखनाद करते हुए आभार रैली में पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने सरकार के दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों को 6 हजार रुपये वार्षिक मदद देने के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी को डराकर कोई भी काम कराया जा सकता है।
जंबूरी मैदान में विधानसभा चुनाव में जीत पर किसान आभार रैली थी। इस रैली में भी राहुल गांधी का भाषण किसान गरीब और युवाओं पर केंद्रित रहा। यानि आने वाले लोकसभा चुनाव में किसान गरीब कांग्रेस का फिर सबसे बड़ा मुद्दा होने वाला है। किसानों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो उनकी सरकार गरीब वर्ग के हर एक व्यक्ति को न्यूनतम आय की गारंटी देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हरित क्रांति, सफेद क्रांति, भोजन का अधिकार, कम्प्यूटर लाई। उधर, मोदीजी किसानों को 17 रुपए प्रतिदिन देने की घोषणा पर खुद की तारीफ कर रहे हैं। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए राहुल ने कहा कि मध्यप्रदेश में 15 साल सिर्फ अधिकारियों के बल पर राज चला है। लेकिन हम जनता की सरकार चलाएंगे।
मप्र में राजनीतिक दलों की सक्रियता से यह साफ हो गया है कि लोकसभा के चुनाव में मध्यप्रदेश समेत हिन्दी भाषी राज्यों के कार्यकर्ता मतदान के दिन तक वोटर माई बाप बने रहेंगे। कांग्रेस और भाजपा के साथ अन्य दलों के सामने मप्र में कार्यकर्ताओं में जोश बनाए रखने की चुनौती आ रही है। आठ फरवरी को राहुल बाबा की किसान आभार सभा में कार्यकर्ताओं को सिर माथे पर बैठाने जैसे भाषण हुए। मसलन राहुल गांधी ने कमलनाथ सरकार के लिए कहा ये कार्यकर्ताओं की सरकार है। कार्यकर्ताओं की नहीं सुनने वालों को कुर्सी से हटा दिया जाएगा। इसके पहले उन्होंने कहा था दस दिन में किसानों का कर्जा माफ नहीं सीएम साफ। कमलनाथ ने अपने पहले आदेश में कर्ज माफी पर हस्ताक्षर किए थे। इस सबके बाद भी मंत्रियों के रथ जमीन से ऊपर उठना रुक नहीं पा रहा है। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में सरकार को लेकर ठंडापन दिखने लगा है। इस बात को साफगोई के लिए मशहूर दीपक बाबरिया ने पकड़ा और कहा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा भारी पड़ सकती है। दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जोश भरने के लिए कह रहे हैं टाइगर अभी जिन्दा है और जहां भी वे जाते हैं उनका हीरो की तरह स्वागत होता है।
उधर, लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रियों और विधायकों को भी हद में रहने की बात कही है। यही नहीं उन्होंने मीडिया से रूबरू होने के लिए अपने सात मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी दी है। इनमें जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के अतिरिक्त संस्कृति एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ, गृह मंत्री बाला बच्चन, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवक कल्याण मंत्री जीतू पटवारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह और वित्त मंत्री तरुण भनोट शामिल हैं।
उधर भाजपा में सिर फुटव्वल की स्थिति है। भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 के लिए प्रत्याशियों की चयन की प्रक्रिया मार्च के तीसरे हफ्ते में शुरू करेगी। हालांकि इससे पहले 15 फरवरी से पार्टी ने अपने मौजूदा सांसदों के लिए गिवअप टिकट स्कीम शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि मौजूदा सांसद अपनी जगह किसी दूसरे कार्यकर्ता को चुनाव लड़ाने के लिए स्वेच्छा से टिकट पर अपनी दावेदारी छोडऩे की घोषणा करेंगे। अगर खराब परफॉर्मेंस वाले सांसद ऐसा नहीं करते हैं तो संगठन उनका टिकट काट कर किसी जिताऊ उम्मीदवार को टिकट दे सकता है। गौरतलब है कि भाजपा केंद्र में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने के लिए अपने सांसदों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करवा रही है। उधर, संघ का दावा है कि मप्र में भाजपा के 26 सांसदों में से 16 पर हार का खतरा मंडरा रहा है। इसलिए संघ ने उनका टिकट काटने की सलाह दी है। ऐसे में भाजपा संगठन ने गिवअप टिकट स्कीम शुरू की है। भाजपा के एक वरिष्ठ महासचिव का कहना है कि स्वेच्छा से टिकट की दावेदारी छोडऩे वाले सांसदों या तो सार्वजनिक रूप से या गुप्त रूप से पार्टी फोरम पर ऐसा कर सकते हैं।
उधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम नए चेहरों को तलाशने के लिए लोकसभा क्षेत्रों में सर्वे कर रही है। टिकट तय करने का जिम्मा शाह ने अपने हाथों में ले रखा है। प्रदेश के 26 में से आधे सांसदों का टिकट कटना तय माना जा रहा है।
भाजपा की 13 सीटें डेंजर जोन में
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते प्रदेश की 29 में से 27 सीटें जीतने वाली भाजपा के क्षत्रपों की नींद विधानसभा चुुनाव के नतीजों ने उड़ा दी है। हालांकि रतलाम-झाबुआ सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से जीत ली थी। 4 महीने बाद होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा की लोकसभा की 13 सीटें डेंजर जोन में आ चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री और ग्वालियर सांसद नरेंद्र सिंह तोमर ज्यादा जोखिम में नजर आ रहे हैं। वहीं, सांसद अनूप मिश्रा, फग्गन सिंह कुलस्ते, नंदकुमार सिंह चौहान, भागीरथ प्रसाद, प्रहलाद पटेल, रोडमल नागर और सावित्री ठाकुर को भी सीट बचाने एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। खुद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह जबलपुर सीट पर घिरे नजर आ रहे हैं। शपथ ग्रहण करने के महज दो घंटे बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कर्ज माफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
और कांग्रेसी हो गए रामकृष्ण कुसमरिया
शिवराज सरकार में कृषि मंत्री रहे और संघ के खांटी स्वयंसेवक रामकृष्ण कुसमरिया कांग्रेस में शामिल हो गए। भोपाल का जंबूरी मैदान इसका गवाह बना। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। रामकृष्ण कुसमरिया ने भोपाल के जंबूरी मैदान में किसान आभार सभा में कहा, बीजेपी ने पार्टी के बुजुर्गों को धक्का देकर बाहर बैठा दिया है। पार्टी की रीति नीति बदलने के कारण उन्होंने बीजेपी को छोडऩा बेहतर समझा। उन्होंने कहा खुद को संस्कारित पार्टी कहने वाली बीजेपी के बारे में अब आप सब जानते हैं कि उसने हमारे बुजुर्गवार और सम्माननीयों का अपमान किया है। उन्होंने कंस का उदाहरण देते हुए कहा जिस तरह कंस ने अपने पिता को जेल में डाल दिया था उसी तरह बीजेपी ने भी अपने बुजुर्गों का अपमान किया है। रामकृष्ण कुसमरिया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुखातिब होते हुए याद किया कि इनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने हमें आरएसएस का सदस्य बनवाया था, लेकिन अब पार्टी की रीति-नीति बदल गई है, इसलिए हमें भी दल बदलना पड़ा। अब हम राहुल गांधी और कमलनाथ के लिए काम करेंगे। कुसमरिया ने सीएम कमलनाथ की तारीफ में कसीदे पढ़े।
– नवीन रघुवंशी