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विपक्षी एकता

जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी के सत्यागृह में विपक्षी एकता देखने को मिली। लेकिन इस एकता में भी कई तरह की बाधाएं भी नजर आई। इस अवसर पर फारूक अब्दुल्ला ने मंच से ही इन बाधाओं की तरफ इशारा भी कर दिया था। अब्दुल्ला ने कहा था कि नरेंद्र मोदी को हटाना इतना आसान नहीं है। अगर उन्हें हटाना है तो कुछ लोगों को अपने अहम छोडऩे पड़ेंगे और उन्हें उन लोगों के लिए जगह देनी पड़ेगी जो किसी राज्य में मजबूत हैं। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में तानाशाही हटाओ – लोकतंत्र बचाओं सत्याग्रह रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सीपीएम के सीताराम येचुरी, एनसीपी के शरद पवार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, बीजेपी के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा सहित विपक्ष के कई नेता शामिल हुए।
रैली को संबोधित करते हुए सीपीआई नेता डी. राजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संविधान खतरे में है। मोदी के शासन में संसद का मान घटा है और उसकी भूमिका को भी नजरअंदाज किया गया। राजा ने कहा कि बीजेपी का सत्ता में होना संविधान और लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्हें परास्त करना होगा। वहीं, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि बीजेपी भाई-भाई को लड़ाकर दु:शासन की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर भारत के लिए इस सरकार को बदलने की जरूरत है। देश को बचाने के लिए चौकीदार को हटाना होगा। येचुरी ने कहा, बीजेपी कौरव सेना की तरह है लेकिन पांडव (विपक्ष) उन्हें परास्त करेंगे और देश को बचाऐंगे। उधर, शरद यादव ने कहा, बीजेपी ने चुनाव को बेहद अमर्यादित बना दिया है, अगर लाल बहादुर शास्त्री और जय प्रकाश नारायण अगर चुनाव लड़ते तो उन्हें सफलता नहीं मिलती। समय आ गया है कि उसे बाहर का दरवाजा दिखाया जाए। भारत को बचाने की जरूरत है। सबसे दिलचस्प यह रहा कि ममता बेनर्जी के पहुंचने के कुछ मिनट पहले दोनों वाम नेता मंच से उतर गए। एसपी के रामगोपाल यादव, आप के संजय सिंह, राकांपा के शरद पवार और एलजेडी प्रमुख शरद यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी रैली में उपस्थित थे।
दिल्ली में तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया कि वे राष्ट्रहित में गठबंधन करने को तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस ही इस मुद्दे पर आगे बढऩे को तैयार नहीं है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह साफ कर दिया कि दिल्ली में भाजपा को हराने के लिए अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर अभी साफ नहीं है।
बेनर्जी के मुताबिक जिस राज्य में जो दल बड़ा है, उसका सहयोग दूसरे दलों को करना चाहिए। बात ही बात में उन्होंने पश्चिम बंगाल में खुद के सबसे मजबूत होने का दावा किया और इस बात का भी इशारा कर दिया कि वहां किसी अन्य ताकत की मजबूत दखल उन्हें बर्दाश्त नहीं होगी। दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित ने कहा कि वे नहीं चाहतीं कि राजधानी में उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन करे। इस अवसर पर उन्होंने दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर हमला करना भी जारी रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने चार साल में एक भी ऐसा काम नहीं किया है जिसे वो अपना कह सके। सिग्नेचर ब्रिज सहित सभी काम उनके शुरु किये हुए हैं और केजरीवाल अब उनका उद्घाटन कर अपना बता रहे हैं। दिल्ली कांग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि दिल्ली में गठबंधन के मुद्दे पर पूर्व में राज्य इकाई से बात की गई थी। उस समय मौजूदा अध्यक्ष शीला दीक्षित ने ऐसे किसी गठबंधन से साफ इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि राहुल गांधी की शीला दीक्षित के साथ इस मीटिंग के बाद दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको ने राहुल को दिल्ली की जमीनी स्थिति से अवगत कराया था।
– ऋतेन्द्र माथुर